अंतर-राज्यीय जल विवाद (Inter-State Water Disputes) के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 262 के प्रावधानों पर विचार कीजिए: 1. संसद कानून द्वारा किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित विवाद के न्यायनिर्णयन का उपबंध कर सकती है। 2. संसद यह प्रावधान कर सकती है कि न तो उच्चतम न्यायालय और न ही कोई अन्य न्यायालय ऐसे विवाद के संबंध में अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करेगा। 3. संसद ने इस शक्ति का प्रयोग करते हुए नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 बनाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 33 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 5प्रश्न 33 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए विशेष कानून बनाने और न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को बाहर करने की अनुमति देता है। इसी संवैधानिक आधार पर 1956 के संबंधित कानून बनाए गए। ध्यान दें कि संविधान स्वयं हर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का क्षेत्राधिकार सीधे समाप्त नहीं करता; वह संसद को ऐसा कानून बनाने की शक्ति देता है।

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