भारत की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ, नदी जोड़ो और जल विवाद
दामोदर घाटी से केन-बेतवा और कोसी-मेची तक—भारत की प्रमुख नदी परियोजनाओं, राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना, बिहार की जल-सिंचाई योजनाओं तथा अनुच्छेद 262 के संवैधानिक ढाँचे का परीक्षा-केंद्रित अध्ययन।
1. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना: आधारभूत अवधारणा
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ जल संसाधनों के समन्वित प्रबंधन के लिए बनाई जाती हैं। एक ही परियोजना से बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जलविद्युत, पेयजल, अंतर्देशीय नौवहन और मत्स्य पालन जैसे अनेक उद्देश्य पूरे किए जा सकते हैं। स्वतंत्र भारत में बड़े बाँधों और नदी घाटी परियोजनाओं को विकास और आधुनिकता की प्रतीक परियोजनाओं के रूप में देखा गया।
| दामोदर घाटी निगम | 1948; अध्ययन-सामग्री इसे भारत की प्रथम बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना बताती है। |
|---|---|
| राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना | कुल 30 प्रस्तावित लिंक—14 हिमालयी और 16 प्रायद्वीपीय। |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 262—अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन का ढाँचा। |
| बिहार विशेष | कोसी-मेची लिंक—बिहार की प्रथम नदी जोड़ो परियोजना के रूप में वर्णित। |
2. भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ
| परियोजना | नदी | राज्य | प्रमुख परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|---|
| दामोदर घाटी (DVC) | दामोदर, बराकर, कोनार | पश्चिम बंगाल, झारखंड | 1948; अमेरिका की TVA मॉडल से प्रेरित; मैथन, पंचेत, तिलैया जैसे बाँध। |
| भाखड़ा-नांगल | सतलुज | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान | कंक्रीट गुरुत्वाकर्षण बाँध; गोविंद सागर जलाशय। |
| टिहरी बाँध | भागीरथी और भिलंगना | उत्तराखंड | 260.5 मीटर ऊँचा रॉक-एंड-अर्थ फिल बाँध; 2,400 MW जलविद्युत क्षमता का उल्लेख। |
| हीराकुंड | महानदी | ओडिशा | मुख्य बाँध लगभग 4.8 किमी; डाइक सहित लंबी बाँध-व्यवस्था; रामसर संदर्भ। |
| सरदार सरोवर | नर्मदा | गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान | नर्मदा नहर नेटवर्क; सिंचाई और जलविद्युत। |
| नागार्जुन सागर | कृष्णा | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना | विशाल चिनाई बाँध और कृष्णा बेसिन की प्रमुख सिंचाई परियोजना। |
| इडुक्की | पेरियार | केरल | डबल कर्वेचर आर्क डैम; संकीर्ण घाटी में निर्मित। |
| इंदिरा सागर | नर्मदा | मध्य प्रदेश | जल संचयन क्षमता की दृष्टि से बड़े जलाशयों में प्रमुख; 12.22 BCM का उल्लेख। |
3. राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (NRLP)
राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) से जुड़ी राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का मूल विचार जल-अधिशेष बेसिनों के मानसूनी जल को जल-कमी वाले क्षेत्रों तक स्थानांतरित करना है। इसकी व्यापक रूपरेखा में हिमालयी और प्रायद्वीपीय दोनों घटक शामिल हैं।
- उद्देश्य: सिंचाई, पेयजल, बाढ़ शमन, सूखा-प्रबंधन और कुछ मामलों में जलविद्युत।
- मुख्य चुनौती: ‘अधिशेष जल’ की परिभाषा पर राज्यों की असहमति, पर्यावरणीय प्रभाव, विस्थापन और वित्तीय लागत।
- संघीय आयाम: नदी बेसिन कई राज्यों में फैले होने से सहकारी संघवाद और अंतर-राज्यीय सहमति निर्णायक बनती है।
4. केन-बेतवा लिंक परियोजना
केन-बेतवा लिंक परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विकसित नदी जोड़ो परियोजना है। अध्ययन-सामग्री इसे देश का प्रथम कार्यान्वित लिंक बताती है।
| मुख्य संरचना | केन नदी पर दौधन बाँध और लगभग 221 किमी लंबी लिंक नहर। |
|---|---|
| लाभ | लगभग 10.6 लाख हेक्टेयर सिंचाई और 62 लाख लोगों के पेयजल का लक्ष्य। |
| क्षेत्र | बुंदेलखंड के 13 जिलों को लाभ पहुँचाने का उद्देश्य। |
| पर्यावरणीय चिंता | पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के आंशिक जलमग्न होने से संबंधित बहस। |
5. कोसी-मेची लिंक परियोजना: बिहार विशेष
कोसी-मेची लिंक परियोजना को अध्ययन-सामग्री में बिहार की पहली नदी जोड़ो परियोजना और भारत की दूसरी स्वीकृत नदी जोड़ो परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके लिए 90:10 के केंद्रांश-राज्यांश वित्तपोषण का उल्लेख है।
- संरचना: पूर्वी कोसी मुख्य नहर के माध्यम से कोसी के अतिरिक्त जल को महानंदा की सहायक मेची नदी की ओर स्थानांतरित करने की योजना।
- लाभ क्षेत्र: अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार।
- सिंचाई: 2.14 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य।
- संभावित प्रभाव: सिंचाई विस्तार, सीमांचल कृषि को मजबूती और बाढ़ दबाव में आंशिक कमी।
अन्य प्रमुख अंतर-राज्यीय लिंक में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा गोदावरी-कृष्णा-कावेरी लिंक का उल्लेख किया जाता है।
6. बिहार की प्रमुख जल संसाधन और सिंचाई परियोजनाएँ
| परियोजना | मुख्य परीक्षा तथ्य |
|---|---|
| कोसी परियोजना | बीरपुर बैराज, सुपौल; 1954 भारत-नेपाल समझौता; पूर्वी और पश्चिमी कोसी नहरों से सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन। |
| गंडक परियोजना | वाल्मीकिनगर बैराज; 1959 भारत-नेपाल समझौते से जुड़ी; बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों को जल। |
| सोन नहर प्रणाली | 1874; डेहरी-ऑन-सोन से जुड़ी बिहार की पुरानी आधुनिक नहर प्रणाली। |
| इंद्रपुरी बैराज | रोहतास; लगभग 1,407 मीटर लंबा बैराज। |
| बाणसागर बाँध | सोन नदी, मध्य प्रदेश; जल बँटवारा अनुपात अध्ययन-सामग्री में मध्य प्रदेश 2 : उत्तर प्रदेश 1 : बिहार 1 दिया गया है। |
| उत्तर कोयल जलाशय | मंडल डैम; झारखंड के पलामू और बिहार के औरंगाबाद-गया क्षेत्र की सिंचाई से जुड़ी परियोजना। |
| दुर्गावती जलाशय | करमचट बाँध; कैमूर और रोहतास में लगभग 33,000+ हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य/लाभ। |
| गंगा जल आपूर्ति योजना | मानसून के अतिरिक्त गंगा जल को हाथीदह से पाइपलाइन द्वारा राजगीर, गया, बोधगया और नवादा तक पहुँचाने की योजना। |
7. अनुच्छेद 262 और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद
जल सामान्यतः सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 17 से जुड़ा विषय है, लेकिन अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के विनियमन एवं विकास पर संघ सूची की प्रविष्टि 56 संसद को भूमिका देती है।
अनुच्छेद 262
- अनुच्छेद 262(1): संसद कानून बनाकर किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से जुड़े विवाद के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था कर सकती है।
- अनुच्छेद 262(2): संसद कानून द्वारा सर्वोच्च न्यायालय या अन्य न्यायालयों की अधिकारिता को ऐसे विवादों से बाहर कर सकती है।
अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956
वार्ता विफल होने पर केंद्र सरकार जल विवाद अधिकरण का गठन कर सकती है। अधिकरण के निर्णय को राजपत्र में प्रकाशित किए जाने के बाद अंतिम और बाध्यकारी प्रभाव देने का प्रावधान है।
8. प्रमुख अंतर-राज्यीय जल विवाद
- कावेरी: तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी; कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का संदर्भ।
- कृष्णा: महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।
- महानदी: ओडिशा और छत्तीसगढ़; कलमा बैराज विवाद सहित।
- महादायी / मंडोवी: गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र; कलसा-बंदूरी नाला विवाद।
- सतलुज-यमुना लिंक (SYL): पंजाब और हरियाणा।
- मुल्लापेरियार: केरल और तमिलनाडु के बीच बाँध सुरक्षा और जल उपयोग का विवाद।
बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा समिति (NCDS) और राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) जैसे संस्थागत तंत्र का उल्लेख किया जाता है।
9. प्रारंभिक परीक्षा: PYQ और अभ्यास
UPSC CSE Prelims 2016
प्रश्न: निम्न में से किन नदियों को जोड़ने का कार्य किया गया था?
(A) कावेरी–तुंगभद्रा (B) गोदावरी–कृष्णा (C) महानदी–सोन (D) नर्मदा–तापी
उत्तर: (B) गोदावरी–कृष्णा। अध्ययन-सामग्री पट्टासीमा लिफ्ट सिंचाई योजना को इससे जोड़ती है।
अनुच्छेद 262 अभ्यास
कथन 1: संसद अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद के न्यायनिर्णयन हेतु कानून बना सकती है।
कथन 2: संसद सर्वोच्च न्यायालय को ऐसे विवादों में अधिकारिता के प्रयोग से रोक सकती है।
उत्तर: दोनों कथन सही हैं।
BPSC: कोसी-मेची
प्रश्न: बिहार की पहली नदी जोड़ो परियोजना कौन-सी है जिसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है?
उत्तर: कोसी-मेची लिंक परियोजना।
BPSC अभ्यास: बाणसागर
प्रश्न: बाणसागर बाँध किन राज्यों का संयुक्त उपक्रम है?
उत्तर: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार।
10. मुख्य परीक्षा: उत्तर-ढाँचा
प्रश्न 1: राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का समालोचनात्मक मूल्यांकन
- भूमिका: वर्षा की स्थानिक-कालिक विषमता, बाढ़-सूखा द्वंद्व और 30 प्रस्तावित लिंकों का उल्लेख।
- लाभ: सिंचाई विस्तार, पेयजल, बाढ़ शमन, जलविद्युत और क्षेत्रीय असमानता में कमी की संभावना।
- पर्यावरणीय चुनौती: वन क्षेत्र, वन्यजीव आवास, नदी पारिस्थितिकी और मुहानों पर प्रभाव।
- संघीय चुनौती: जल-अधिशेष की परिभाषा, राज्यों की सहमति और जल विवाद।
- विधिक आयाम: अनुच्छेद 262, अधिकरण व्यवस्था और विवाद निपटान की धीमी प्रक्रिया।
- निष्कर्ष: नदी जोड़ो को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रण और बेसिन-स्तरीय प्रबंधन के पूरक के रूप में देखना चाहिए।
प्रश्न 2: बिहार में बाढ़ और सूखे का विरोधाभास
- उत्तर बिहार की बाढ़ और दक्षिण बिहार के जल-अभाव को प्रस्तावना में रखें।
- कोसी-मेची को सीमांचल सिंचाई और बाढ़ शमन से जोड़ें।
- बाणसागर समझौते को सोन नहर प्रणाली और दक्षिण बिहार की कृषि सुरक्षा से जोड़ें।
- गंगा जल आपूर्ति योजना को मानसूनी अतिरिक्त जल के हस्तांतरण के उदाहरण के रूप में लिखें।
- नेपाल के साथ सहयोग, गाद प्रबंधन और आहर-पइन जैसी पारंपरिक प्रणालियों के पुनर्जीवन को समाधान में शामिल करें।
11. 30 सेकंड की त्वरित पुनरावृत्ति
- DVC — 1948 — दामोदर घाटी
- भाखड़ा-नांगल — सतलुज
- टिहरी — भागीरथी-भिलंगना
- हीराकुंड — महानदी
- सरदार सरोवर — नर्मदा
- नागार्जुन सागर — कृष्णा
- केन-बेतवा — बुंदेलखंड
- कोसी-मेची — बिहार का प्रमुख नदी जोड़ो प्रोजेक्ट
- अनुच्छेद 262 — अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद
- ISRWD Act — 1956
- बाँध सुरक्षा अधिनियम — 2021
- बाणसागर — मध्य प्रदेश : उत्तर प्रदेश : बिहार = 2 : 1 : 1 (अध्ययन-सामग्री के अनुसार)