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भारत के महान्यायवादी ( Attorney General for India) के संवैधानिक पद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 76 के तहत राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य व्यक्ति को महान्यायवादी नियुक्त किया जाता है। 2. वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है और संविधान में उसका कोई निश्चित कार्यकाल या पारिश्रमिक तय नहीं है। 3. उसे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु मत देने ( Right to vote) का अधिकार नहीं है (अनुच्छेद 88)। 4. वह एक पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी नहीं है और उसे निजी विधिक वकालत ( Private legal practice) करने से रोका नहीं गया है, बशर्ते वह भारत सरकार के खिलाफ कोई मामला न ले। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 50 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 16प्रश्न 50 / 50

विकल्प

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
चारों कथन सही हैं। महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी है जिसे संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त हैं, वह सरकारी वकील नहीं बल्कि भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार है और सरकार की अनुमति से निजी वकालत कर सकता है।

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