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भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम 2026

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भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, निम्न-कार्बन बेसलोड बिजली, स्वदेशी रिएक्टर प्रौद्योगिकी और दीर्घकाल में थोरियम-आधारित ईंधन चक्र को जोड़ता है। यह पृष्ठ 13 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी अद्यतनों के अनुसार तैयार किया गया है।

Static Notes अंतिम अद्यतन: 13 अक्टूबर 2026 प्रारंभिक + मुख्य परीक्षा बिहार विशेष आयाम सहित

1. एक नज़र में

वर्तमान स्थापित क्षमता8,780 MW — RAPS-1 को छोड़कर 24 परिचालन रिएक्टर
बिजली उत्पादन में हिस्सा2025-26 में लगभग 3.1%
2031-32 लक्ष्यलगभग 22 GW
2047 लक्ष्य100 GW — Nuclear Energy Mission for Viksit Bharat
PFBR500 MWe, कलपक्कम; 6 अप्रैल 2026 को प्रथम क्रिटिकलिटी
SMR लक्ष्य2033 तक कम-से-कम 5 स्वदेशी SMR को विकसित/संचालित करने का लक्ष्य
नया विधिक ढाँचाSHANTI Act, 2025 — व्यापक सार्वजनिक/निजी भागीदारी और नियामक सुधार

2. संस्थागत वास्तुकला

  • Atomic Energy Commission (AEC): परमाणु नीति के उच्चस्तरीय दिशा-निर्देशन का निकाय; 1948 में गठित।
  • Department of Atomic Energy (DAE): 1954 में स्थापित; प्रधानमंत्री के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत।
  • NPCIL: अधिकांश वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का निर्माण और संचालन करने वाला सार्वजनिक उपक्रम।
  • BHAVINI: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम के लिए विशेष सार्वजनिक उपक्रम; 500 MWe PFBR का कमीशनिंग कर रहा है।
  • BARC: रिएक्टर डिजाइन, ईंधन चक्र, पुनर्संसाधन, थोरियम, SMR और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी का प्रमुख अनुसंधान केंद्र।
  • AERB: परमाणु और विकिरण सुरक्षा नियमन। SHANTI Act, 2025 के बाद इसके वैधानिक/स्वतंत्र नियामक ढाँचे को नया विधिक आधार मिला।

3. डॉ. होमी भाभा का त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

भारत ने सीमित उच्च-ग्रेड यूरेनियम संसाधनों और बड़े थोरियम संसाधन आधार को ध्यान में रखकर closed fuel cycle पर आधारित दीर्घकालिक कार्यक्रम विकसित किया। इसका मूल विचार है—पहले चरण में यूरेनियम से प्लूटोनियम बनाना, दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर से अधिक विखंडनीय पदार्थ उत्पन्न करना, और तीसरे चरण में U-233 के माध्यम से थोरियम चक्र को बड़े पैमाने पर उपयोग करना।

चरणरिएक्टरमुख्य ईंधन/प्रक्रियारणनीतिक उद्देश्य
Stage IPHWRप्राकृतिक यूरेनियम; भारी जल (D₂O) मंदक/शीतलकबिजली + Pu-239 का उत्पादन
Stage IIFast Breeder ReactorPu-239 आधारित ईंधन; तरल सोडियम शीतलक; तेज न्यूट्रॉनखपत से अधिक विखंडनीय पदार्थ “breed” करना; U-233 की दिशा में संक्रमण
Stage IIIThorium/U-233 आधारित उन्नत रिएक्टरTh-232 → U-233 ईंधन चक्रभारत के थोरियम संसाधन का दीर्घकालिक उपयोग

महत्वपूर्ण विज्ञान

  • Fissile: U-235, Pu-239, U-233 जैसे समस्थानिक जिनमें विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया संभव है।
  • Fertile: U-238 और Th-232 स्वयं आसानी से विखंडनीय नहीं, पर न्यूट्रॉन अवशोषण से क्रमशः Pu-239 और U-233 में बदले जा सकते हैं।
  • Breeder Reactor: ऐसा रिएक्टर जो ईंधन खपत के साथ नए विखंडनीय पदार्थ का उत्पादन करता है।

4. PFBR 2026: भारत के लिए क्यों ऐतिहासिक?

कलपक्कम, तमिलनाडु में BHAVINI का 500 MWe Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) भारत के Stage-II कार्यक्रम का प्रमुख प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है। 2024 में core loading शुरू हुई थी, लेकिन सबसे बड़ा नवीनतम मील का पत्थर 6 अप्रैल 2026 को पहली criticality प्राप्त करना है।

  • यह sodium-cooled fast reactor है और conventional thermal reactor की तुलना में fast-neutron spectrum पर काम करता है।
  • PFBR की first criticality भारत के तीन-चरणीय कार्यक्रम में Stage-II की वास्तविक परिचालन दिशा में बड़ा कदम है।
  • सरकार ने कलपक्कम में इसी डिजाइन पर आधारित अतिरिक्त 2×500 MW FBR-1 और FBR-2 के pre-project activities को मंजूरी दी है।
  • जुलाई 2026 में PFBR को power operation से पहले emergency preparedness अभ्यासों में भी शामिल किया गया।

परीक्षा सुधार: केवल “core loading 2024” लिखना अब अधूरा है; अक्टूबर 2026 तक first criticality 6 अप्रैल 2026 का तथ्य अधिक महत्वपूर्ण है।

5. भारत की वर्तमान परमाणु क्षमता और प्रमुख स्टेशन

जुलाई-अगस्त 2026 के DAE आंकड़ों के अनुसार भारत में RAPS-1 को छोड़कर 24 परिचालन रिएक्टरों की कुल क्षमता 8,780 MW है। RAPP-7 ने 15 अप्रैल 2026 से वाणिज्यिक संचालन शुरू किया; RAPP-8 2026 में commissioning के उन्नत चरण में है।

स्थानराज्यमुख्य तकनीक/स्थितिपरीक्षा तथ्य
तारापुरमहाराष्ट्रBWR + PHWRभारत का पहला वाणिज्यिक परमाणु स्टेशन; कुल 1,400 MW
रावतभाटाराजस्थानPHWRRAPS-7 (700 MW) ने 15 अप्रैल 2026 से वाणिज्यिक संचालन शुरू किया; RAPS-8 commissioning में
कुडनकुलमतमिलनाडुVVER-1000, रूस सहयोगUnit 1-2 चालू; 3-6 निर्माणाधीन
कलपक्कमतमिलनाडुMAPS PHWR + PFBRStage-II fast breeder programme का केंद्र
काकरापारगुजरातPHWRKAPS-3 और KAPS-4 स्वदेशी 700 MW PHWR श्रृंखला के प्रमुख उदाहरण
नरोराउत्तर प्रदेशPHWR2×220 MW स्वदेशी रिएक्टर
कैगाकर्नाटकPHWR4×220 MW चालू; 5-6 (2×700 MW) निर्माणाधीन
गोरखपुरहरियाणा700 MW PHWRGHAVP-1&2 निर्माणाधीन; 3&4 आगे की योजना में

6. Nuclear Energy Mission: 100 GW by 2047

Union Budget 2025-26 में घोषित Nuclear Energy Mission का लक्ष्य 2047 तक लगभग 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना है। 2026 के आधिकारिक रोडमैप के अनुसार:

  • 8.78 GW → ~22 GW by 2031-32: वर्तमान निर्माणाधीन/कार्यान्वयन परियोजनाओं से।
  • 2032 के बाद NPCIL द्वारा PHWR और LWR के जरिए लगभग 32 GW अतिरिक्त, जिससे NPCIL योगदान ~54 GW तक पहुँचे।
  • शेष क्षमता सार्वजनिक उपक्रमों, राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र और joint ventures के विभिन्न business models से आएगी।
  • रणनीति में बड़े 700 MWe PHWR/LWR और छोटे modular reactors दोनों शामिल हैं।

7. SHANTI Act, 2025: नया विधिक मोड़

Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act, 2025 परमाणु क्षेत्र में व्यापक संस्थागत सुधार लेकर आया। 2026 के संसदीय उत्तरों के अनुसार इसका उद्देश्य Nuclear Energy Mission को समर्थन देना और सार्वजनिक तथा निजी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाना है।

  • निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी में अधिक भागीदारी का मार्ग।
  • शांतिपूर्ण उपयोग के लिए अनुसंधान, डिजाइन और नवाचार को प्रोत्साहन।
  • AERB को वैधानिक नियामक स्थिति और स्वतंत्र नियामकीय कार्यों का मजबूत आधार।
  • तेजी से बढ़ती परमाणु क्षमता के अनुरूप सुरक्षा और regulatory framework का आधुनिकीकरण।

8. SMR और Bharat Small Modular Reactor

2026 तक सरकारी कार्यक्रम “Bharat Small Reactor” जैसी प्रारंभिक नीति भाषा से आगे बढ़कर विशिष्ट स्वदेशी SMR डिजाइनों पर केंद्रित है। BARC के प्रमुख डिजाइन हैं:

डिजाइनक्षमता/प्रकारस्थिति और उपयोग
BSMR-200लगभग 220 MWe, PWR आधारितEngineering/construction हेतु in-principle approval; Tarapur को lead site के रूप में मंजूरी
SMR-5555 MWe, PWR आधारितIn-principle approval; Tarapur site
HTGCR5 MWth तकHydrogen production हेतु high-temperature gas-cooled concept; BARC Vizag site

SMR के संभावित उपयोग: retiring coal plants का repurposing, energy-intensive industry के captive plant, remote/off-grid क्षेत्रों में आपूर्ति और कठिन औद्योगिक क्षेत्रों का decarbonisation।

9. भारत की परमाणु कूटनीति और वैश्विक व्यवस्था

  • NPT: भारत हस्ताक्षरकर्ता नहीं है; इसे परमाणु हथियार राज्यों की असमान श्रेणीकरण व्यवस्था के कारण भेदभावपूर्ण मानता रहा है।
  • CTBT: भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • India-US Civil Nuclear Agreement / 123 Agreement: 2008 में नागरिक परमाणु सहयोग के लिए निर्णायक मोड़।
  • NSG Waiver 2008: NPT का पक्षकार न होने के बावजूद भारत को अंतरराष्ट्रीय असैन्य परमाणु व्यापार में विशेष छूट मिली।
  • IAEA Safeguards: भारत ने नागरिक-सैन्य पृथक्करण योजना के तहत निर्दिष्ट असैन्य सुविधाएँ IAEA safeguards के अंतर्गत रखी हैं। इसे केवल “आयातित यूरेनियम वाले रिएक्टर” बनाम “घरेलू यूरेनियम वाले रिएक्टर” की अतिसरलीकृत भाषा में नहीं समझना चाहिए।
  • CLNDA 2010: परमाणु क्षति के नागरिक दायित्व और operator/supplier liability से संबंधित भारतीय विधिक ढाँचा।

10. बिहार विशेष: रजौली से बांका–सिवान तक नवीनतम स्थिति

यहाँ 2026 में एक महत्वपूर्ण तथ्य-सुधार आवश्यक है। लंबे समय तक नवादा जिले का रजौली बिहार के संभावित परमाणु स्थल के रूप में चर्चा में रहा। पुराने आधिकारिक उत्तरों में वहाँ पर्याप्त cooling water न मिलने के कारण साइट चयन समिति द्वारा इसे अनुशंसित न किए जाने का उल्लेख है। 2025 के अंत में स्थल फिर चर्चा में आया, लेकिन जुलाई 2026 की राज्य-स्तरीय समीक्षा के बाद स्थिति बदल गई।

  • रजौली/नवादा: जुलाई 2026 की रिपोर्टों के अनुसार active fault line के निकटता संबंधी तकनीकी चिंता के बाद साइट को आगे की प्राथमिकता से हटाया गया।
  • भितिया, बांका: NTPC समर्थित प्रस्तावों में प्रमुख frontrunner के रूप में उभरा; जल और वन से जुड़ी प्रारंभिक मंजूरियों पर प्रगति रिपोर्ट हुई।
  • शंभुगंज, बांका: NPCIL द्वारा प्रारंभिक geotechnical/site assessment के लिए विचाराधीन।
  • दरौली, सिवान: NPCIL प्रारंभिक अध्ययन हेतु विचाराधीन।
  • इन प्रस्तावों को 2×700 MWe PHWR जैसी बड़ी परियोजनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है; इन्हें अक्टूबर 2026 तक चालू या स्वीकृत nuclear plant कहना गलत होगा।

BPSC ट्रैप: “बिहार का पहला परमाणु संयंत्र रजौली में SMR के रूप में स्वीकृत हो चुका है”—यह अक्टूबर 2026 तक सही नहीं है। बेहतर उत्तर होगा: बिहार कई संभावित स्थलों का मूल्यांकन कर रहा है; रजौली पुराना प्रस्तावित स्थल था, जबकि 2026 में बांका और सिवान के स्थल आगे बढ़ रहे हैं।

11. परमाणु ऊर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?

  • 24×7 निम्न-कार्बन बेसलोड: सौर/पवन की variability के पूरक के रूप में स्थिर बिजली।
  • ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू PHWR, fuel-cycle और thorium programme से दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता।
  • भूमि दक्षता: उच्च ऊर्जा घनत्व के कारण प्रति इकाई बिजली अपेक्षाकृत कम भूमि।
  • औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन: SMR/advanced reactors से captive power और भविष्य में hydrogen/heat applications।
  • Net Zero 2070: भारत के low-carbon electricity mix में परमाणु की भूमिका बढ़ाने का नीति-उद्देश्य।

12. प्रमुख चुनौतियाँ

  • लंबा निर्माण समय और उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत।
  • site selection, cooling-water, seismicity और environmental clearance की कठोर आवश्यकताएँ।
  • radioactive waste, spent fuel और long-term stewardship की तकनीकी एवं सामाजिक स्वीकार्यता।
  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मत्स्य/कृषि आजीविका और जन-विश्वास।
  • advanced reactor supply chain, nuclear-grade manufacturing और skilled workforce का विस्तार।
  • imported LWR projects पर geopolitical और supply-chain जोखिम।

13. प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण ट्रैप

  • भारत की वर्तमान क्षमता 8,780 MW है, 8,180 MW नहीं।
  • 24 commercial operating reactors — RAPS-1 excluded.
  • RAPP-7 ने 15 अप्रैल 2026 से commercial operation शुरू किया।
  • PFBR ने 6 अप्रैल 2026 को first criticality हासिल की।
  • Stage I = PHWR; Stage II = FBR; Stage III = Thorium/U-233 cycle.
  • 100 GW लक्ष्य = 2047; ~22 GW लक्ष्य = 2031-32.
  • SMR लक्ष्य = 2033 तक कम-से-कम 5 स्वदेशी units/design deployments की दिशा।
  • रजौली को अक्टूबर 2026 में स्वीकृत बिहार परमाणु संयंत्र न मानें।

14. प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न 1

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) PFBR Stage-II का हिस्सा है। (2) PFBR में liquid sodium coolant का उपयोग होता है। (3) PFBR ने 6 अप्रैल 2026 को first criticality प्राप्त की।

उत्तर: 1, 2 और 3।

प्रश्न 2

BSMR-200 किससे संबंधित है? उत्तर: भारत के Nuclear Energy Mission के अंतर्गत स्वदेशी small modular reactor development से।

प्रश्न 3

2026 में बिहार के संदर्भ में सही कथन कौन-सा है? रजौली एक पुराना प्रस्तावित स्थल रहा, पर नवीनतम मूल्यांकन में बांका और सिवान के विकल्पों पर आगे काम हो रहा है।

15. मुख्य परीक्षा अभ्यास

UPSC GS-III: “PFBR की first criticality भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा और थोरियम अर्थव्यवस्था की दिशा में रणनीतिक संक्रमण है।” विवेचना कीजिए।

BPSC: बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाओं का मूल्यांकन कीजिए। रजौली के पुराने प्रस्ताव से 2026 में बांका–सिवान केंद्रित संभावित स्थलों तक हुए बदलाव के तकनीकी कारणों को स्पष्ट कीजिए।

16. 30 सेकंड की त्वरित पुनरावृत्ति

  • DAE — 1954
  • AEC — 1948
  • NPCIL — 1987
  • 24 operating reactors — 8,780 MW
  • 2025-26 nuclear share — ~3.1%
  • 2031-32 — ~22 GW
  • 2047 — 100 GW
  • PFBR — 500 MWe, Kalpakkam, first criticality 6 Apr 2026
  • SHANTI Act — 2025
  • BSMR-200 + SMR-55 + HTGCR
  • Stage I PHWR → Stage II FBR → Stage III Thorium/U-233
  • Bihar — Rajauli old site; 2026 focus shifts toward Banka/Siwan options
प्राथमिक/आधिकारिक स्रोततथ्य सत्यापन

क्षमता, PFBR, SHANTI Act, SMR roadmap, 100 GW लक्ष्य और परियोजना स्थिति को 2026 के DAE/PIB संसदीय उत्तरों से अद्यतन किया गया है। बिहार के नवीनतम site-status के लिए जुलाई 2026 की राज्य-स्तरीय समीक्षा रिपोर्ट का उपयोग किया गया है।