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उत्प्रेषण (Certiorari) रिट के संदर्भ में T. C. Basappa v. T. Nagappa (1954) और विकसित न्यायशास्त्र के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. T. C. Basappa का सुप्रीम कोर्ट निर्णय 5 मई 1954 का है। 2. Certiorari न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्य करने वाले प्राधिकरण के अधिकार-क्षेत्र संबंधी या अभिलेख पर प्रत्यक्ष विधिक त्रुटि को सुधारने के लिए जारी हो सकती है; प्रशासनिक निकाय भी जब अर्ध-न्यायिक कार्य करे तो इसके दायरे में आ सकता है। 3. Certiorari अपीलीय नहीं बल्कि पर्यवेक्षी उपचार है; रिट न्यायालय सामान्य अपील की तरह साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन नहीं करता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 6 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 17प्रश्न 6 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। PDF में T. C. Basappa का वर्ष 1991 दिया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 5 मई 1954 का है। इस निर्णय ने certiorari को supervisory writ बताया और jurisdictional/patent legal errors को सुधारने के सिद्धांत स्पष्ट किए।

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