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GS Paper 3

भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक विकास

201भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना—कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों का परिवर्तन
202आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास—अंतर, मापन और भारत की विकास चुनौतियाँ
203सकल घरेलू उत्पाद, सकल मूल्य वर्धन, राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय की अवधारणाएँ
204आर्थिक नियोजन का विकास—योजना आयोग से नीति आयोग तक
205संसाधनों का संग्रहण—कर, गैर-कर राजस्व, उधारी और सार्वजनिक संसाधन
206राजकोषीय नीति—उद्देश्य, उपकरण और आर्थिक विकास में भूमिका
207मौद्रिक नीति—उद्देश्य, उपकरण, मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन
208मुद्रास्फीति—प्रकार, कारण, मापन, प्रभाव और नियंत्रण
209बेरोजगारी—प्रकार, मापन, रोजगारहीन वृद्धि और रोजगार सृजन
210भारत की श्रम शक्ति—अनौपचारिक क्षेत्र, श्रम उत्पादकता और श्रम बाजार सुधार
211समावेशी विकास—अवधारणा, आवश्यकता, बाधाएँ और नीतिगत उपाय
212वित्तीय समावेशन—बैंकिंग पहुंच, ऋण, बचत, बीमा और डिजिटल वित्त
213डिजिटल रुपया तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा की मूल अवधारणा और आर्थिक प्रभाव
214गरीबी और बहुआयामी गरीबी—मापन, कारण तथा विकास से संबंध
215आर्थिक एवं सामाजिक असमानता—आय, संपत्ति, क्षेत्रीय और लैंगिक आयाम
216भारतीय जनसांख्यिकी, जनसांख्यिकीय लाभांश और रोजगार के बीच संबंध
217बचत, निवेश और पूंजी निर्माण—विकास में भूमिका
218घरेलू एवं विदेशी निवेश—प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश
219भुगतान संतुलन, चालू खाता, पूंजी खाता और बाहरी क्षेत्र
220विनिमय दर, रुपये का मूल्य और बाहरी व्यापार पर प्रभाव
221भारत का विदेशी व्यापार—निर्यात, आयात, व्यापार घाटा और निर्यात प्रतिस्पर्धा
222बैंकिंग व्यवस्था—वाणिज्यिक बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक और वित्तीय मध्यस्थता
223गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ, बैंकिंग क्षेत्र की तनावग्रस्त परिसंपत्तियाँ और बैंक सुधार
224गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ, सूक्ष्म-वित्त और छाया बैंकिंग
225पूंजी बाजार—शेयर बाजार, बॉण्ड बाजार और भारतीय प्रतिभूति बाजार
226सरकारी बजट—राजस्व, व्यय, घाटे और बजटीय प्रक्रिया
227राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा, प्राथमिक घाटा और सार्वजनिक ऋण
228कर व्यवस्था—प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर और वस्तु एवं सेवा कर
229उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
230औद्योगिक नीति, विनिर्माण, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम, स्टार्टअप और उद्यमिता

कृषि एवं खाद्य अर्थव्यवस्था

231भारतीय कृषि की संरचना, विशेषताएँ और प्रमुख चुनौतियाँ
232भारत के प्रमुख फसल प्रतिरूप और कृषि-जलवायु क्षेत्र
233फसल विविधीकरण—आवश्यकता, लाभ, बाधाएँ और रणनीति
234हरित क्रांति—उपलब्धियाँ, क्षेत्रीय विषमताएँ और पर्यावरणीय प्रभाव
235दूसरी हरित क्रांति तथा टिकाऊ कृषि उत्पादकता की चुनौती
236सिंचाई—नहर, कुआँ, ट्यूबवेल, सूक्ष्म सिंचाई और जल-उपयोग दक्षता
237वर्षा आधारित कृषि, शुष्क कृषि और जलवायु-सहिष्णु कृषि
238मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक उपयोग और पोषक तत्व प्रबंधन
239बीज व्यवस्था, उच्च उपज किस्में, संकर बीज और बीज सुरक्षा
240कृषि में प्रौद्योगिकी मिशन और खाद्य सुरक्षा में उनकी भूमिका
241कृषि यंत्रीकरण, सटीक कृषि, ड्रोन और डिजिटल कृषि
242कृषि में जैव-प्रौद्योगिकी और आनुवंशिक रूप से परिवर्तित फसलें
243कृषि विपणन—मंडी व्यवस्था, बिचौलिये और विपणन सुधार
244कृषि इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य और डिजिटल कृषि बाजार
245न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि मूल्य नीति और सरकारी खरीद
246कृषि सब्सिडी—उर्वरक, बिजली, सिंचाई, ऋण तथा उनसे जुड़े मुद्दे
247विश्व व्यापार संगठन का कृषि समझौता और भारतीय कृषि
248सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्य सुरक्षा, बफर स्टॉक और भारतीय खाद्य निगम
249कृषि ऋण, किसान ऋणग्रस्तता, फसल बीमा और कृषि जोखिम प्रबंधन
250भूमि सुधार—जमींदारी उन्मूलन, भू-सीमा, पट्टेदारी और भूमि अभिलेख
251पशुपालन, डेयरी, मत्स्यपालन और संबद्ध कृषि गतिविधियों का अर्थशास्त्र
252खाद्य प्रसंस्करण उद्योग—आपूर्ति शृंखला, शीत शृंखला, मूल्य संवर्धन और किसानों की आय

अवसंरचना, ऊर्जा एवं निवेश

253भारत की अवसंरचना आवश्यकता और आर्थिक विकास में इसकी भूमिका
254ऊर्जा क्षेत्र—ऊर्जा मांग, ऊर्जा मिश्रण और ऊर्जा सुरक्षा
255कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस—आयात निर्भरता और ऊर्जा अर्थव्यवस्था
256सौर, पवन, जल और जैव-ऊर्जा—नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण
257परमाणु ऊर्जा—परमाणु ईंधन चक्र, रिएक्टर और भारत का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
258विद्युत क्षेत्र—उत्पादन, संचरण, वितरण और वितरण कंपनियों की चुनौतियाँ
259परिवहन अवसंरचना—सड़क, रेल, बंदरगाह, विमानन और बहु-माध्यम संपर्क
260शहरी अवसंरचना—आवास, परिवहन, जल, सीवरेज और सतत शहर
261सार्वजनिक-निजी भागीदारी और प्रमुख निवेश मॉडल
262लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति शृंखला और भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

263विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का आर्थिक और सामाजिक विकास में उपयोग
264भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी, अनुसंधान-विकास और नवाचार पारिस्थितिकी
265अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी—उपग्रह, प्रक्षेपण यान और अंतरिक्ष अनुप्रयोग
266सुदूर संवेदन, उपग्रह चित्रण और पृथ्वी अवलोकन प्रौद्योगिकी
267उपग्रह नौवहन, संचार और मौसम संबंधी अंतरिक्ष प्रणालियाँ
268कृत्रिम बुद्धिमत्ता—कार्यप्रणाली, अनुप्रयोग, अवसर और जोखिम
269जनरेटिव एवं एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता—स्वायत्त प्रणालियाँ और शासन संबंधी चुनौतियाँ
270क्वांटम प्रौद्योगिकी—क्वांटम संगणना, संचार और संवेदन
271सुपरकंप्यूटिंग, क्लाउड संगणना और उच्च-प्रदर्शन संगणना
272अर्धचालक—चिप निर्माण, आपूर्ति शृंखला और रणनीतिक महत्व
273रोबोटिकी और स्वचालन—औद्योगिक एवं सामाजिक अनुप्रयोग
274नैनो-प्रौद्योगिकी—सिद्धांत, चिकित्सा, ऊर्जा, कृषि और उद्योग में उपयोग
275जैव-प्रौद्योगिकी—जीन अभियांत्रिकी, जीन संपादन और कृत्रिम जीवविज्ञान
276स्टेम कोशिका, जीन चिकित्सा और व्यक्तिगत चिकित्सा
277टीका प्रौद्योगिकी, जैव-औषधि और चिकित्सा जैव-प्रौद्योगिकी
278बौद्धिक संपदा अधिकार—पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतक
279महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ—दोहरे उपयोग और रणनीतिक आत्मनिर्भरता
280वैज्ञानिक अनुसंधान में नैतिकता, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के सामाजिक प्रभाव

पर्यावरण एवं जैव-विविधता

281पारिस्थितिकी तंत्र—संरचना, कार्य, खाद्य शृंखला और पारिस्थितिक संतुलन
282जैव-विविधता—स्तर, महत्व, हॉटस्पॉट और भारत की जैव-विविधता
283जैव-विविधता संरक्षण—स्थल-स्थित और बाह्य-स्थित संरक्षण
284संरक्षित क्षेत्र—राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र और संरक्षण रिजर्व
285वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष
286जलवायु परिवर्तन—कारण, प्रभाव, शमन और अनुकूलन
287वैश्विक जलवायु शासन और जलवायु न्याय की मूल अवधारणाएँ
288वायु प्रदूषण—स्रोत, प्रभाव, नियंत्रण और शहरी वायु गुणवत्ता
289जल प्रदूषण, नदी प्रदूषण और भूजल प्रदूषण
290ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक अपशिष्ट, इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट और चक्रीय अर्थव्यवस्था
291भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन
292पर्यावरण प्रभाव आकलन और विकास-पर्यावरण संतुलन
293आर्द्रभूमि, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र
294पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में अवसंरचना और पारिस्थितिक सुरक्षा का संतुलन

आपदा प्रबंधन एवं आंतरिक सुरक्षा

295भारत में आपदा प्रबंधन चक्र—रोकथाम, शमन, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास
296आपदा जोखिम न्यूनीकरण, संवेदनशीलता और आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना
297बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन तथा शहरी आपदाओं का प्रबंधन
298समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन, स्थानीय क्षमता और पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ
299आंतरिक सुरक्षा—आतंकवाद, उग्रवाद, साइबर खतरे, संगठित अपराध, सीमा प्रबंधन, दुष्प्रचार तथा आतंक-वित्तपोषण
300भारत की सुरक्षा संस्थाएँ—केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, खुफिया तंत्र, समन्वय और आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन