91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा दलबदल (Defection) के आधार पर अयोग्य घोषित सदस्य के मंत्री बनने पर क्या रोक लगाई गई है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 43 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 6प्रश्न 43 / 50

विकल्प

Aवह केवल एक वर्ष तक मंत्री नहीं बन सकता।
Bदसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित संसद सदस्य, अपनी सदस्यता की शेष अवधि समाप्त होने तक या पुनः निर्वाचित होने तक—जो पहले हो—मंत्री बनने के लिए भी अयोग्य रहता है [अनुच्छेद 75(1B)]।
Cवह केवल राज्य मंत्री बन सकता है, कैबिनेट मंत्री नहीं।
Dराष्ट्रपति की विशेष अनुमति से वह मंत्री बन सकता है।
सही उत्तर: B. दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित संसद सदस्य, अपनी सदस्यता की शेष अवधि समाप्त होने तक या पुनः निर्वाचित होने तक—जो पहले हो—मंत्री बनने के लिए भी अयोग्य रहता है [अनुच्छेद 75(1B)]।
सही उत्तर (b) है। 91वें संशोधन ने दलबदल विरोधी कानून को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अनुच्छेद 75(1B) जोड़ा। दसवीं अनुसूची के पैरा 2 के तहत अयोग्य ठहराया गया सांसद उस अवधि तक मंत्री नहीं बन सकता जब तक उसकी मूल सदस्यता की अवधि समाप्त न हो जाए या वह बीच में फिर से निर्वाचित न हो जाए। इसका उद्देश्य दलबदल के बदले तत्काल मंत्री पद पाने की राजनीतिक प्रोत्साहन-व्यवस्था को सीमित करना था।

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