विकल्प
Aकेवल 1
Bकेवल 2
C1 और 2 दोनों
Dन तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: C. 1 और 2 दोनों
दोनों कथन सही हैं। भीखाजी नारायण वाद (1955) के अनुसार आच्छादन का सिद्धांत मूलतः संविधान-पूर्व विधियों पर लागू होता है जहां मूल अधिकारों से असंगत होने पर कानून मृत नहीं होता, बल्कि आच्छादित हो जाता है। पृथक्करणीयता के तहत केवल असंगत भाग को शून्य किया जाता है यदि वह शेष अधिनियम से अलग करने योग्य हो।