सार्वजनिक वितरण प्रणाली की चुनौतियाँ और पारदर्शिता • UPSC 2022
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली की चुनौतियाँ और पारदर्शिता • UPSC 2022 पर 150 शब्द का मुख्य परीक्षा आदर्श उत्तर: प्रश्न की मांग, विश्लेषण, समाधान और निष्कर्ष।
प्रश्न
UPSC 2022 • मुख्य परीक्षा • सामान्य अध्ययन-III
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इसे किस प्रकार प्रभावी तथा पारदर्शी बनाया जा सकता है?
मूल अंग्रेज़ी प्रश्न
What are the major challenges of Public Distribution System (PDS) in India? How can it be made effective and transparent?
प्रश्न की मांग
- पहचान, आपूर्ति, वितरण और जवाबदेही से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ बतानी हैं।
- डिजिटलीकरण के साथ बहिष्करण रोकने और सामाजिक अंकेक्षण के उपाय प्रस्तुत करने हैं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन अनाज का आवंटन वास्तविक लाभ मिलने की गारंटी नहीं है।
प्रमुख चुनौतियाँ: पात्र व्यक्तियों का छूटना और अपात्र प्रविष्टियाँ, अनाज की चोरी, घटतौली तथा खराब गुणवत्ता इसकी प्रभावशीलता घटाते हैं। भंडारण, परिवहन और उचित मूल्य दुकानों की निगरानी में कमी भी महत्वपूर्ण है। प्रवासी परिवारों की पहुँच तथा बायोमेट्रिक या नेटवर्क विफलता के कारण वितरण रुकना विशेष चिंता है।
सुधार: पात्रता सूची का पारदर्शी पुनरीक्षण, आपूर्ति की डिजिटल निगरानी, सार्वजनिक स्टॉक प्रदर्शन और राशन की पोर्टेबिलिटी जरूरी हैं। इलेक्ट्रॉनिक वितरण के साथ प्रमाणीकरण विफल होने पर वैकल्पिक पहचान तथा अपवाद-प्रक्रिया उपलब्ध हो। सामाजिक अंकेक्षण, स्थानीय निगरानी, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और स्वतंत्र अपील विश्वास बढ़ाएँगे।
निष्कर्ष: तकनीक का उद्देश्य चोरी घटाने के साथ पात्र व्यक्ति तक अनाज पहुँचाना होना चाहिए। पारदर्शी रिकॉर्ड, मानवीय अपवाद और जवाबदेह प्रशासन मिलकर पीडीएस को प्रभावी बना सकते हैं।
मूल्यवर्धन
- डिजिटलीकरण को अकेला समाधान न लिखें; प्रमाणीकरण विफलता पर सहायता और वैकल्पिक वितरण आवश्यक हैं।
- अन्नपूर्ति जैसी मशीन वितरण की सुविधा का उदाहरण है; पूरी पीडीएस की समस्याओं का स्वतः समाधान नहीं।