कौशल, किफायती स्वास्थ्य और बहुआयामी गरीबी
गरीबी को आय की कमी से आगे रोजगार-क्षमता और स्वास्थ्य-व्यय के संयुक्त संकट के रूप में समझने वाला उत्तर।
प्रश्न
भारत में बहुआयामी गरीबी से लड़ने के लिए कौशल-आधारित रोजगार और किफायती स्वास्थ्य सेवा दोनों क्यों आवश्यक हैं? PM-SETU और कैंसर दवा मूल्य नियंत्रण के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
प्रश्न की मांग
- गरीबी को आय और गैर-आय वंचनाओं के संयुक्त परिणाम के रूप में समझाना है।
- PM-SETU को रोजगार-क्षमता और NPPA उपाय को स्वास्थ्य-व्यय सुरक्षा से जोड़ना है।
आदर्श उत्तर
भूमिका: बहुआयामी गरीबी केवल कम आय का परिणाम नहीं है; अस्थिर रोजगार, कम कौशल और महँगी स्वास्थ्य सेवा परिवारों को गरीबी में बनाए रखते या पुनः धकेलते हैं। इसलिए रोजगार-क्षमता और स्वास्थ्य-सुरक्षा को साथ देखना आवश्यक है।
कौशल-आधारित रोजगार की भूमिका: PM-SETU के तहत 1,000 सरकारी ITIs को 200 हब और 800 स्पोक के रूप में उन्नत करने की योजना है। उद्योग-संगत पाठ्यक्रम, आधुनिक प्रयोगशालाएँ और अप्रेंटिसशिप युवाओं को केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि वास्तविक रोजगार-योग्यता दे सकती हैं। इससे उत्पादकता, मजदूरी और स्थानीय औद्योगिक अवसर बढ़ सकते हैं।
किफायती स्वास्थ्य की भूमिका: कैंसर जैसी दीर्घकालिक बीमारियाँ भारी जेब-व्यय पैदा करती हैं। NPPA द्वारा 137 चिन्हित गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित करना उपचार लागत कम करने का प्रयास है। इससे परिवारों की बचत, पोषण और शिक्षा पर होने वाला व्यय सुरक्षित रह सकता है।
दोनों का संयुक्त महत्व: कौशल आय अर्जित करने की क्षमता बढ़ाता है, जबकि सस्ती स्वास्थ्य सेवा आय और संपत्ति के क्षरण को रोकती है। किसी एक की अनुपस्थिति दूसरे के लाभ को कमजोर कर सकती है।
आगे की राह: ITI प्रशिक्षण को स्थानीय उद्योग, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट से जोड़ना; साथ ही दवा की कीमत के साथ उपलब्धता, गुणवत्ता, बीमा और सार्वजनिक अस्पताल क्षमता मजबूत करना आवश्यक है।
निष्कर्ष: बहुआयामी गरीबी का स्थायी समाधान कमाने की क्षमता बढ़ाने और विनाशकारी व्यय घटाने की संयुक्त नीति में है।
मूल्यवर्धन
उत्तर में जोड़ें: PM-SETU—1,000 ITIs; NPPA—137 चिन्हित गैर-अनुसूचित कैंसर दवाएँ; ट्रेड मार्जिन सीमा—30%।