विकल्प
Aन्यायालय सामान्यतः विधायिका के कानून को वैध मानकर चलता है जब तक चुनौती देने वाला पक्ष पर्याप्त संवैधानिक आधार पर उसकी अवैधता प्रदर्शित न करे, हालांकि अधिकार-संबंधी मामलों में लागू परीक्षण संदर्भ के अनुसार बदल सकते हैं।
Bहर कानून पहले से असंवैधानिक माना जाता है और सरकार को उसे वैध सिद्ध करना पड़ता है।
Cराष्ट्रपति की सहमति मिलते ही कानून judicial review से बाहर हो जाता है।
Dकानून लागू होने के पाँच वर्ष बाद ही समीक्षा हो सकती है।
सही उत्तर: A. न्यायालय सामान्यतः विधायिका के कानून को वैध मानकर चलता है जब तक चुनौती देने वाला पक्ष पर्याप्त संवैधानिक आधार पर उसकी अवैधता प्रदर्शित न करे, हालांकि अधिकार-संबंधी मामलों में लागू परीक्षण संदर्भ के अनुसार बदल सकते हैं।
सही उत्तर (a) है। संवैधानिक न्यायशास्त्र में विधायिका के प्रति संस्थागत सम्मान के कारण सामान्य presumption रहता है कि कानून वैध है, जब तक चुनौती में पर्याप्त आधार न दिखाया जाए। लेकिन यह अंधी प्रतिरक्षा नहीं है—Fundamental Rights, manifest arbitrariness, suspect classifications या proportionality जैसे क्षेत्रों में burden और scrutiny की प्रकृति अलग हो सकती है। राष्ट्रपति की assent किसी कानून को constitutional challenge से नहीं बचाती और review के लिए कोई पाँच-वर्षीय प्रतीक्षा अवधि नहीं होती।