कल्याणकारी योजनाओं में जागरूकता और जनभागीदारी • UPSC 2019
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कल्याणकारी योजनाओं में जागरूकता और जनभागीदारी • UPSC 2019 पर 250 शब्द का मुख्य परीक्षा आदर्श उत्तर: प्रश्न की मांग, विश्लेषण, समाधान और निष्कर्ष।
प्रश्न
UPSC 2019 • मुख्य परीक्षा • सामान्य अध्ययन-II
कमजोर वर्गों के लिए क्रियान्वित कल्याणकारी योजनाओं का प्रदर्शन नीति प्रक्रिया के सभी चरणों में उनकी जागरूकता और सक्रिय भागीदारी के अभाव के कारण उतना प्रभावी नहीं है। चर्चा कीजिए।
मूल अंग्रेज़ी प्रश्न
Performance of welfare schemes that are implemented for vulnerable sections is not so effective due to absence of their awareness and active involvement at all stages of policy process. Discuss.
प्रश्न की मांग
- नीति-निर्माण, क्रियान्वयन और मूल्यांकन—तीनों चरणों में भागीदारी की भूमिका बतानी है।
- भागीदारी की कमी को अन्य प्रशासनिक बाधाओं के साथ संतुलित रूप से देखना है।
आदर्श उत्तर
भूमिका: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सफलता केवल बजट और लाभार्थियों की संख्या से नहीं, उनकी वास्तविक जरूरतों की पूर्ति से तय होती है। जागरूकता और सक्रिय भागीदारी इस प्रक्रिया को मांग-आधारित तथा जवाबदेह बनाती हैं।
नीति-निर्माण: समुदाय से परामर्श न होने पर पात्रता, दस्तावेज और सहायता का स्वरूप स्थानीय समस्याओं से मेल नहीं खाते। महिलाओं, दिव्यांगजनों या प्रवासी श्रमिकों की अलग आवश्यकताएँ सामान्य नियमों में छूट सकती हैं।
क्रियान्वयन: अधिकारों, आवेदन और अपील की जानकारी न होने से पात्र लोग लाभ से वंचित रहते हैं। बिचौलियों पर निर्भरता भ्रष्टाचार तथा भेदभाव की गुंजाइश बढ़ाती है। केवल ऑनलाइन आवेदन डिजिटल रूप से वंचित समूहों के लिए नई बाधा बन सकता है।
निगरानी: ग्राम सभा, सामाजिक अंकेक्षण और लाभार्थी प्रतिक्रिया त्रुटिपूर्ण सूचियाँ, भुगतान-विलंब तथा खराब सेवा उजागर कर सकते हैं। इनके कमजोर होने पर प्रशासन को वास्तविक अनुभव की जगह केवल विभागीय रिपोर्ट मिलती है।
अन्य कारण: अपर्याप्त संसाधन, कर्मियों की कमी, विभागीय विखंडन और कमजोर शिकायत-निवारण भी प्रदर्शन प्रभावित करते हैं। इसलिए योजनाओं की असफलता का पूरा उत्तरदायित्व लाभार्थियों की कम जागरूकता पर डालना अनुचित होगा।
सुधार: स्थानीय भाषाओं में अधिकार-सूचना, पंचायत एवं स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, सहायता-केंद्र, सरल आवेदन और ऑफलाइन विकल्प जरूरी हैं। सामाजिक अंकेक्षण के निष्कर्षों पर समयबद्ध कार्रवाई हो। मूल्यांकन में महिलाओं और वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व तथा स्वतंत्र शिकायत-निवारण सुनिश्चित किया जाए।
निष्कर्ष: भागीदारी तभी सार्थक है जब नागरिकों की राय निर्णय बदल सके। सूचना, संगठन और प्रशासनिक जवाबदेही का मेल लाभार्थी को निष्क्रिय प्राप्तकर्ता से अधिकार-संपन्न सहभागी बना सकता है।
मूल्यवर्धन
- यह 2019 का प्रश्न है; मूल अवधारणा का उत्तर दीजिए। समकालीन उदाहरण को मूल प्रश्न का हिस्सा न बनाइए।
- ग्राम सभा और सामाजिक अंकेक्षण को भागीदारी के ठोस संस्थागत साधनों के रूप में उपयोग कर सकते हैं।