विकल्प
Aहर treaty हस्ताक्षर के साथ स्वतः भारतीय न्यायालय में लागू कानून बन जाती है।
Bभारत का दृष्टिकोण सामान्यतः dualist है: treaty अपने आप domestic statute को बदल नहीं देती; जहां घरेलू अधिकार/कानून बदलने के लिए विधायी कार्यवाही जरूरी हो, सक्षम legislation आवश्यक होती है।
Cहर treaty की Supreme Court से पूर्व-स्वीकृति आवश्यक है।
DTreaty केवल State List पर हो सकती है।
सही उत्तर: B. भारत का दृष्टिकोण सामान्यतः dualist है: treaty अपने आप domestic statute को बदल नहीं देती; जहां घरेलू अधिकार/कानून बदलने के लिए विधायी कार्यवाही जरूरी हो, सक्षम legislation आवश्यक होती है।
भारत में executive treaty-making और domestic enforceability अलग प्रश्न हैं। यदि treaty लागू करने के लिए मौजूदा कानून बदलना या विधायी अधिकारों पर प्रभाव डालना आवश्यक है, तो विधायी आधार चाहिए; न्यायालय कभी-कभी अस्पष्ट घरेलू कानून की व्याख्या अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप भी करते हैं।