रक्षा स्वदेशीकरण: प्लेटफॉर्म से सेंसर और हथियार उप-प्रणालियों तक
रक्षा स्वदेशीकरण को प्लेटफॉर्म से आगे सेंसर, रडार और हथियार उप-प्रणालियों तक विस्तारित करने की आवश्यकता पर 10 अंक/150 शब्द का आदर्श उत्तर।
प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
भारत का रक्षा स्वदेशीकरण केवल प्लेटफॉर्म तक सीमित न रहकर सेंसर और हथियार उप-प्रणालियों तक पहुँचना क्यों आवश्यक है? हालिया रडार और एविएशन-गन पहलों के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न की मांग
- प्लेटफॉर्म और critical subsystems के बीच निर्भरता का अंतर स्पष्ट करें।
- रडार तथा 20 mm aviation gun जैसे उदाहरणों से रणनीतिक महत्व बताएं।
- गुणवत्ता, परीक्षण और उत्पादन-क्षमता की चुनौतियाँ जोड़ें।
आदर्श उत्तर
भूमिका: कोई लड़ाकू प्लेटफॉर्म तभी वास्तविक रूप से स्वदेशी माना जा सकता है जब उसके महत्वपूर्ण सेंसर, हथियार, इलेक्ट्रॉनिक्स और रखरखाव-श्रृंखला पर भी घरेलू नियंत्रण हो।
रणनीतिक आवश्यकता: आयातित radar, seekers, guns या electronic modules युद्धकाल में आपूर्ति-प्रतिबंध और spare-part निर्भरता पैदा कर सकते हैं। स्वदेशी उप-प्रणालियाँ परिचालन उपलब्धता, त्वरित उन्नयन और जीवन-चक्र लागत पर नियंत्रण देती हैं।
DRDO की 20 mm aviation-gun पहल और fighter/mini-micro drone detection में सक्षम LLLR-I जैसे रडार इस दिशा के उदाहरण हैं। Development-cum-production partner मॉडल निजी उद्योग को डिजाइन से उत्पादन तक जोड़ता है।
चुनौतियाँ: उच्च विश्वसनीयता, कठोर परीक्षण, गोला-बारूद/प्लेटफॉर्म एकीकरण, सेंसर fusion, semiconductor निर्भरता और बड़े पैमाने की उत्पादन क्षमता अभी भी महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर रक्षा का लक्ष्य केवल “Made in India platform” नहीं, बल्कि design sovereignty और subsystem depth होना चाहिए।
मूल्यवर्धन
- स्वदेशीकरण = डिजाइन + उत्पादन + रखरखाव + उन्नयन क्षमता।
- सेंसर और हथियार उप-प्रणालियाँ युद्धक क्षमता की मूल कड़ी हैं।