विकल्प
Aन्यायालय ने पी. वी. नरसिम्हा राव (1998) के निर्णय को बरकरार रखा और सांसदों को पूर्ण अभियोजन उन्मुक्ति दी।
Bन्यायालय ने 1998 के पी. वी. नरसिम्हा राव निर्णय को उलट दिया और माना कि रिश्वत लेने वाले सांसद/विधायक अनुच्छेद 105(2) या 194(2) के तहत संसदीय विशेषाधिकार की आड़ में आपराधिक मुकदमे से नहीं बच सकते।
Cन्यायालय ने माना कि केवल लोक सभा अध्यक्ष ही रिश्वतखोरी के मामले में दंड दे सकते हैं, अदालतें नहीं।
Dन्यायालय ने रिश्वतखोरी की जांच के लिए सीबीआई को प्रतिबंधित कर दिया।
सही उत्तर: B. न्यायालय ने 1998 के पी. वी. नरसिम्हा राव निर्णय को उलट दिया और माना कि रिश्वत लेने वाले सांसद/विधायक अनुच्छेद 105(2) या 194(2) के तहत संसदीय विशेषाधिकार की आड़ में आपराधिक मुकदमे से नहीं बच सकते।
मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट की 7-जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से 1998 के पी. वी. नरसिम्हा राव निर्णय को पलट दिया और स्पष्ट किया कि रिश्वतखोरी संसदीय कार्य का हिस्सा नहीं है और रिश्वत लेने पर आपराधिक मुकदमा चलेगा।