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भारतीय संविधान की प्रस्तावना ( Preamble) की विधिक और संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेरुबारी यूनियन मामले (1960) में उच्चतम न्यायालय ने माना था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है। 2. के शवानंद भारती बनाम के रल राज्य (1973) मामले में उच्चतम न्यायालय ने पूर्व निर्णय को पलटते हुए यह स्वीकार किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग ( Integral part) है। 3. एल.आई.सी. ऑफ इंडिया मामले (1995) में सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः पुष्टि की कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है। 4. प्रस्तावना विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और इसके प्रावधान न्यायालयों में सीधे प्रवर्तनीय ( Justiciable) हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 1 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 19प्रश्न 1 / 50

विकल्प

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: A. केवल 1, 2 और 3
कथन 4 गलत है क्योंकि प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर प्रतिबंध लगाती है; साथ ही यह गैर-न्यायोचित (Non justiciable - ) है अर्थात इसके प्रावधान अदालतों में सीधे लागू नहीं कराए जा सकते। कथन 1, 2 और 3 सही हैं।

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