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भारत में न्यायिक सक्रियता ( Judicial Activism) और जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में जनहित याचिका की शुरुआत 1980 के दशक के आरंभ में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृ ष्णा अय्यर के प्रयासों से हुई। 2. जनहित याचिका ने पारंपरिक विधिक अधिकार ( Locus Standi / वाद दायर करने का अधिकार) के नियम को उदार बनाया, जिसके तहत कोई भी जनहितैषी नागरिक या संस्था वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए अदालत जा सकती है। 3. जनहित याचिका की अवधारणा मूल रूप से ब्रिटिश कॉमन लॉ की एक सदियों पुरानी न्यायिक परंपरा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 11 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 19प्रश्न 11 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: A. केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि जनहित याचिका ( PIL) की अवधारणा मूल रूप से 1960 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के सामाजिक कार्रवाई मुकदमेबाजी ( Social Action Litigation) से विकसित हुई थी, न कि ब्रिटिश कॉमन लॉ से। कथन 1 और 2 सही हैं।

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