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एल. चंद्र कु मार बनाम भारत संघ (1997) मामले में अधिकरणों ( Tribunals) के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की 7- न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 45 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 16प्रश्न 45 / 50

विकल्प

Aअधिकरणों के निर्णयों की कभी भी उच्च न्यायालय द्वारा समीक्षा नहीं की जा सकती।
Bउच्च न्यायालय के अनुच्छेद 226/227 और उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के तहत न्यायिक समीक्षा के अधिकार संविधान का मूल ढांचा हैं; Division Bench) में चुनौती देना अनिवार्य अतः अधिकरणों के फै सलों को सीधे सुप्रीम कोर्ट में ले जाने से पहले संबंधित उच्च न्यायालय की खंडपीठ ( है।
Cसभी प्रशासनिक अधिकरणों को तत्काल समाप्त कर दिया जाए।
Dअधिकरणों को कानून की संवैधानिक वैधता की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।
सही उत्तर: B. उच्च न्यायालय के अनुच्छेद 226/227 और उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के तहत न्यायिक समीक्षा के अधिकार संविधान का मूल ढांचा हैं; Division Bench) में चुनौती देना अनिवार्य अतः अधिकरणों के फै सलों को सीधे सुप्रीम कोर्ट में ले जाने से पहले संबंधित उच्च न्यायालय की खंडपीठ ( है।
एल. चंद्र कु मार मामले (1997) में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उच्च न्यायालय का पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार मूल ढांचा है, अतः अधिकरणों के आदेशों के विरुद्ध अपील पहले उच्च न्यायालय की खंडपीठ में ही होगी, सीधे उच्चतम न्यायालय में नहीं।

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