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GS-II • मौलिक अधिकार • शासन एवं मीडिया

शांतिपूर्ण सभा का अधिकार, BNSS धारा 163 और भारतीय प्रेस परिषद

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लोकतंत्र में शांतिपूर्ण सभा और स्वतंत्र प्रेस दोनों सार्वजनिक विमर्श के आधार हैं, लेकिन दोनों पूर्ण अधिकार नहीं हैं। संविधान उचित प्रतिबंधों की अनुमति देता है और आपात सार्वजनिक व्यवस्था की स्थितियों में BNSS की धारा 163 निवारक आदेश का साधन देती है।

UPSC Static SeriesDay 1 • 27 अक्टूबर 2026प्रारंभिक + मुख्य परीक्षातथ्य-जाँच सहित

1. शांतिपूर्ण सभा का संवैधानिक अधिकार

अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 19(3) के तहत राज्य भारत की संप्रभुता और अखंडता तथा सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित प्रतिबंध लगा सकता है।

ध्यान दें: यह अधिकार केवल नागरिकों को है और इसका अर्थ किसी भी समय, किसी भी स्थान पर बिना नियमन के धरना देने का निरपेक्ष अधिकार नहीं है।

2. BNSS, 2023 की धारा 163 क्या है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163, तत्काल निवारक उपाय की आवश्यकता वाले मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या विशेष रूप से अधिकृत कार्यपालिका मजिस्ट्रेट को लिखित आदेश जारी करने की शक्ति देती है। यह पुराने CrPC की धारा 144 के समान कार्यक्षेत्र वाला प्रावधान है।

बिंदुधारा 163
उद्देश्यअवरोध, उपद्रव, मानव जीवन/स्वास्थ्य/सुरक्षा के खतरे, सार्वजनिक शांति भंग, दंगा या मारपीट की आशंका रोकना
आदेशव्यक्ति विशेष, क्षेत्र में रहने वाले लोगों या किसी स्थान पर आने-जाने वाली जनता के लिए हो सकता है
एकपक्षीय आदेशआपात स्थिति में संभव
सामान्य अवधिआदेश सामान्यतः 2 महीने से अधिक प्रभावी नहीं
राज्य सरकार का विस्तारनिर्धारित शर्तों पर आगे की सीमित अवधि के लिए विस्तार कर सकती है

UPSC दृष्टि: प्रश्न अक्सर अधिकार बनाम सार्वजनिक व्यवस्था के संतुलन, आवश्यकता, अनुपातिकता और न्यायिक समीक्षा पर बनता है।

3. भारतीय प्रेस परिषद (PCI)

भारतीय प्रेस परिषद एक वैधानिक, अर्ध-न्यायिक निकाय है जो Press Council Act, 1978 के तहत काम करती है। इसका उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा और समाचार-पत्रों/समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखना व सुधारना है।

आयामPCI
कानूनी आधारPress Council Act, 1978
संरचनाअध्यक्ष + 28 सदस्य
मुख्य क्षेत्रमुख्यतः प्रिंट प्रेस/समाचार एजेंसियाँ
शक्तिजाँच, चेतावनी, फटकार/निंदा जैसी नैतिक-नियामक कार्रवाई; सामान्य आपराधिक दंड देने वाला न्यायालय नहीं

4. ‘National Media Council’ को लेकर सबसे बड़ा ट्रैप

एक ऐसी व्यापक परिषद की मांग/प्रस्ताव सामने आए हैं जो प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल समाचार माध्यमों को एक व्यापक पेशेवर ढाँचे में देख सके। लेकिन 27 अक्टूबर 2026 तक ‘National Media Council’ भारत की स्थापित वैधानिक संस्था नहीं है। इसलिए परीक्षा में इसे PCI के समान वर्तमान संस्था मानना गलत होगा।

इसी तरह किसी निजी/पेशेवर संगठन द्वारा तैयार मसौदा विधेयक को संसद द्वारा पारित कानून न मानें।

5. प्रारंभिक परीक्षा के लिए ट्रैप

  • अनुच्छेद 19(1)(b) = शांतिपूर्ण और निरस्त्र सभा।
  • उचित प्रतिबंध = अनुच्छेद 19(3)।
  • BNSS धारा 163 = निवारक मजिस्ट्रेटी आदेश; इसे दंडादेश न समझें।
  • PCI = Press Council Act, 1978 के तहत वैधानिक निकाय।
  • PCI का वर्तमान दायरा इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के लिए सर्वव्यापी एकीकृत नियामक नहीं है।
  • National Media Council = अभी प्रस्ताव, स्थापित कानून नहीं।

6. अभ्यास

प्रारंभिक: क्या Article 19(1)(b) के तहत सभा का अधिकार विदेशी नागरिक को भी समान रूप से उपलब्ध है? उत्तर: नहीं; अनुच्छेद 19 के अधिकार नागरिकों के लिए हैं।

मुख्य परीक्षा: विरोध-प्रदर्शन पर निवारक शक्तियों का उपयोग लोकतांत्रिक अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन की परीक्षा है। संवैधानिक कसौटियों सहित चर्चा कीजिए।

आधिकारिक/प्राथमिक स्रोततथ्य सत्यापन

स्थायी तथ्यों को संविधान, वैधानिक/नियामक संस्थाओं और संबंधित आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर अद्यतन किया गया है।