अध्याय 2 — अभिवृत्ति
अभिवृत्ति किसी व्यक्ति, विचार, संस्था, समूह या परिस्थिति के प्रति हमारा अपेक्षाकृत स्थिर मानसिक रुझान है। यह हमारे विचार, भावनाओं और व्यवहार की दिशा को प्रभावित करती है और लोक प्रशासन में निष्पक्षता, संवेदनशीलता तथा नागरिक-केंद्रित व्यवहार के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
1. अभिवृत्ति की अवधारणा
अभिवृत्ति (Attitude) किसी विशिष्ट विषय के प्रति व्यक्ति का मूल्यांकनात्मक मानसिक रुझान है। जिस व्यक्ति, वस्तु, विचार, संस्था या परिस्थिति के प्रति यह रुझान होता है, उसे अभिवृत्ति-विषय (Attitude Object) कहा जाता है।
- सकारात्मक अभिवृत्ति: अनुकूलता, समर्थन या पसंद।
- नकारात्मक अभिवृत्ति: विरोध, असहमति या नापसंदगी।
- मिश्रित अभिवृत्ति (Ambivalent Attitude): एक ही विषय के प्रति सकारात्मक और नकारात्मक दोनों भावों का एक साथ होना।
2. अभिवृत्ति की विषयवस्तु और संरचना
UPSC पाठ्यक्रम में अभिवृत्ति की विषयवस्तु, संरचना और कार्य स्पष्ट रूप से शामिल हैं। इसकी संरचना को प्रायः ABC मॉडल से समझाया जाता है।
| घटक | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| संज्ञानात्मक (Cognitive) | विषय के बारे में ज्ञान, विश्वास, धारणा और विचार | धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। |
| भावात्मक (Affective) | विषय से जुड़ी भावना, पसंद, नापसंद या भावनात्मक प्रतिक्रिया | धुएँ की गंध से अरुचि महसूस होना। |
| व्यवहारात्मक (Behavioural) | विषय के प्रति किसी विशेष ढंग से व्यवहार करने की प्रवृत्ति | सिगरेट के प्रस्ताव को मना कर देना। |
3. अभिवृत्ति की प्रमुख विशेषताएँ
- यह किसी विशिष्ट विषय के प्रति होती है।
- मुख्यतः अनुभव, सामाजिकरण और अधिगम से विकसित होती है।
- अपेक्षाकृत स्थिर होती है, पर अपरिवर्तनीय नहीं।
- इसमें दिशा, तीव्रता और स्थिरता होती है।
- यह व्यवहार की संभावना को प्रभावित करती है, पर व्यवहार का पूर्ण पूर्वानुमान नहीं करती।
- प्रत्यक्ष अनुभव से बनी अभिवृत्ति सामान्यतः अधिक मजबूत होती है।
4. अभिवृत्ति का निर्माण
4.1 सामाजिक कारक
- परिवार: प्रारंभिक विश्वास, लैंगिक भूमिकाएँ, अनुशासन और सामाजिक दृष्टिकोण।
- मित्र और सहकर्मी: समूह-स्वीकृति और अनुकरण के माध्यम से प्रभाव।
- शिक्षा: तर्कशीलता, संवैधानिक मूल्य और विविध दृष्टिकोण से परिचय।
- मीडिया और सामाजिक माध्यम: सूचना, फ्रेमिंग, पुनरावृत्ति और भावनात्मक संदेश के माध्यम से प्रभाव।
- संदर्भ समूह: वह समूह जिसके जैसा व्यक्ति स्वयं को देखना चाहता है।
- व्यक्तिगत अनुभव: प्रत्यक्ष सकारात्मक या नकारात्मक अनुभव अभिवृत्ति को मजबूत कर सकते हैं।
4.2 अधिगम की प्रमुख प्रक्रियाएँ
- शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): किसी विषय को बार-बार सकारात्मक या नकारात्मक संकेत से जोड़ना।
- साधनात्मक/क्रियात्मक अनुबंधन (Operant Conditioning): पुरस्कार, प्रशंसा, दंड या सामाजिक प्रतिक्रिया के आधार पर व्यवहार और अभिवृत्ति का मजबूत या कमजोर होना।
- प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning): माता-पिता, वरिष्ठ अधिकारी, सहकर्मी या आदर्श व्यक्तियों के व्यवहार को देखकर सीखना।
4.3 व्यक्तित्व और जैविक प्रभाव
स्वभाव, भावनात्मक प्रतिक्रिया, जोखिम लेने की प्रवृत्ति और व्यक्तित्व के कुछ पहलुओं में जैविक प्रभाव हो सकते हैं, पर सामाजिक अभिवृत्ति को केवल आनुवंशिकता से समझना उचित नहीं है। शिक्षा, अनुभव, संस्कृति और परिस्थितियाँ निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
5. अभिवृत्ति के कार्य
अभिवृत्ति व्यक्ति को केवल प्रतिक्रिया नहीं देती, बल्कि मानसिक और सामाजिक कार्य भी करती है।
| कार्य | भूमिका |
|---|---|
| ज्ञानात्मक कार्य | जटिल दुनिया को वर्गीकृत और समझने के लिए मानसिक ढाँचा देता है। |
| उपयोगितावादी/अनुकूलन कार्य | लाभ प्राप्त करने और हानि से बचने में मदद करता है। |
| मूल्य-अभिव्यक्ति कार्य | व्यक्ति अपने मूल्यों और पहचान को व्यवहार में व्यक्त करता है। |
| अहं-रक्षात्मक कार्य | कुछ अभिवृत्तियाँ व्यक्ति को आत्मसम्मान या मानसिक सुरक्षा बनाए रखने में सहायता करती हैं। |
5.1 दुष्प्रकार्य
- रूढ़िवादिता और मानसिक कठोरता।
- नई सूचना के प्रति चयनात्मक ग्रहणशीलता।
- पूर्वाग्रह, भेदभाव और समूह-ध्रुवीकरण।
- नवाचार और सुधार के प्रति प्रतिरोध।
- प्रशासन में नागरिकों के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार।
6. अभिवृत्ति, मूल्य, विचार और विश्वास
| अवधारणा | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| विचार (Thought) | किसी विषय के प्रति तत्काल या अस्थायी संज्ञानात्मक प्रतिक्रिया। |
| विश्वास (Belief) | किसी कथन या धारणा को सत्य मानने की अपेक्षाकृत स्थिर प्रवृत्ति। |
| मूल्य (Value) | जीवन और व्यवहार को दिशा देने वाला व्यापक आदर्श। |
| अभिवृत्ति (Attitude) | किसी विशिष्ट विषय के प्रति मूल्यांकनात्मक रुझान, जिसमें विचार, भावना और व्यवहारिक प्रवृत्ति शामिल होती है। |
उदाहरणतः यदि समानता किसी व्यक्ति का मूल्य है, तो जातिगत भेदभाव के प्रति उसकी नकारात्मक अभिवृत्ति बनने की संभावना अधिक है।
7. रूढ़ छवि, पूर्वाग्रह और भेदभाव
- रूढ़ छवि: किसी समूह के बारे में सामान्यीकृत धारणा; मुख्यतः संज्ञानात्मक स्तर।
- पूर्वाग्रह: अपर्याप्त आधार पर सकारात्मक या नकारात्मक भावात्मक झुकाव।
- भेदभाव: उस पूर्वाग्रह का व्यवहार में असमान या अनुचित रूप से प्रकट होना।
8. अभिवृत्ति और व्यवहार का संबंध
अभिवृत्ति व्यवहार को प्रभावित करती है, पर दोनों में हमेशा सीधा संबंध नहीं होता। प्रसिद्ध लापिएर अध्ययन (LaPiere Study) ने दिखाया कि घोषित अभिवृत्ति और वास्तविक व्यवहार अलग हो सकते हैं।
अभिवृत्ति और व्यवहार में सामंजस्य की संभावना तब बढ़ती है जब:
- अभिवृत्ति मजबूत और प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित हो।
- अभिवृत्ति और व्यवहार दोनों एक ही विशिष्ट विषय से जुड़े हों।
- सामाजिक दबाव कम हो।
- व्यक्ति को व्यवहार पर पर्याप्त नियंत्रण प्राप्त हो।
- व्यक्ति का इरादा स्पष्ट और दृढ़ हो।
इसके विपरीत कानून का भय, सामाजिक दबाव, नौकरी की बाध्यता, समूह-मानदंड या संसाधनों की कमी व्यक्ति को अपनी अभिवृत्ति के विपरीत व्यवहार करने पर मजबूर कर सकती है।
9. अभिवृत्ति परिवर्तन
9.1 परिवर्तन के प्रकार
- संगत परिवर्तन: दिशा वही रहती है, तीव्रता बदलती है—जैसे सकारात्मक से अधिक सकारात्मक।
- असंगत परिवर्तन: दिशा बदल जाती है—जैसे नकारात्मक से सकारात्मक। यह अपेक्षाकृत कठिन होता है।
9.2 परिवर्तन की विधियाँ
- विश्वसनीय और नई सूचना देना।
- समान स्तर पर सार्थक अंतर-समूह संपर्क बढ़ाना।
- भूमिका-निर्वाह (Role Playing) और दृष्टिकोण ग्रहण (Perspective Taking)।
- अनुभवात्मक प्रशिक्षण और क्षेत्रीय exposure।
- आदर्श व्यक्तियों तथा नैतिक नेतृत्व का प्रभाव।
- अनुनयन और सामाजिक प्रभाव।
- व्यवहारिक प्रोत्साहन और सूक्ष्म प्रोत्साहन (Nudge)।
9.3 परिवर्तन में बाधाएँ
- मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध (Reactance): स्वतंत्रता पर नियंत्रण महसूस होने पर उल्टा प्रतिरोध।
- पूर्व-चेतावनी (Forewarning): पहले से पता होना कि कोई व्यक्ति हमारी राय बदलना चाहता है।
- चयनात्मक बचाव: केवल अपनी पसंद की सूचना देखना।
- पक्षपातपूर्ण आत्मसात: विरोधी सूचना को भी अपने पुराने विश्वास के समर्थन में ढाल लेना।
- अभिवृत्ति प्रतिरक्षण (Attitude Inoculation): कमजोर विरोधी तर्कों का सामना कर पुरानी अभिवृत्ति का और मजबूत हो जाना।
10. सामाजिक प्रभाव
सामाजिक प्रभाव (Social Influence) वह प्रक्रिया है जिसमें दूसरों की वास्तविक या कल्पित उपस्थिति हमारे विचार, भावनाएँ या व्यवहार बदलती है। इसके प्रमुख रूप हैं:
| रूप | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुरूपता (Conformity) | समूह के मानदंड के अनुरूप स्वयं को ढालना | कार्यालय में सभी समय पर आएँ तो नए कर्मचारी का भी समयपालन करना |
| अनुपालन (Compliance) | प्रत्यक्ष अनुरोध के कारण व्यवहार बदलना | स्वच्छता अभियान में स्थानीय अधिकारी के अनुरोध पर नागरिकों का भाग लेना |
| आज्ञाकारिता (Obedience) | वैध प्राधिकार के निर्देश का पालन | आपदा में वैधानिक निकासी आदेश मानना |
| पहचान (Identification) | जिस समूह या व्यक्ति से जुड़ाव हो, उसके मानकों को अपनाना | प्रशिक्षु अधिकारी का अच्छे वरिष्ठ की कार्यशैली अपनाना |
| आंतरिकीकरण (Internalisation) | किसी विचार को इसलिए अपनाना क्योंकि वह अपने मूल्यों से संगत लगता है | पारदर्शिता को केवल नियम नहीं, व्यक्तिगत प्रशासनिक मूल्य मानना |
11. अनुनयन
अनुनयन (Persuasion) बिना बल प्रयोग के तर्क, संचार, भावनात्मक अपील और विश्वसनीयता के माध्यम से अभिवृत्ति या व्यवहार बदलने का प्रयास है।
11.1 अनुनयन के प्रमुख तत्व
- वक्ता: विश्वसनीयता, विशेषज्ञता, भरोसा और समानता।
- संदेश: स्पष्टता, तर्क, भावनात्मक अपील, प्रमाण और समाधान।
- माध्यम: आमने-सामने संवाद, सामुदायिक मंच, रेडियो, डिजिटल मीडिया आदि।
- श्रोता: आयु, शिक्षा, पूर्वधारणा, रुचि, प्रेरणा और संदेश की प्रासंगिकता।
11.2 संदेश का प्रसंस्करण
- व्यवस्थित/केंद्रीय प्रसंस्करण: व्यक्ति तर्क, प्रमाण और कारणों पर गंभीरता से विचार करता है; बदलाव अपेक्षाकृत स्थायी होता है।
- ह्यूरिस्टिक/परिधीय प्रसंस्करण: प्रसिद्धि, आकर्षण, समूह-समर्थन या सरल संकेतों के आधार पर राय बनती है; बदलाव अपेक्षाकृत कम स्थायी हो सकता है।
11.3 प्रशासन में उपयोग
- टीकाकरण के प्रति संकोच कम करना।
- स्वच्छता और शौचालय उपयोग बढ़ाना।
- बालिका शिक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
- कर अनुपालन, सड़क सुरक्षा और ऊर्जा बचत के व्यवहार को प्रोत्साहित करना।
- सामुदायिक तनाव में अफवाहों का प्रतिरोध और विश्वास-निर्माण।
12. सूक्ष्म प्रोत्साहन
सूक्ष्म प्रोत्साहन (Nudge) ऐसा व्यवहारिक हस्तक्षेप है जिसमें विकल्पों को समाप्त किए बिना विकल्प-परिवेश को इस तरह बनाया जाता है कि वांछित व्यवहार आसान या अधिक संभावित हो जाए।
- कर भुगतान की समय-सीमा से पहले सरल अनुस्मारक।
- स्वस्थ भोजन को अधिक दृश्य स्थान पर रखना।
- ऊर्जा बिल में पड़ोस के औसत उपभोग की तुलना दिखाना।
13. संज्ञानात्मक असंगति
संज्ञानात्मक असंगति (Cognitive Dissonance) वह मानसिक तनाव है जो व्यक्ति के विचार, मूल्य और वास्तविक व्यवहार में विरोध होने पर पैदा होता है।
तनाव कम करने के मुख्य तरीके हैं—व्यवहार बदलना, विश्वास बदलना, अतिरिक्त औचित्य खोजना या अपनी प्राथमिकताओं का पुनर्मूल्यांकन करना।
14. नैतिक अभिवृत्ति
नैतिक अभिवृत्ति (Moral Attitude) सही–गलत, न्याय–अन्याय, अधिकार, कर्तव्य, गरिमा और नैतिक विवादों के प्रति व्यक्ति का रुझान है।
इसे केवल “रूढ़िवादी बनाम उदार” दो खानों में सीमित करना उचित नहीं है। एक परिपक्व नैतिक अभिवृत्ति में तर्क, करुणा, मानव गरिमा, अधिकार, कर्तव्य, परिणाम और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलित विचार आवश्यक है।
लोक सेवक की नैतिक अभिवृत्ति में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और संविधान के प्रति निष्ठा प्रमुख होने चाहिए।
15. राजनीतिक अभिवृत्ति
राजनीतिक अभिवृत्ति (Political Attitude) राज्य, शासन, नीतियों, लोकतंत्र, अधिकारों, राजनीतिक संस्थाओं और सार्वजनिक मुद्दों के प्रति व्यक्ति का रुझान है।
राजनीतिक विचारों को केवल वाम–केंद्र–दक्षिण में बाँटना एक मोटा सरलीकरण है। व्यक्ति आर्थिक नीति, सामाजिक परिवर्तन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, राज्य की भूमिका, सुरक्षा और कल्याण जैसे अलग-अलग मुद्दों पर अलग रुख रख सकता है।
16. लोक सेवक के लिए वांछित अभिवृत्ति
- नागरिक-केंद्रित और सेवा-उन्मुख दृष्टिकोण।
- निष्पक्षता और गैर-पक्षपात।
- कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता।
- परिवर्तन और नवाचार के प्रति खुलापन।
- तथ्य-आधारित निर्णय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
- तनाव में सकारात्मकता और समाधान-केंद्रित सोच।
- संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नैतिक साहस।
ऐसी अभिवृत्ति प्रशिक्षण, विविध सामाजिक exposure, आत्मचिंतन, नैतिक नेतृत्व, नागरिकों से प्रत्यक्ष संवाद, प्रतिक्रिया-व्यवस्था और अच्छे संस्थागत प्रोत्साहनों से विकसित की जा सकती है।
17. अध्याय का सार
- अभिवृत्ति विचार, भावना और व्यवहारिक प्रवृत्ति का संयोजन है।
- अभिवृत्ति सीखी जाती है और सामाजिक अनुभवों से बदल भी सकती है।
- अभिवृत्ति और व्यवहार में मजबूत संबंध है, लेकिन परिस्थिति और सामाजिक दबाव इस संबंध को बदल सकते हैं।
- पूर्वाग्रह नकारात्मक अभिवृत्ति है; भेदभाव उसका व्यवहारिक रूप हो सकता है।
- सामाजिक प्रभाव और अनुनयन लोक प्रशासन में व्यवहार परिवर्तन के महत्त्वपूर्ण साधन हैं।
- लोक सेवक की अभिवृत्ति का अंतिम मानदंड संविधान, निष्पक्षता और जनहित होना चाहिए।
PYQ
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