“ताम्रपाषाणिक संस्कृति के लोग लघुपाषाणिक उपकरण में विशेषज्ञ थे और साथ ही प्रस्तर कार्य के कुशल कारीगर भी थे।” स्पष्ट कीजिए।
इतिहास वैकल्पिक — प्रश्नपत्र 1
दिए गए मानचित्र पर अंकित स्थानों की पहचान कीजिए और प्रत्येक पर लगभग 30 शब्दों की संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। स्थान-निर्धारण संकेत:
- नवपाषाणिक स्थल
- मध्यपाषाणिक स्थल
- पुरापाषाणिक स्थल
- प्रस्तर कलाकृति युक्त नवपाषाणिक स्थल
- सिंधु घाटी सभ्यता स्थल
- अग्निकुण्ड युक्त प्रारंभिक हड़प्पीय स्थल
- उत्तर हड़प्पीय स्थल
- गेरुए रंग के मृद्भांड (OCP) स्थल
- मध्यपाषाणिक स्थल
- महापाषाणिक स्थल
- दक्षिण भारत का महाजनपद
- बुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल
- अशोक का प्रमुख शिलालेख
- अशोक का लघु शिलालेख
- मौर्यों का व्यापारिक केन्द्र
- शक-कुषाण सिक्कों का जखीरा
- अश्वमेघ यज्ञ वर्णित एक अभिलेख
- मौर्योत्तर कालीन पकी ईंटों का गृह स्थल
- मौर्योत्तर कालीन टेराकोटा शिल्प केन्द्र
- पल्लवकालीन महत्त्वपूर्ण बंदरगाह
“हड़प्पावासी कलाप्रेमी लोग नहीं थे।” टिप्पणी कीजिए।
“जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म द्वारा प्रस्तुत वैचारिक चुनौती की जड़ें पूर्वी भारत में कृषि-आधारित बस्तियों के विस्तार से उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों में निहित थीं।” व्याख्या कीजिए।
“प्रादेशिक गणराज्यों की उत्पत्ति उत्तर वैदिक काल में विकसित जीवन पद्धति के विरुद्ध प्रतिक्रिया में देखी गई है।” विश्लेषण कीजिए।
मौर्यों ने भौतिक संस्कृति का प्रसार गंगा के मैदानों में कहाँ तक सुगम कर दिया? व्याख्या कीजिए।
प्रथम से तृतीय शताब्दी ईसवी के दौरान भारत के मध्य एशिया से संपर्कों की प्रकृति एवं प्रभाव का परीक्षण कीजिए। इन संपर्कों ने भारत के राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों को किस प्रकार प्रभावित किया?
“पूर्व मध्यकालीन भारत में सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया जातिगत पदानुक्रम, धार्मिक वैधता, आर्थिक परिवर्तन और राजनीतिक संरक्षण में जटिल अंतःक्रिया से प्रभावित थी।” आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए कि इन कारकों ने सामूहिक रूप से पूर्व मध्यकालीन भारतीय सामाजिक संरचना को कैसे पुनर्गठित किया।
उन परिस्थितियों की विवेचना कीजिए जिनके कारण पल्लवों और चालुक्यों के मध्य संघर्ष हुए और बताइए कि इस प्रतिद्वन्द्विता ने दक्षिण भारत की सत्ता संरचना को कैसे प्रभावित किया।
पूर्व मध्यकालीन भारत में कला और साहित्य के विकास के प्रमुख चरणों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए तथा स्पष्ट कीजिए कि किस प्रकार ये चरण उस काल के समाज एवं संरक्षण स्वरूप में व्यापक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करते हैं।
“उत्तर मध्यकालीन भारत में धार्मिक विषयों ने प्रांतीय भाषाओं के साहित्य के एक बड़े अनुभाग को प्रेरित किया।” टिप्पणी कीजिए।
“अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक उपायों का लक्ष्य दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक सत्ता का केंद्रीकरण था।” स्पष्ट कीजिए।
मुगल भारत में शाही कारखानों की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। वे मुगल राज्य की वैचारिक और कार्यात्मक अनिवार्यताओं को किस प्रकार प्रतिबिंबित करते हैं?
“सिख धर्म के सिद्धांत इस्लामी और भारतीय धार्मिक विश्वासों एवं प्रथाओं के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण का प्रतिनिधित्व करते हैं।” टिप्पणी कीजिए।
मुगल युग के दौरान बारूद ने भारत में युद्ध के चरित्र को बदल दिया। स्पष्ट कीजिए।
टोडरमल की राजस्व प्रणाली की संरचनात्मक विशेषताओं की विवेचना कीजिए और मूल्यांकन कीजिए कि भारत में किस हद तक यह प्रणाली भू-राजस्व निर्धारण में मानकीकरण लाने में सफल रही।
बरनी की “फतवा-ए-जहाँदारी” दिल्ली सल्तनत का सही विवरण नहीं, अपितु एक विलाप था। स्पष्ट कीजिए।
मुगल संरक्षण में हिंदी साहित्य के विकास पर चर्चा कीजिए। भक्ति और सूफ़ी आंदोलनों ने इसे किस प्रकार प्रभावित किया?
पुर्तगाली समुद्री शक्ति ने 16वीं सदी में हिंद महासागर में व्यापार के स्वरूप को बाधित किया। समीक्षा कीजिए।
अकबर की राजपूत नीति मुगल दरबार के गुटीय राजनीतिक विचारों द्वारा निर्मित थी। विवेचना कीजिए।
उत्तर भारत की कृषि संरचना पर मुगलकालीन राजस्व प्रशासन के प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए। इसने ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को किस हद तक निरंतरित एवं परिवर्तित किया?
“औरंगजेब की धार्मिक नीति मुगल साम्राज्य की बदली हुई राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिबिंब थी।” स्पष्ट कीजिए।
मुगल साम्राज्य के अन्तर्गत विशिष्ट प्रांतीय स्थापत्यगत शैलियों के उत्कर्ष को संरचनात्मक विविधता, सांस्कृतिक अंतःक्रिया और प्रांतीय सत्ता संरचनाओं की प्रकृति के प्रकाश में परिभाषित कीजिए।
18वीं शताब्दी में मराठा राज्य के स्वरूप में परिवर्तन लाने वाले राजनीतिक, सैन्य एवं प्रशासनिक कारकों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन परिवर्तनों ने इसके उत्थान और अंततः पतन को किस प्रकार प्रभावित किया?