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संविधान के अनुच्छेद 163 में राज्यपाल के विवेकाधिकार ( Discretionary Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 163(1) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि राज्यपाल को उन मामलों को छोड़कर जहां संविधान द्वारा या उसके अधीन विवेकाधिकार अपेक्षित है, अपने कार्यों में मंत्रिपरिषद की सलाह लेनी होगी। 2. यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई मामला राज्यपाल के विवेकाधिकार में आता है या नहीं, तो राज्यपाल का निर्णय ही अंतिम होता है। 3. संविधान में राष्ट्रपति के लिए कोई स्पष्ट विवेकाधिकार उल्लिखित नहीं है, जबकि राज्यपाल के लिए संविधान स्पष्ट विवेकाधिकार का उल्लेख करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 27 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 17प्रश्न 27 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 74 में राष्ट्रपति के लिए विवेकाधिकार का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है (वहां केवल परिस्थिति-जन्य विवेक है), जबकि अनुच्छेद 163 में राज्यपाल के लिए संवैधानिक विवेकाधिकार का स्पष्ट पाठ है।

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