भारतीय संविधान में केंद्र-प्रवृत्त संघवाद (Centripetal Federalism) को बढ़ावा देने वाले वित्तीय प्रावधानों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. राज्यों की केंद्र पर वित्तीय निर्भरता (अनुदान और कर वितरण हेतु)। 2. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा केंद्र और राज्यों दोनों के खातों का एक समान संवैधानिक लेखापरीक्षण ढांचा। 3. वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के दौरान केंद्र द्वारा राज्यों के वित्तीय मामलों पर व्यापक नियंत्रण। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 17 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 5प्रश्न 17 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
सही उत्तर (d) है। भारतीय वित्तीय संघवाद में कर-संग्रह और संसाधनों का बड़ा हिस्सा केंद्र के पास केंद्रित रहता है, जबकि राज्यों की व्यय जिम्मेदारियाँ व्यापक हैं; इसलिए कर-वितरण और अनुदान महत्वपूर्ण बनते हैं। CAG केंद्र और राज्यों दोनों की सार्वजनिक वित्तीय जवाबदेही के लिए साझा संवैधानिक संस्था है। अनुच्छेद 360 लागू होने पर संघ राज्यों को वित्तीय अनुशासन संबंधी निर्देश दे सकता है। ये तत्व मिलकर भारतीय संघवाद की केंद्राभिमुख प्रकृति को दर्शाते हैं।

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