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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी • UPSC + BPSC

रामसर स्थल और आर्द्रभूमि संरक्षण: भारत एवं बिहार

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आर्द्रभूमियाँ जल और स्थल के बीच स्थित अत्यंत संवेदनशील संक्रमणकालीन पारिस्थितिक तंत्र हैं। वे जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय आजीविका के लिए निर्णायक हैं। रामसर अभिसमय इन महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग का प्रमुख वैश्विक ढाँचा है।

Static Notes अंतिम अद्यतन: 8 अक्टूबर 2026 प्रारंभिक + मुख्य परीक्षा बिहार विशेष आयाम सहित

1. एक नज़र में

भारत में रामसर स्थल101 — अक्टूबर 2026 की रामसर देश-प्रोफ़ाइल के अनुसार
बिहार में रामसर स्थल6 — कांवर ताल, नागी, नकटी, गोकुल जलाशय, उदयपुर झील और गोगाबिल झील
भारत का अभिसमय में प्रवेश1 फरवरी 1982
भारत के प्रथम रामसर स्थलचिलिका झील और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान — 1 अक्टूबर 1981 को नामित
भारत के मोंट्रेक्स रिकॉर्ड स्थलकेवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और लोकटक झील; चिलिका झील 2002 में हटाई गई
विश्व आर्द्रभूमि दिवस2 फरवरी

2. आर्द्रभूमि क्या है?

रामसर अभिसमय के अनुच्छेद 1.1 के अनुसार आर्द्रभूमि में प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थायी या अस्थायी, स्थिर या प्रवाही, मीठे, खारे या लवणीय जल वाले दलदली क्षेत्र, फेन, पीटभूमि और जल क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। समुद्री क्षेत्रों में निम्न ज्वार के समय छह मीटर तक की गहराई वाले क्षेत्र भी इस परिभाषा में आ सकते हैं।

आर्द्रभूमियों को अक्सर “प्रकृति के गुर्दे” कहा जाता है क्योंकि वे जल से पोषक तत्वों और प्रदूषकों को छानने में सहायता करती हैं। उनकी उच्च जैव विविधता के कारण उन्हें “जैविक सुपरमार्केट” भी कहा जाता है।

मुख्य पारिस्थितिक भूमिकाएँ

  • बाढ़ नियंत्रण: अतिरिक्त जल को रोककर प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करना।
  • भूजल पुनर्भरण: जल को धीरे-धीरे भूमिगत जलभृतों तक पहुँचाना।
  • जल शोधन: तलछट और पोषक तत्वों को रोकना तथा प्रदूषण का दबाव कम करना।
  • जैव विविधता: प्रवासी पक्षियों, मछलियों, उभयचरों और जलीय वनस्पतियों के लिए आवास।
  • कार्बन भंडारण: अनेक आर्द्रभूमियाँ महत्त्वपूर्ण कार्बन सिंक हैं, विशेषकर पीटलैंड और तटीय आर्द्रभूमियाँ।
  • आजीविका: मत्स्य पालन, मखाना, सिंघाड़ा, चारा, सिंचाई और पर्यावरण-पर्यटन।

3. रामसर अभिसमय, 1971

  • अंगीकरण: 2 फरवरी 1971, रामसर शहर, ईरान।
  • प्रभावी: 21 दिसंबर 1975।
  • सचिवालय: ग्लैंड, स्विट्जरलैंड।
  • विश्व का पहला रामसर स्थल: कोबोर्ग प्रायद्वीप, ऑस्ट्रेलिया; 1974 में नामित।
  • मूल दर्शन: आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनका वाइज यूज अर्थात विवेकपूर्ण उपयोग।
  • नामकरण का आधार: किसी आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के नौ मानदंडों में से कम-से-कम एक को पूरा करना होता है।

रामसर सूची में शामिल होना किसी क्षेत्र को अपने-आप राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य नहीं बनाता। यह एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता है जिसके साथ संबंधित सरकार पर उस स्थल के पारिस्थितिक चरित्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जुड़ती है।

4. भारत में रामसर स्थल

भारत में रामसर अभिसमय 1 फरवरी 1982 से प्रभावी हुआ। अक्टूबर 2026 में आधिकारिक रामसर देश-प्रोफ़ाइल भारत में 101 रामसर स्थल और लगभग 13.88 लाख हेक्टेयर रामसर क्षेत्र दर्ज करती है। अगस्त 2026 में अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील भारत का 101वाँ रामसर स्थल बनी।

परीक्षा तथ्यविवरण
प्रथम स्थलचिलिका झील, ओडिशा और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान
सबसे बड़ासुंदरबन आर्द्रभूमि, पश्चिम बंगाल — लगभग 4,23,000 हेक्टेयर
अत्यंत छोटा स्थलरेणुका आर्द्रभूमि, हिमाचल प्रदेश — 20 हेक्टेयर
2026 का 101वाँ स्थलग्लॉ झील, अरुणाचल प्रदेश

अमृत धरोहर: केंद्रीय बजट 2023-24 में घोषित इस पहल का उद्देश्य रामसर स्थलों की जैव विविधता, पारिस्थितिक स्वास्थ्य, कार्बन भंडार, स्थानीय आजीविका और प्रकृति-आधारित पर्यटन को मजबूत करना है।

5. मोंट्रेक्स रिकॉर्ड

मोंट्रेक्स रिकॉर्ड रामसर सूची का विशेष रजिस्टर है। इसमें वे रामसर स्थल दर्ज किए जाते हैं जहाँ तकनीकी विकास, प्रदूषण, मानवीय हस्तक्षेप या अन्य कारणों से पारिस्थितिक चरित्र में नकारात्मक परिवर्तन हो चुका है, हो रहा है या होने की आशंका है।

स्थलस्थितिमुख्य मुद्दा
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थानमोंट्रेक्स रिकॉर्ड मेंजल उपलब्धता और आक्रामक वनस्पति से जुड़ी पारिस्थितिक समस्याएँ
लोकटक झील, मणिपुरमोंट्रेक्स रिकॉर्ड मेंजलस्तर परिवर्तन, गाद और फुमदी तंत्र पर दबाव
चिलिका झील, ओडिशा1993 में शामिल; 2002 में हटाई गईमुहाने में गाद जमाव और जल विनिमय की समस्या; सफल पुनर्बहाली के बाद हटाई गई

UPSC के लिए अंतर: रामसर सूची में होना अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की मान्यता है; मोंट्रेक्स रिकॉर्ड में होना पारिस्थितिक चरित्र पर गंभीर दबाव का संकेत है।

6. बिहार के 6 रामसर स्थल

बिहार गंगा और उसकी सहायक नदियों के विशाल जलोढ़ मैदान में स्थित है। यहाँ चौर, ताल, गोखुर झीलें और मौसमी बाढ़भूमियाँ व्यापक हैं। 2024 तक बिहार में तीन रामसर स्थल थे, लेकिन 2025 में तीन और स्थलों को मान्यता मिलने से संख्या छह हो गई।

स्थलजिला/क्षेत्ररामसर महत्त्व
कांवर ताल / कबर्तालबेगूसरायबिहार का पहला रामसर स्थल; 2,620 हेक्टेयर; विशाल बाढ़भूमि-आर्द्रभूमि परिसर और प्रवासी पक्षियों का महत्त्वपूर्ण पड़ाव
नागी पक्षी अभयारण्यजमुईमानव-निर्मित जलाशय; 2024 में अंतरराष्ट्रीय मान्यता; प्रवासी जलपक्षियों के लिए महत्त्वपूर्ण
नकटी पक्षी अभयारण्यजमुईमानव-निर्मित जलाशय; 2024 में नागी के साथ मान्यता; समृद्ध जलीय और पक्षी जैव विविधता
गोकुल जलाशयबक्सर क्षेत्र448 हेक्टेयर की प्राकृतिक गोखुर झील; गंगा के दक्षिणी किनारे की बाढ़भूमि प्रणाली; 2025 में रामसर मान्यता
उदयपुर झीलपश्चिम चंपारण319 हेक्टेयर की गोखुर झील; उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य से घिरी; प्रवासी पक्षियों और पौध विविधता के लिए महत्त्वपूर्ण
गोगाबिल झीलकटिहार86.63 हेक्टेयर की गोखुर आर्द्रभूमि; गंगा और महानंदा के बीच; बिहार का पहला सामुदायिक रिजर्व; 2025 में रामसर मान्यता

कांवर ताल: बिहार का पहला रामसर स्थल

कांवर ताल, जिसे कबर्ताल या कंवर झील भी कहा जाता है, बेगूसराय जिले में स्थित है। यह उत्तर बिहार की नदियों के पुराने मार्गों और बाढ़भूमि प्रक्रियाओं से बने विशाल आर्द्रभूमि परिसर का हिस्सा है। रामसर सूची में इसका क्षेत्र 2,620 हेक्टेयर दर्ज है। यह मध्य एशियाई उड़ान मार्ग पर प्रवासी जलपक्षियों के लिए महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।

2025 में बिहार का बड़ा विस्तार

सितंबर 2025 में गोकुल जलाशय और उदयपुर झील को रामसर मान्यता मिली। अक्टूबर 2025 में गोगाबिल झील जुड़ी। इस प्रकार बिहार के रामसर स्थलों की संख्या तीन से बढ़कर छह हो गई।

7. बिहार की अन्य महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमियाँ

  • कुशेश्वरस्थान चौर, दरभंगा: विस्तृत मौसमी जलमग्न क्षेत्र और पक्षी आवास।
  • बरैला झील, वैशाली: सलीम अली जुब्बा साहनी पक्षी अभयारण्य से संबंधित महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमि।
  • मोकामा ताल: गंगा के दक्षिण का विशाल मौसमी ताल क्षेत्र, कृषि और बाढ़-जल निकासी की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण।
  • विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, भागलपुर: गंगा डॉल्फिन संरक्षण का प्रमुख क्षेत्र; यह रामसर स्थल नहीं है, इसलिए इसे रामसर सूची से अलग समझें।

8. आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017

ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए और 2010 के नियमों का स्थान लिया। उनका मूल दृष्टिकोण राज्यों को बड़ी भूमिका देते हुए चिन्हित आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन को संस्थागत बनाना है।

  • राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण: राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्राधिकरण के माध्यम से पहचान, अधिसूचना और प्रबंधन।
  • प्रतिबंधित गतिविधियाँ: गैर-आर्द्रभूमि उपयोग हेतु रूपांतरण, ठोस कचरे का डंपिंग, अनुपचारित अपशिष्ट का निस्तारण, कुछ प्रकार के स्थायी निर्माण और नई उद्योग इकाइयों जैसी गतिविधियों पर रोक/नियमन।
  • सूचीकरण और प्रबंधन: आर्द्रभूमि की सीमा, पारिस्थितिक चरित्र और अनुमत/विनियमित गतिविधियों की स्पष्ट पहचान की आवश्यकता।
  • वाइज यूज: संरक्षण का अर्थ हर मानवीय गतिविधि पर पूर्ण रोक नहीं; पारिस्थितिक चरित्र को बनाए रखते हुए विवेकपूर्ण उपयोग केंद्रीय सिद्धांत है।

संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों का मूल कर्तव्य प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना बताता है।

9. प्रमुख खतरे और संरक्षण चुनौतियाँ

  • अतिक्रमण और भूमि उपयोग परिवर्तन: कृषि विस्तार, बसावट और अवसंरचना के कारण आर्द्रभूमि क्षेत्र का सिकुड़ना।
  • गाद जमाव: जलग्रहण क्षेत्र में मिट्टी कटाव से जल धारण क्षमता कम होना।
  • सुपोषण: नाइट्रोजन और फास्फोरस के अत्यधिक प्रवाह से जलकुंभी और शैवाल वृद्धि तथा घुलित ऑक्सीजन में कमी।
  • जल प्रवाह में परिवर्तन: बाँध, तटबंध, नहर और निकासी संरचनाएँ प्राकृतिक जलगतिकी बदल सकती हैं।
  • आक्रामक प्रजातियाँ: स्थानीय प्रजातियों और खुले जल क्षेत्र पर दबाव।
  • जलवायु परिवर्तन: वर्षा की अनिश्चितता, बाढ़-सूखा चक्र और तापमान वृद्धि से आर्द्रभूमि तंत्र प्रभावित।

समाधान

  • वैज्ञानिक सीमांकन और जीआईएस आधारित नियमित निगरानी।
  • आर्द्रभूमि के पूरे जलग्रहण क्षेत्र को प्रबंधन इकाई मानना।
  • स्थानीय समुदायों, मछुआरों और किसानों को संरक्षण भागीदार बनाना।
  • रासायनिक प्रदूषण घटाने के लिए बफर क्षेत्र और टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ।
  • प्राकृतिक जल प्रवाह और नदी-आर्द्रभूमि संपर्क बहाल करना।
  • अमृत धरोहर, आर्द्रभूमि मित्र और राज्य स्तरीय संरक्षण योजनाओं के बीच समन्वय।

10. प्रारंभिक परीक्षा: PYQ एवं अभ्यास

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2014: यदि किसी अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि को “मोंट्रेक्स रिकॉर्ड” के अधीन लाया जाता है, तो इसका क्या अभिप्राय है?
(A) मानव हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप उसके पारिस्थितिक स्वरूप में परिवर्तन हो गया है, हो रहा है या संभावित है।
(B) उसके पाँच किमी दायरे में सभी गतिविधियाँ स्वतः निषिद्ध हो जाती हैं।
(C) उसका अस्तित्व केवल वर्षा पर निर्भर है।
(D) उसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिल गया है।
उत्तर: (A)
UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2022: निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए — होकेरा आर्द्रभूमि–पंजाब; रेणुका–हिमाचल प्रदेश; रुद्रसागर–त्रिपुरा; सस्थमकोट्टा–तमिलनाडु। सही सुमेलित युग्मों की संख्या कितनी है?
उत्तर: दो। रेणुका–हिमाचल प्रदेश और रुद्रसागर–त्रिपुरा सही हैं; होकेरा जम्मू-कश्मीर में और सस्थमकोट्टा केरल में है।
BPSC परीक्षा-उन्मुख: बिहार का पहला रामसर स्थल कौन-सा है?
उत्तर: कांवर ताल / कबर्ताल आर्द्रभूमि, बेगूसराय।
अद्यतन अभ्यास: 2025 में बिहार में कौन-से तीन नए रामसर स्थल जुड़े?
उत्तर: गोकुल जलाशय, उदयपुर झील और गोगाबिल झील।

11. मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर-ढाँचा

UPSC GS-3: “आर्द्रभूमियाँ जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन में अपरिहार्य हैं।” विवेचना कीजिए।

  • भूमिका: आर्द्रभूमि को जल-स्थल संक्रमण क्षेत्र और पारिस्थितिकी सेवाओं के स्रोत के रूप में परिभाषित करें।
  • जल सुरक्षा: बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, सूखे के समय जल भंडारण, जल शोधन।
  • जलवायु: कार्बन भंडारण, तापमान और स्थानीय सूक्ष्म-जलवायु नियमन।
  • जैव विविधता/आजीविका: मछली, पक्षी, जलीय कृषि, पर्यटन, सामुदायिक संसाधन।
  • चुनौतियाँ: अतिक्रमण, प्रदूषण, गाद, जल प्रवाह परिवर्तन, आक्रामक प्रजातियाँ।
  • नीति: आर्द्रभूमि नियम 2017, रामसर वाइज यूज, जलग्रहण-आधारित योजना और समुदाय भागीदारी।

BPSC: बिहार की अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिक स्थिरता में आर्द्रभूमियों का महत्त्व

उत्तर में उत्तर बिहार की बाढ़भूमि, चौर-ताल-गोखुर झीलों की भौगोलिक पृष्ठभूमि से शुरुआत करें। कांवर ताल, नागी-नकटी, गोकुल, उदयपुर और गोगाबिल को उदाहरण बनाते हुए बाढ़ शमन, मत्स्य पालन, मखाना-सिंघाड़ा, प्रवासी पक्षी, भूजल, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को जोड़ें। समाधान में वैज्ञानिक सीमांकन, जलग्रहण प्रबंधन, रासायनिक प्रदूषण नियंत्रण, स्थानीय समुदाय और ‘जल-जीवन-हरियाली’ जैसे राज्य कार्यक्रमों का समन्वय लिखें।

12. त्वरित पुनरावृत्ति

  • रामसर अभिसमय: 2 फरवरी 1971, ईरान; प्रभावी 21 दिसंबर 1975।
  • भारत में प्रभावी: 1 फरवरी 1982।
  • अक्टूबर 2026: भारत में 101 रामसर स्थल।
  • बिहार: 6 रामसर स्थल।
  • बिहार का पहला: कांवर ताल, बेगूसराय।
  • 2024: नागी और नकटी को रामसर मान्यता।
  • 2025: गोकुल जलाशय, उदयपुर झील और गोगाबिल झील जुड़े।
  • भारत के मोंट्रेक्स रिकॉर्ड में वर्तमानतः केवलादेव और लोकटक; चिलिका 2002 में हटाई गई।
  • आर्द्रभूमि नियम 2017 — पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत।
  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस: 2 फरवरी।
आधिकारिक स्रोत और पढ़ें

रामसर स्थलों की संख्या और नए नामांकन समय के साथ बदलते हैं। वर्तमान आँकड़ों के लिए आधिकारिक रामसर सूची सर्वोत्तम स्रोत है।