विकल्प
Aयह अदालतों में वाद-योग्य (Justiciable) और प्रवर्तनीय (Enforceable) है।
Bयह न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है।
Cयह संविधान का भाग नहीं है।
Dइसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं किया जा सकता।
सही उत्तर: B. यह न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है।
प्रस्तावना गैर-न्यायिक (Non-justiciable) है; यह विधायिका की शक्ति का स्रोत नहीं है और न ही उसकी शक्तियों पर प्रतिबंध लगाती है। केशवानंद भारती मामले में इसे संविधान का भाग माना गया और संशोधन योग्य घोषित किया गया।