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के शवानंद भारती बनाम के रल राज्य (1973) मामले में प्रतिपादित मूल संरचना के सिद्धांत ( Basic Structure Doctrine) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सर्वोच्च न्यायालय की अब तक की सबसे बड़ी 13-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 7:6 के बहुमत से यह ऐतिहासिक निर्णय दिया। 2. न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति देता है, किंतु यह शक्ति असीमित नहीं है और संसद संविधान की मूल संरचना को नष्ट या विकृत नहीं कर सकती। 3. न्यायालय ने गोलकनाथ मामले (1967) के उस निर्णय को उलट दिया जिसमें कहा गया था कि संसद मौलिक अधिकारों में कोई संशोधन नहीं कर सकती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 11 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 16प्रश्न 11 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। 24 अप्रैल 1973 को आए इस निर्णय ने संसद की संशोधन शक्ति को स्वीकार किया किंतु मूल ढांचे के सिद्धांत द्वारा उस पर अंकुश लगाया।

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