भारत में स्थानीय-मान पद्धति (place-value system) के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर(d) 1, 2 और 3
महत्त्व क्या है?
दशमलव स्थानीय-मान पद्धति में अंक का मूल्य उसके स्थान के अनुसार बदलता है। छठी–सातवीं शताब्दी के अभिलेखीय प्रमाण इसके प्रयोग को दिखाते हैं; बाद की शताब्दियों में यह अधिक व्यापक हुआ। दक्षिण-पूर्व एशिया के संस्कृत अभिलेख भारतीय गणितीय-सांस्कृतिक प्रभाव के प्रसार का अतिरिक्त प्रमाण देते हैं।
याद रखें: ‘शून्य’ और ‘स्थानीय-मान’ को एक ही ऐतिहासिक घटना न मानें; दोनों संबंधित हैं, लेकिन प्रमाण और कालक्रम अलग-अलग हो सकते हैं।