मेनका गांधी बनाम भारत संघ मामला (1978) किस संदर्भ में भारतीय संवैधानिक विधि का मील का पत्थर माना जाता है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 19 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 3प्रश्न 19 / 50

विकल्प

Aइसने अनुच्छेद 21 के तहत केवल कार्यपालिका की मनमानी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की।
Bइसने अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या को समाप्त कर 'विधि की सम्यक प्रक्रिया' (Due Process of Law) को अपनाया और कहा कि कानून 'उचित, निष्पक्ष और तर्कसंगत' होना चाहिए।
Cइसने विदेश यात्रा के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से बाहर कर दिया।
Dइसने मृत्युदंड को पूरी तरह असंवैधानिक घोषित कर दिया।
सही उत्तर: B. इसने अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या को समाप्त कर 'विधि की सम्यक प्रक्रिया' (Due Process of Law) को अपनाया और कहा कि कानून 'उचित, निष्पक्ष और तर्कसंगत' होना चाहिए।
मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या को अस्वीकार करते हुए कहा कि जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने वाली प्रक्रिया 'उचित, न्यायसंगत और निष्पक्ष' होनी चाहिए। इससे भारतीय संवैधानिक विधि में न्यायसंगत प्रक्रिया (due process) जैसा व्यापक संरक्षण विकसित हुआ।

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