LIVEUPSC CSE 2027 & BPSC • नोट्स • समसामयिकी • PYQ • Tests
इस पृष्ठ में
महत्वपूर्ण अधिनियम • 1793

चार्टर एक्ट, 1793

अक्षर आकार
हिंदी आवाज़ तैयार हो रही है…

कंपनी के व्यापारिक विशेषाधिकारों को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाते हुए पिट्स इंडिया एक्ट की नियंत्रण व्यवस्था को स्थिर करने और गवर्नर-जनरल की कार्यपालिका को अधिक शक्तिशाली बनाने वाला चार्टर नवीनीकरण।

1793सर जॉन शोर20 वर्ष का चार्टरवीटो शक्तिUPSC • BPSC
इस पृष्ठ में

त्वरित तथ्य

पारित1793
गवर्नर-जनरलसर जॉन शोर
चार्टर नवीनीकरणईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक विशेषाधिकार अगले 20 वर्षों के लिए
विशेष वित्तीय प्रावधानबोर्ड ऑफ कंट्रोल और उसके कर्मचारियों का खर्च भारतीय राजस्व से
कार्यपालिका1786 की विशेष वीटो/ओवरराइड शक्ति भावी गवर्नर-जनरलों और प्रांतीय गवर्नरों तक विस्तारित

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1773 और 1784 के बाद कंपनी के व्यापारिक विशेषाधिकारों की अवधि 1793 में समाप्त होने वाली थी। ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति के साथ मुक्त व्यापार की मांग बढ़ रही थी, लेकिन कंपनी अपनी राजनीतिक लॉबिंग के कारण अपने व्यापारिक एकाधिकार को बनाए रखने में सफल रही। इसी समय कॉर्नवालिस के न्यायिक और राजस्व सुधारों को प्रशासनिक स्थायित्व देने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही थी।

2. प्रमुख वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रावधान

2.1 व्यापारिक एकाधिकार का विस्तार

ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक विशेषाधिकारों को अगले 20 वर्षों, अर्थात 1813 तक, नवीनीकृत कर दिया गया।

2.2 बोर्ड ऑफ कंट्रोल का खर्च भारतीय राजस्व पर

बोर्ड ऑफ कंट्रोल और उसके अधीनस्थ कर्मचारियों का वेतन तथा भत्ते भारतीय राजस्व से दिए जाने की व्यवस्था की गई। स्रोत इसे औपनिवेशिक वित्तीय निकासी के संस्थागत रूप के रूप में प्रस्तुत करता है।

2.3 वीटो/ओवरराइड शक्ति का विस्तार

1786 में लॉर्ड कॉर्नवालिस को दी गई परिषद के निर्णयों को विशेष परिस्थितियों में ओवरराइड करने की शक्ति को भविष्य के गवर्नर-जनरलों तथा मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों तक वैधानिक रूप से बढ़ाया गया।

2.4 वरिष्ठ अधिकारियों के भारत छोड़ने पर नियम

गवर्नर-जनरल, प्रांतीय गवर्नर या कमांडर-इन-चीफ यदि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना भारत छोड़ते, तो इसे पद से त्यागपत्र माना जाना था।

2.5 कंपनी के लाभांश और भुगतान

कंपनी के शेयरधारकों के लाभांश को 10% निर्धारित किया गया और भारतीय अधिशेष राजस्व से ब्रिटिश सरकार को प्रतिवर्ष 5 लाख पाउंड देने का प्रावधान किया गया।

2.6 न्यायपालिका और राजस्व प्रशासन

कॉर्नवालिस कोड से जुड़े सिद्धांतों को वैधानिक आधार देते हुए जिला कलेक्टरों से न्यायिक अधिकार अलग करने, राजस्व अदालतों के पुनर्गठन और लिखित विनियमों पर आधारित शासन की दिशा को मजबूत किया गया।

3. संवैधानिक एवं प्रशासनिक महत्व

  • 1784 की दोहरी नियंत्रण प्रणाली को अगले चरण में स्थायित्व मिला।
  • गवर्नर-जनरल की केंद्रीय कार्यपालिका का अधिकार और मजबूत हुआ।
  • कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार अभी बरकरार रहा, पर मुक्त व्यापार की बहस और तीखी हुई।
  • लंदन स्थित नियंत्रण तंत्र का वित्तीय बोझ भारतीय राजस्व पर डालने से औपनिवेशिक वित्तीय शोषण का नया संस्थागत रूप बना।

4. सीमाएँ

यह अधिनियम कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को जारी रखने वाला समझौता था। इसलिए ब्रिटेन के उभरते निजी व्यापारी और मुक्त व्यापार समर्थक संतुष्ट नहीं हुए। अगले 20 वर्षों में यही दबाव 1813 के चार्टर एक्ट की पृष्ठभूमि बना।

5. 1813 के चार्टर एक्ट से संबंध

17931813
कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार 20 वर्ष बढ़ायाचाय और चीन व्यापार को छोड़कर सामान्य व्यापारिक एकाधिकार समाप्त
नियंत्रण ढाँचे को स्थिर कियामुक्त व्यापार और सांस्कृतिक-शैक्षिक हस्तक्षेप का नया चरण
वीटो शक्ति का विस्तारक्राउन की संप्रभुता को और स्पष्ट किया

6. परीक्षा अभ्यास

प्रारंभिक: 1793 के चार्टर एक्ट ने किस शक्ति को भावी गवर्नर-जनरलों के लिए विस्तारित किया? — परिषद के निर्णयों को विशेष परिस्थितियों में ओवरराइड करने की शक्ति।

मुख्य: 1793 का चार्टर एक्ट कंपनी के व्यापारिक हितों और ब्रिटिश राजनीतिक नियंत्रण के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करता था? स्पष्ट कीजिए।

7. त्वरित पुनरावृत्ति

  • 1793 = कंपनी के चार्टर का 20 वर्ष नवीनीकरण
  • व्यापारिक एकाधिकार 1813 तक जारी
  • Board of Control का खर्च भारतीय राजस्व से
  • 1786 की विशेष ओवरराइड शक्ति का विस्तार
  • अगला निर्णायक मोड़ = चार्टर एक्ट 1813