1. प्रारंभिक जीवन और ICS त्यागपत्र
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ। उनके पिता जानकीनाथ बोस और माता प्रभावती देवी थीं। प्रेसीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज में शिक्षा के बाद वे इंग्लैंड गए और 1920 की भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।
अप्रैल 1921 में उन्होंने ब्रिटिश सरकार की सेवा स्वीकार न करने का निर्णय लिया और ICS से त्यागपत्र दे दिया। भारत लौटकर देशबंधु चित्तरंजन दास को अपना राजनीतिक गुरु माना।
2. युवा राष्ट्रवाद और वैचारिक विकास
- 1928: जवाहरलाल नेहरू के साथ पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को मजबूत करने वाली युवा-वाम राष्ट्रवादी धारा में सक्रियता।
- 1929: लाहौर कांग्रेस में पूर्ण स्वराज्य की दिशा का समर्थन।
- 1933–36: यूरोप प्रवास; भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में कूटनीतिक संपर्क और प्रचार।
- 1935: The Indian Struggle का प्रकाशन।
3. हरिपुरा और त्रिपुरी संकट
हरिपुरा कांग्रेस, 1938
1938 में बोस कांग्रेस अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय आर्थिक योजना की दिशा में National Planning Committee की स्थापना की गई और जवाहरलाल नेहरू को इसका अध्यक्ष बनाया गया।
त्रिपुरी संकट, 1939
1939 के कांग्रेस अध्यक्षीय चुनाव में बोस ने पट्टाभि सीतारमैया को हराया। उपलब्ध नोट्स में बोस को 1580 और सीतारमैया को 1377 मत मिलने का उल्लेख है। कार्यसमिति गठन और भविष्य की आंदोलन-रणनीति पर गांधीवादी नेतृत्व से मतभेद बढ़ा। 29 अप्रैल 1939 को बोस ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने।
4. फॉरवर्ड ब्लॉक और रामगढ़
3 मई 1939 को बोस ने कांग्रेस के भीतर वामपंथी और राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित करने के लिए Forward Bloc की स्थापना की।
मार्च 1940 में रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन के समानांतर स्वामी सहजानंद सरस्वती के साथ अखिल भारतीय समझौता-विरोधी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष की मांग रखी गई।
5. महानिष्क्रमण और जर्मनी
जुलाई 1940 में गिरफ्तारी और बाद में नजरबंदी के बीच बोस 16/17 जनवरी 1941 की रात अपने घर से निकल गए। उपलब्ध नोट्स में मार्ग इस प्रकार दिया गया है: कलकत्ता → गोमो → पेशावर → काबुल → मास्को → बर्लिन।
- बर्लिन में Free India Centre की स्थापना।
- भारतीय युद्धबंदियों से Indian Legion / Free India Legion का गठन।
- ‘जय हिंद’ को अभिवादन के रूप में लोकप्रियता मिली।
- फरवरी–मई 1943 में जर्मन पनडुब्बी U-180 से जापानी I-29 में स्थानांतरण कर दक्षिण-पूर्व एशिया पहुँचे।
6. आजाद हिंद फौज और आजाद हिंद सरकार
INA की पृष्ठभूमि
मलाया में कैप्टन मोहन सिंह, जापानी सहयोग और भारतीय युद्धबंदियों से प्रारंभिक INA का गठन हुआ। रास बिहारी बोस ने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के माध्यम से संगठनात्मक आधार तैयार किया।
नेताजी का नेतृत्व
2 जुलाई 1943 को बोस सिंगापुर पहुँचे और 4 जुलाई को रास बिहारी बोस ने उन्हें INA तथा लीग का नेतृत्व सौंपा। “दिल्ली चलो” और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा” जैसे नारे सैनिक और जन-प्रेरणा का माध्यम बने।
रानी झांसी रेजिमेंट का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया।
आरजी हुकूमत-ए-आजाद हिंद
21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में Provisional Government of Free India की घोषणा की गई। दिसंबर 1943 में पोर्ट ब्लेयर में तिरंगा फहराने और अंडमान-निकोबार को क्रमशः “शहीद” और “स्वराज” नाम देने का उल्लेख नोट्स में है।
7. सैन्य अभियान और लाल किला मुकदमा
1944 में INA जापानी सेना के साथ भारत की पूर्वोत्तर सीमा तक पहुँची। 14 अप्रैल 1944 को मोइरांग में कर्नल शौकत अली मलिक द्वारा तिरंगा फहराने का उल्लेख किया गया है। भारी मानसून, रोग, आपूर्ति संकट और जापानी सैन्य पराजय के कारण अभियान पीछे हट गया।
1945–46 में लाल किले में प्रेम सहगल, गुरबख्श सिंह ढिल्लों और शाहनवाज खान पर मुकदमा चला। इनके बचाव से राष्ट्रव्यापी जनभावना जुड़ी और INA भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अंतिम चरण का बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रतीक बन गई।
8. गांधी-बोस वैचारिक तुलना
| आयाम | सुभाष चंद्र बोस | महात्मा गांधी |
|---|---|---|
| साधन | आवश्यकता पड़ने पर सैन्य संघर्ष और सशस्त्र प्रतिरोध को स्वीकार्यता। | सत्य और अहिंसा पर आधारित साधन को अपरिहार्य मानते थे। |
| अंतरराष्ट्रीय नीति | ब्रिटेन के युद्धकालीन विरोधियों से सहायता लेने की रणनीति। | नैतिक आत्मबल और स्वतंत्र जनसंघर्ष पर बल। |
| अर्थव्यवस्था | तेज औद्योगीकरण, भारी उद्योग और राज्य-निर्देशित योजना। | ग्रामोद्योग, विकेंद्रीकरण और ट्रस्टीशिप। |
| राज्य | मजबूत केंद्रीय, अनुशासित और योजनाबद्ध राज्य की प्रवृत्ति। | ग्राम स्वराज और न्यूनतम केंद्रीकृत सत्ता पर बल। |
9. पुस्तकें, नारे और परीक्षा तथ्य
- The Indian Struggle — 1935 में प्रकाशित।
- An Indian Pilgrim — आत्मकथात्मक लेखन।
- प्रमुख नारे: “दिल्ली चलो”, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा”, “जय हिंद”।
- Forward Bloc: मई 1939।
- आजाद हिंद सरकार: 21 अक्टूबर 1943, सिंगापुर।
- मोइरांग: 14 अप्रैल 1944।
10. पिछले वर्षों के प्रश्न
66वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: सुभाष चंद्र बोस के नाम के पहले ‘नेताजी’ सम्मानजनक शब्द किस देश में जोड़ा गया?
उत्तर: जर्मनी।
65वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना किसने की?
उत्तर: सुभाष चंद्र बोस।
64वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: बोस के कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद अध्यक्ष कौन बने?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
BPSC मुख्य परीक्षा
“भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।”
11. मुख्य परीक्षा उत्तर-ढाँचा
- भूमिका: कांग्रेस के भीतर उग्र राष्ट्रवादी नेतृत्व और औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध वैकल्पिक रणनीति।
- राजनीतिक संघर्ष: हरिपुरा, त्रिपुरी और फॉरवर्ड ब्लॉक।
- अंतरराष्ट्रीय रणनीति: महानिष्क्रमण, बर्लिन और दक्षिण-पूर्व एशिया।
- INA: पुनर्गठन, महिला रेजिमेंट, आजाद हिंद सरकार और सैन्य अभियान।
- मनोवैज्ञानिक प्रभाव: लाल किला मुकदमे और भारतीय सशस्त्र बलों पर राष्ट्रवादी प्रभाव।
- सीमा: सैन्य विजय प्राप्त न कर सकना; जापानी सैन्य सहायता पर निर्भरता।
- निष्कर्ष: बोस और INA का महत्व सैन्य परिणाम से अधिक राष्ट्रीय मनोबल, औपनिवेशिक सेना की निष्ठा पर असर और स्वतंत्रता के अंतिम चरण की राजनीति में निहित था।