संसद की 'विशेषाधिकार समिति' (Committee of Privileges) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 47 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 7प्रश्न 47 / 50

विकल्प

Aयह अर्ध-न्यायिक प्रकृति की समिति है जो सदन और सदस्यों के विशेषाधिकार-हनन के मामलों की जाँच करती है।
Bलोकसभा में समिति की सदस्य संख्या 15 और राज्यसभा में 10 होती है।
Cयह दोष या breach पाए जाने पर सदन को उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश करती है।
Dउपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
सही उत्तर: D. उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
सही उत्तर (d) है। Privileges Committee का काम यह देखना है कि किसी सदस्य, समिति या सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन या contempt हुआ है या नहीं। यह तथ्य-जाँच और सुनवाई के कारण अर्ध-न्यायिक स्वरूप रखती है, पर अंतिम दंडात्मक अधिकार सदन का रहता है। लोकसभा और राज्यसभा में इसकी संरचना अलग संख्या की है। समिति रिपोर्ट और सिफारिश देती है; उसे सामान्य न्यायालय की तरह स्वतंत्र अंतिम दंडादेश देने वाला निकाय नहीं समझना चाहिए।

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