मौजूदा डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने संचार और बातचीत के तरीके में क्रांति ला दी है। हालांकि इसने कई नैतिक मुद्दे और चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इस संबंध में मूल नैतिक दुविधाओं का वर्णन कीजिए।
GS Paper 4 — Ethics
“संवैधानिक नैतिकता कोई स्वाभाविक मनोभाव नहीं है, बल्कि नागरिक शिक्षा और कानून के शासन के पालन का परिणाम है।” सिविल सेवक के लिए संवैधानिक नैतिकता का परीक्षण करते हुए लोक प्रशासन में सुशासन को बढ़ावा देने और जवाबदेही सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।
कार्ल वॉन क्लॉज़विट्ज़ ने एक बार कहा था, “युद्ध दूसरे माध्यमों से की जाने वाली एक कूटनीति है।” समकालीन भू-राजनीतिक संघर्ष के वर्तमान संदर्भ में उपर्युक्त कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी पर विवादों से संबंधित नैतिक दुविधाओं का परीक्षण कीजिए।
“जो लोग मुसीबत में भी शांत रहते हैं, मुसीबत ही स्वयं परेशान होगी।” – तिरुवल्लुवर। वर्तमान संदर्भ में यह उद्धरण आपको क्या संप्रेषित करता है?
“मेरी पीढ़ी की सबसे बड़ी खोज यह है कि मनुष्य अपना दृष्टिकोण बदलकर अपना जीवन बदल सकता है।” – विलियम जेम्स। वर्तमान संदर्भ में यह उद्धरण आपको क्या संप्रेषित करता है?
“किसी समाज की शक्ति उसके कानूनों में नहीं, बल्कि उसके लोगों की नैतिकता में होती है।” – स्वामी विवेकानंद। वर्तमान संदर्भ में यह उद्धरण आपको क्या संप्रेषित करता है?
किसी भी प्रकार की सामाजिक पुनर्रचना के लिए कल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने हेतु एक सिविल सेवक को नैतिक ढाँचे में तर्क और आलोचनात्मक सोच का उपयोग करना चाहिए। उपयुक्त उदाहरणों के साथ इस कथन की पुष्टि कीजिए।
महावीर की प्रमुख शिक्षाएँ क्या हैं? समकालीन विश्व में उनकी प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
“जो व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित होता है, वह जीवन में सर्वोच्च पूर्णता को प्राप्त करता है।” एक सिविल सेवक के रूप में जिम्मेदारी की भावना और व्यक्तिगत संतुष्टि के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
समग्र विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, एक सिविल सेवक विकास के नियामक के बजाय एक सक्षमकर्ता और सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप क्या विशिष्ट उपाय सुझाएँगे?
ऐसा कहा जाता है कि नैतिक कार्य संस्कृति के लिए प्रत्येक संगठन में आचार संहिता होनी चाहिए। मूल्य-आधारित और अनुपालन-आधारित कार्य संस्कृति सुनिश्चित करने के लिए, आप अपने कार्यस्थल में कौन से उपयुक्त उपाय अपनाएँगे?
भारत विश्व की उभरती हुई आर्थिक शक्ति है क्योंकि आई.एम.एफ. के अनुमानानुसार हाल ही में इसने विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल किया है। तथापि यह देखा गया है कि कुछ क्षेत्रों में आबंटित धनराशि का या तो कम उपयोग किया जाता है अथवा उसका गलत उपयोग होता है। इस संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करने, लीकेज रोकने तथा निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त करने के लिए आप क्या विशिष्ट उपाय सुझाएँगे?
विजय पिछले दो वर्षों से देश के पहाड़ी उत्तरी राज्य के सुदूर जिले के डिप्टी कमिश्नर थे। अगस्त महीने में पूरे राज्य में भारी बारिश हुई और इसके बाद उक्त जिले के ऊपरी इलाकों में बादल फट गए। पूरे राज्य में, विशेषकर प्रभावित जिले में, बहुत भारी क्षति हुई। पूरा सड़क नेटवर्क और दूरसंचार बाधित हो गया। इमारतें बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो गईं। लोगों के घर नष्ट हो गए और वे खुले में रहने को मजबूर हुए। 200 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 5000 लोग बुरी तरह घायल हो गए। विजय के नेतृत्व में नागरिक प्रशासन सक्रिय हो गया और बचाव तथा राहत अभियान शुरू हो गया। बेघर और घायल लोगों को आश्रय एवं चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करने के लिए अस्थायी आश्रय शिविर तथा अस्पताल स्थापित किए गए। दूरदराज के इलाकों से बीमार और वृद्ध लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएँ शुरू की गईं।
विजय को अपने गृहनगर केरल से संदेश मिला कि उनकी माँ गंभीर रूप से बीमार हैं। दो दिन बाद विजय को दुर्भाग्यपूर्ण संदेश मिला कि उनकी माँ की मृत्यु हो गई है। विजय की एक बड़ी बहन के अलावा कोई करीबी रिश्तेदार नहीं था। उनकी बड़ी बहन अमेरिकी नागरिक थीं और पिछले कई वर्षों से वहीं रह रही थीं। इस बीच पाँच दिनों के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुई भारी बारिश के कारण प्रभावित जिले में स्थिति और खराब हो गई। वहीं, उनके मोबाइल पर अपने गृहनगर में माँ का अंतिम संस्कार करने के लिए जल्द से जल्द पहुँचने के लगातार संदेश आ रहे थे।
- विजय के पास कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
- विजय को किन नैतिक दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है?
- विजय द्वारा पहचाने गए प्रत्येक विकल्प का आलोचनात्मक मूल्यांकन और परीक्षण कीजिए।
- आपके अनुसार विजय के लिए कौन सा विकल्प अपनाना सबसे उपयुक्त होगा और क्यों?
भारतीय संविधान में निहित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुरूप रोटी, कपड़ा और मकान की बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। इस आदेश का पालन करते हुए, जिला प्रशासन ने समाज के बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवास विकसित करने हेतु वनभूमि के एक हिस्से की सफाई का प्रस्ताव रखा।
हालांकि, प्रस्तावित भूमि पारिस्थितिक रूप से एक संवेदनशील क्षेत्र है जो सदियों पुराने पेड़ों, औषधीय पौधों और महत्वपूर्ण जैवविविधता से परिपूर्ण है। इसके अलावा, ये वन सूक्ष्म जलवायु और वर्षा को विनियमित करते, वन्यजीवों के लिए आश्रय प्रदान करते, मृत्तिका की उर्वरता बढ़ाते, भूमि/मृदा अपरदन रोकते एवं आदिवासी तथा खानाबदोश समुदायों की आजीविका बनाए रखने में मदद करते हैं।
पारिस्थितिक और सामाजिक लागतों के बावजूद, प्रशासन उक्त प्रस्ताव के पक्ष में तर्क देता है कि यह पहल मौलिक मानवाधिकारों को एक महत्वपूर्ण कल्याणपरक प्राथमिकता के रूप में संबोधित करती है। इसके अलावा, इस समावेशी आवास विकास के माध्यम से गरीबों के उत्थान और सशक्तीकरण से सरकार का कर्तव्य पूरा होगा। पुनः जंगली जानवरों के खतरे और बार-बार होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण ये वनक्षेत्र असुरक्षित हो गए हैं। अंत में, वनक्षेत्रों को साफ करने से इन इलाकों को कथित तौर पर छिपने के स्थानों के रूप में उपयोग करने वाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है, जिससे कानून और व्यवस्था में सुधार होगा।
- क्या बेघरों के लिए सामाजिक कल्याणपरक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु वनों की कटाई को नैतिक रूप से उचित ठहराया जा सकता है?
- मानव विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने में सामाजिक-आर्थिक, प्रशासनिक और नैतिक चुनौतियाँ क्या हैं?
- पर्यावरणीय अखंडता और मानवीय गरिमा—दोनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कौन से ठोस विकल्प या नीतिगत हस्तक्षेप प्रस्तावित किए जा सकते हैं?
सुभाष राज्य सरकार में लोकनिर्माण विभाग के सचिव हैं। वह एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो अपनी योग्यता, निष्ठा और काम के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उन्हें लोकनिर्माण विभाग और कार्यक्रम कार्यान्वयन के प्रभारी मंत्री का भरोसा और विश्वास प्राप्त है। अपनी जॉब प्रोफाइल के अलावा वह राज्य में नीति निर्माण के लिए भी जिम्मेदार हैं तथा योजना, डिजाइनिंग और निर्माण आदि से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की देखरेख करते हैं।
सुभाष के मंत्री राज्य के एक महत्वपूर्ण मंत्री हैं और उनके कार्यकाल के दौरान शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास और सड़क नेटवर्क में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। वह निकट भविष्य में महत्वाकांक्षी सड़क निर्माण परियोजना शुरू करने के लिए उत्सुक हैं। सुभाष मंत्री के साथ नियमित संपर्क में हैं और सड़क निर्माण परियोजना के विभिन्न तौर-तरीकों पर काम कर रहे हैं। मंत्री द्वारा परियोजना की औपचारिक सार्वजनिक घोषणा करने से पहले उनके द्वारा मंत्री के समक्ष नियमित बैठकें, चर्चाएँ और प्रस्तुतियाँ की जाती हैं।
सुभाष का इकलौता बेटा विकास रियल एस्टेट बिजनेस में है। उसके बेटे को अपने सूत्रों से पता चलता है कि एक मेगा रोड परियोजना अंतिम चरण पर है और इस संबंध में किसी भी समय घोषणा होने की उम्मीद है। वह अपने पिता से आगामी प्रोजेक्ट का सटीक स्थान जानने के लिए बहुत उत्सुक है। उसे पता है कि आसपास की जमीन की कीमतों में भारी उछाल आएगा। इस स्तर पर सस्ती कीमतों पर जमीन खरीदने से उसे भरपूर लाभ मिलेगा। वह प्रस्तावित परियोजना का स्थान बताने के लिए दिन-रात अपने पिता से विनती कर रहा है और उन्हें आश्वस्त करता है कि वह इस मामले को गुप्त रखेगा।
इस मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू लोक निर्माण विभाग के मंत्री द्वारा उपर्युक्त परियोजना में अतिरिक्त/अनुचित रुचि से संबंधित है। उनके भतीजे की भी बड़ी आधारभूत संरचनावाली परियोजना कंपनी थी। दरअसल, मंत्री ने अपने भतीजे का भी उनसे परिचय कराया है और उन्हें आगामी प्रोजेक्ट में भतीजे के व्यावसायिक हितों का ध्यान रखने का संकेत भी दिया है। मंत्री ने उन्हें इस मामले में तेजी से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया क्योंकि मेगा रोड परियोजना की शीघ्र घोषणा और कार्यान्वयन से अपनी पार्टी और सार्वजनिक जीवन में उनकी स्थिति मजबूत होगी। उपर्युक्त पृष्ठभूमि में सुभाष भावी कार्रवाई को लेकर असमंजस में हैं।
- उक्त मामले में शामिल नैतिक मुद्दों पर चर्चा कीजिए।
- उपर्युक्त स्थिति में सुभाष के पास उपलब्ध विकल्पों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- उपर्युक्त में से कौन सा सर्वाधिक उपयुक्त होगा और क्यों?
राजेश अपनी नौ साल की सेवा के साथ ग्रुप ए अधिकारी हैं। वह एक सार्वजनिक क्षेत्र के तेल उपक्रम में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैनात हैं। प्रशासनिक अधिकारी के रूप में वह कार्यालय के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के प्रबंधन और समन्वय हेतु जिम्मेदार हैं। वह कार्यालय की आपूर्ति, उपकरण आदि का प्रबंधन भी करते हैं।
राजेश अब काफी वरिष्ठ हो गए हैं और अगले एक या दो वर्षों में जेएजी (जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) में उनकी पदोन्नति की उम्मीद है। वह जानते हैं कि पदोन्नति डीपीसी द्वारा अधिकारी के पिछले कुछ वर्षों की एसीआर/निष्पादन मूल्यांकन की जाँच के आधार पर होती है तथा अपेक्षित ग्रेडिंग के अभाव वाले अधिकारी को पदोन्नति के लिए उपयुक्त नहीं पाया जा सकता। पदोन्नति खोने के परिणामस्वरूप वित्तीय और प्रतिष्ठा संबंधी हानि हो सकती है तथा कैरियर की प्रगति में बाधा आ सकती है।
प्रशासनिक अधिकारी के रूप में राजेश नियमित रूप से अपने तत्कालिक बॉस के साथ बातचीत करते रहते हैं, जो उनकी एसीआर लिखने वाले रिपोर्टिंग अधिकारी हैं। एक दिन उन्होंने राजेश को बुलाया और कहा कि एक विशेष विक्रेता से प्राथमिकता के आधार पर कंप्यूटर से संबंधित स्टेशनरी खरीदें। राजेश ने अपने कार्यालय को इन वस्तुओं की खरीद के लिए कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। उसी दिन संबंधित सहायक उसी विक्रेता की सभी स्टेशनरी सामग्री सम्मिलित करते हुए पैंतीस लाख रुपये का अनुमान पत्र लाता है। यह देखा गया कि उस संगठन में लागू सामान्य वित्तीय नियमों के अनुसार कार्यालय मदों के लिए तीस लाख रुपये से अधिक के व्यय के लिए अगले उच्च प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक होती है। कार्यालय के साथ विचार-विमर्श के दौरान उन्हें पता चला कि उच्च प्राधिकारी से मंजूरी प्राप्त करने से बचने के लिए व्यय को विभाजित करने की सामान्य प्रथा का प्रचलन है। यह प्रथा नियमों के विरुद्ध है और लेखापरीक्षा के प्रतिकूल संज्ञान में आ सकती है। राजेश परेशान हैं और इस मामले में कोई निर्णय लेने में अनिश्चित हैं।
- उपर्युक्त स्थिति में राजेश के लिए क्या विकल्प उपलब्ध हैं?
- इस मामले में नैतिक मुद्दे क्या हैं?
- राजेश के लिए कौन सा विकल्प सबसे उपयुक्त होगा और क्यों?
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम, एमजीएनआरईजीए को पहले राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना, एनआरईजीए के रूप में जाना जाता था। यह एक भारतीय समाज कल्याण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य संविधान में दिए गए ‘काम करने के अधिकार’ के प्रावधानों को पूरा करना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्रामीण रोजगार क्षेत्र के अंतर्गत 2006 में मनरेगा शुरू किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देना है जो प्रति परिवार अधिकतम प्रतिवर्ष 100 दिनों की सीमा के अधीन अकुशल शारीरिक श्रम कार्य के लिए तैयार हैं। प्रत्येक ग्रामीण परिवार को इस योजना के अंतर्गत पंजीकरण कराने का अधिकार है; जॉब कार्ड पंजीकृत को जारी किया जाता है; जॉब कार्ड धारक रोजगार की तलाश कर सकता है; राज्य सरकार परिवारों को प्रतिपूरक दैनिक बेरोजगारी भत्ते के रूप में पहले 30 दिनों के लिए न्यूनतम मजदूरी का 25% और वर्ष की शेष अवधि के लिए मजदूरी का भुगतान करेगी। विभिन्न ग्राम पंचायतों द्वारा मनरेगा कार्य कराया गया।
आपको एक जिले का प्रभारी प्रशासक नियुक्त किया गया है। आपको विभिन्न ग्राम पंचायतों द्वारा किए जा रहे मनरेगा कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है और सभी मनरेगा कार्यों की तकनीकी मंजूरी देने का अधिकार भी दिया गया है। आपके अधिकार क्षेत्र में एक पंचायत में आपने देखा कि आपके पूर्ववर्ती ने कार्यक्रम का निम्न प्रकार से कुप्रबंधन किया है: वास्तविक नौकरी चाहने वालों को धन वितरित नहीं किया गया; मजदूरों की मस्टर रोल का ठीक से रखरखाव नहीं किया गया; किए गए कार्य और किए गए भुगतान के बीच बेमेल है; फर्जी व्यक्तियों को भुगतान किया गया; व्यक्ति की आवश्यकता को देखे बिना जॉब कार्ड दिए गए; निधियों का कुप्रबंधन तथा निधियों की कुछ हद तक हेराफेरी हुई है; ऐसे स्वीकृत कार्य जो कभी अस्तित्व में ही नहीं थे।
- उपर्युक्त स्थिति पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है तथा आप इस क्षेत्र में मनरेगा कार्यक्रम के समुचित संचालन को कैसे बहाल करेंगे?
- ऊपर सूचीबद्ध विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए आप क्या कार्रवाई शुरू करेंगे?
- आप उपर्युक्त स्थिति से कैसे निपटेंगे?
अशोक पूर्वोत्तर राज्य के एक सीमावर्ती जिले के मंडल आयुक्त हैं। कुछ वर्ष पहले, सेना ने निर्वाचित नागरिक सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद पड़ोसी देश पर कब्जा कर लिया था। देश में विशेष रूप से पिछले दो वर्षों से गृहयुद्ध की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, विद्रोही समूहों द्वारा अपनी सीमा के पास कुछ आबादी वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण करने के कारण आंतरिक स्थिति और बिगड़ गई। सैन्य और विद्रोही समूहों के बीच तीव्र संघर्ष के कारण हाल के दिनों में नागरिक हताहतों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
इसी बीच अशोक को एक रात में सीमा चौकी पर तैनात पुलिस से सूचना मिली कि लगभग 200-250 लोग, जिनमें मुख्य रूप से महिलाएँ और बच्चे हैं, सीमा पार करके हमारी सीमा की ओर आने की कोशिश कर रहे थे। इस समूह में सैन्य वर्दीधारी हथियारों के साथ लगभग 10 सैनिक शामिल हैं, जो सीमा पार करना चाहते हैं। महिलाएँ और बच्चे रो रहे हैं और मदद की भीख माँग रहे हैं। उनमें कुछ घायल हैं और बहुत ज्यादा खून बह रहा है, उन्हें तुरंत चिकित्सा की जरूरत है। अशोक ने राज्य के गृह सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन खराब मौसम के कारण खराब कनेक्टिविटी के कारण ऐसा करने में असफल रहे।
- इस स्थिति से निपटने के लिए अशोक के पास क्या विकल्प उपलब्ध हैं?
- अशोक को किन नैतिक और कानूनी दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है?
- आपके विचार से अशोक के लिए कौन सा विकल्प अपनाना अधिक उपयुक्त होगा और क्यों?
- वर्तमान स्थिति में वर्दीधारी सैनिकों के साथ व्यवहार करते समय सीमा सुरक्षा पुलिस द्वारा क्या अतिरिक्त एहतियाती उपाय किए जाने चाहिए?