राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों (Veto Powers — अनुच्छेद 111) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto) में राष्ट्रपति विधेयक पर सहमति रोक देते हैं और विधेयक समाप्त हो जाता है। 2. निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) में राष्ट्रपति गैर-धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं; संसद उसे पुनः पारित कर दे तो राष्ट्रपति को सहमति देनी होती है। 3. धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर निलंबनकारी वीटो उपलब्ध नहीं है। 4. जेबी वीटो (Pocket Veto) में राष्ट्रपति विधेयक को अनिश्चितकाल तक लंबित रख सकते हैं क्योंकि संविधान समय-सीमा निर्धारित नहीं करता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 8 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 6प्रश्न 8 / 50

विकल्प

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 111 सामान्य विधेयक पर राष्ट्रपति को सहमति, असहमति या पुनर्विचार के लिए वापसी का विकल्प देता है; धन विधेयक वापस नहीं किया जा सकता। संविधान संशोधन विधेयक पर 24वें संशोधन के बाद राष्ट्रपति को सहमति देनी ही होती है। भारतीय संविधान राष्ट्रपति के लिए निर्णय की समय-सीमा नहीं देता, इसलिए Pocket Veto की व्यावहारिक संभावना रहती है। पुनः पारित साधारण विधेयक पर राष्ट्रपति की सहमति बाध्यकारी हो जाती है।

इसी प्रश्न को अभ्यास मोड में खोलें