विकल्प
Aन्यायालयों को किसी भी कानून को रद्द करने की अपनी शक्ति का त्याग कर देना चाहिए।
Bन्यायालयों को कार्यपालिका और विधायिका की नीतिगत प्राथमिकताओं में तब तक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जब तक कि वे स्पष्ट रूप से संविधान या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करती हों।
Cन्यायालयों को केवल दीवानी मामलों की ही सुनवाई करनी चाहिए।
Dन्यायाधीशों को राजनीतिक दलों की बैठकों में अनिवार्य रूप से भाग लेना चाहिए।
सही उत्तर: B. न्यायालयों को कार्यपालिका और विधायिका की नीतिगत प्राथमिकताओं में तब तक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जब तक कि वे स्पष्ट रूप से संविधान या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करती हों।
न्यायिक संयम का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि न्यायाधीशों को अपनी व्यक्तिगत नीतिगत प्राथमिकताओं को लागू करने के बजाय चुनी हुई विधायिका के विवेक का सम्मान करना चाहिए और केवल स्पष्ट असंवैधानिकता की स्थिति में ही कानून को रद्द करना चाहिए।