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GS-II • भारतीय राजव्यवस्था • संविधान एवं न्यायपालिका

अनुच्छेद 371A और अधीनस्थ न्यायपालिका

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अनुच्छेद 371A नागालैंड को कुछ विशिष्ट सामाजिक, प्रथागत और भूमि-संसाधन विषयों पर संवैधानिक संरक्षण देता है। दूसरी ओर अनुच्छेद 233–237 जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों की नियुक्ति, भर्ती और नियंत्रण का ढाँचा बनाते हैं। दोनों को साथ पढ़ने से संघीय विविधता और न्यायिक प्रशासन की स्पष्ट तस्वीर बनती है।

UPSC Static SeriesDay 1 • 27 अक्टूबर 2026प्रारंभिक + मुख्य परीक्षातथ्य-जाँच सहित

1. अनुच्छेद 371A का मूल

संविधान के भाग XXI में स्थित अनुच्छेद 371A, 13वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1962 से जुड़ा विशेष प्रावधान है। इसके अनुसार संसद का कोई अधिनियम नागालैंड में चार विषयों पर तब तक स्वतः लागू नहीं होता जब तक नागालैंड विधानसभा संकल्प द्वारा ऐसा न ठहराए:

  1. नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएँ,
  2. नागा प्रथागत कानून और प्रक्रिया,
  3. प्रथागत कानून के अनुसार निर्णय वाले दीवानी और दंड न्याय-प्रशासन के विषय,
  4. भूमि और उसके संसाधनों का स्वामित्व तथा हस्तांतरण।

परीक्षा-ट्रैप: यह संसद की विधायी शक्ति को सामान्य रूप से समाप्त नहीं करता; ऊपर के विशेष विषयों में राज्य विधानसभा की संवैधानिक भूमिका जोड़ता है।

2. Frontier Nagaland Territorial Authority (FNTA): समसामयिक जोड़

2026 में पूर्वी नागालैंड के छह जिलों—तुएनसांग, मोन, लोंगलेंग, किफिरे, नोकलाक और शमातोर—के लिए Frontier Nagaland Territorial Authority का वैधानिक ढाँचा सामने आया। इसमें स्थानीय प्रशासनिक विषयों के अधिक विकेंद्रीकरण का प्रावधान है। इसे अनुच्छेद 371A को बदलने वाला ढाँचा नहीं, बल्कि नागालैंड के भीतर विकेंद्रीकृत शासन की नई व्यवस्था के रूप में समझना चाहिए।

बिंदुपरीक्षा उपयोग
क्षेत्रपूर्वी नागालैंड के 6 जिले
विषय46 विषयों पर अधिकार-विकेंद्रीकरण का ढाँचा
सदस्यता62 सदस्य; निर्वाचित, विधायक पदेन सदस्य और नामित सदस्य का मिश्रित ढाँचा
महिला प्रतिनिधित्वनिर्वाचित सीटों में एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान

3. जिला एवं अधीनस्थ न्यायपालिका: अनुच्छेद 233–237

अनुच्छेदक्या कहता है?
233जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापन और पदोन्नति राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद। सेवा में न रहने वाले व्यक्ति के लिए कम से कम 7 वर्ष का अधिवक्ता/प्लीडर अनुभव और उच्च न्यायालय की अनुशंसा आवश्यक।
234जिला न्यायाधीशों से इतर राज्य न्यायिक सेवा की भर्ती: राज्यपाल, राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के अनुसार बनाए नियमों के तहत।
235जिला न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित।
236–237परिभाषाएँ और कुछ मजिस्ट्रेटों पर इन प्रावधानों का विस्तार।

4. सर्वोच्च, उच्च और अधीनस्थ न्यायपालिका में अंतर

स्तरसंवैधानिक आधारसेवानिवृत्ति
सर्वोच्च न्यायालयअनुच्छेद 124–14765 वर्ष
उच्च न्यायालयअनुच्छेद 214–23162 वर्ष
जिला/अधीनस्थ न्यायालयअनुच्छेद 233–237संविधान में कोई एक समान आयु नहीं; राज्य सेवा-नियम लागू होते हैं। 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 60 से 62 वर्ष करने की दिशा में राज्यवार नियम-संशोधन का प्रश्न उठा।

5. प्रारंभिक परीक्षा के लिए ट्रैप

  • अनुच्छेद 371A केवल नागालैंड से संबंधित विशेष प्रावधान है।
  • अनुच्छेद 235 = अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का नियंत्रण।
  • अनुच्छेद 234 में राज्य लोक सेवा आयोग की भूमिका है; जिला न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए अनुच्छेद 233 देखें।
  • अधीनस्थ न्यायपालिका की सेवानिवृत्ति आयु को सीधे संविधान की संख्या मानकर न पढ़ें।
  • FNTA और अनुच्छेद 371A एक ही चीज नहीं हैं।

6. अभ्यास

प्रारंभिक: अनुच्छेद 371A के अंतर्गत भूमि एवं संसाधनों के स्वामित्व से जुड़े संसदीय कानून नागालैंड में स्वतः लागू होते हैं—सही या गलत? उत्तर: गलत।

मुख्य परीक्षा: “भारतीय संघवाद समानता के साथ-साथ संवैधानिक विषमता को भी स्वीकार करता है।” अनुच्छेद 371A और नागालैंड में विकेंद्रीकृत शासन के संदर्भ में विवेचना कीजिए।

आधिकारिक/प्राथमिक स्रोततथ्य सत्यापन

स्थायी तथ्यों को संविधान, वैधानिक/नियामक संस्थाओं और संबंधित आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर अद्यतन किया गया है।