एस. पी. आनंद बनाम एच. डी. देवेगौड़ा मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री पद के संबंध में क्या व्यवस्था दी थी?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 32 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 6प्रश्न 32 / 50

विकल्प

Aप्रधानमंत्री को अनिवार्य रूप से लोकसभा का सदस्य होना चाहिए।
Bजो व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, उसे प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है, पर उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना होगा।
Cप्रधानमंत्री को शपथ से पहले ही लोकसभा में बहुमत सिद्ध करना अनिवार्य है।
Dगैर-सांसद व्यक्ति को केवल कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।
सही उत्तर: B. जो व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, उसे प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है, पर उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना होगा।
सही उत्तर (b) है। सर्वोच्च न्यायालय ने S.P. Anand v. H.D. Deve Gowda में 6 नवंबर 1996 को स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 75(5) का 'मंत्री' शब्द प्रधानमंत्री को भी समाहित करता है। इसलिए कोई गैर-सांसद व्यक्ति प्रधानमंत्री नियुक्त हो सकता है, लेकिन यदि वह लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनता तो पद पर नहीं रह सकता। इस निर्णय को AIR 1997 में रिपोर्ट किया गया, जिससे कई पुस्तकों में वर्ष 1997 लिखा मिलता है; निर्णय की वास्तविक तारीख 1996 है।

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