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संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'आच्छादन का सिद्धांत' ( Doctrine of Eclipse) और 'पृथक्करणीयता का सिद्धांत' (Doctrine of Severability) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आच्छादन का सिद्धांत केवल संविधान-पूर्व विधियों (Pre-constitutional laws) पर लागू होता है, संविधान-पश्चात विधियों पर नहीं। 2. पृथक्करणीयता के सिद्धांत के तहत यदि किसी अधिनियम का असंवैधानिक भाग वैध भाग से अलग किया जा सकता है, तो केवल असंवैधानिक भाग शून्य होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · सेट प्रश्न 7/50 · संचयी प्रश्न 957/1000

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 20प्रश्न 7/50

विकल्प

Aकेवल 1
Bकेवल 2
C1 और 2 दोनों
Dन तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: C. 1 और 2 दोनों
दोनों कथन सही हैं। भीखाजी नारायण वाद (1955) के अनुसार आच्छादन का सिद्धांत मूलतः संविधान-पूर्व विधियों पर लागू होता है जहां मूल अधिकारों से असंगत होने पर कानून मृत नहीं होता, बल्कि आच्छादित हो जाता है। पृथक्करणीयता के तहत केवल असंगत भाग को शून्य किया जाता है यदि वह शेष अधिनियम से अलग करने योग्य हो।

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