लोकसभा सीटों के परिसीमन और राज्यों के बीच सीट-वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 84वें संविधान संशोधन ने राज्यों को लोकसभा में आवंटित सीटों के पुनर्समायोजन को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित होने तक स्थगित रखा। 2. 87वें संविधान संशोधन, 2003 ने निर्वाचन क्षेत्रों के आंतरिक परिसीमन के लिए 2001 की जनगणना को आधार बनाया। 3. 104वें संविधान संशोधन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में Anglo-Indian समुदाय के नामांकन को आगे जारी नहीं रखा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 4 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 7प्रश्न 4 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
सही उत्तर (d) है। 84वें संशोधन की महत्वपूर्ण बारीकी यह है कि रोक केवल '2026 तक' नहीं, बल्कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित होने तक प्रभावी है। 87वें संशोधन ने 2001 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्समायोजन का मार्ग दिया, बिना राज्यों के कुल सीट-आवंटन को बदले। 104वें संशोधन ने Anglo-Indian नामांकन की अवधि नहीं बढ़ाई, जबकि SC/ST आरक्षण को आगे बढ़ाया।

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