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आधुनिक भारतीय इतिहास • व्यक्तित्व विशेष

डॉ. राजेंद्र प्रसाद: चंपारण से संविधान सभा और प्रथम राष्ट्रपति तक

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जीरादेई से छात्र संगठन, चंपारण, असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो आंदोलन, संविधान सभा और स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति पद तक की यात्रा।

बिहार इतिहासराष्ट्रीय आंदोलनसंविधान सभाUPSC + BPSC
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1. प्रारंभिक जीवन और बिहार से जुड़ाव

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को सारण क्षेत्र के जीरादेई गाँव में हुआ, जो वर्तमान में सिवान जिले में है। बिहार की राजनीतिक और शैक्षिक चेतना से उनका संबंध प्रारंभ से ही गहरा रहा। आगे वे राष्ट्रीय आंदोलन, संविधान निर्माण और स्वतंत्र भारत की सर्वोच्च संवैधानिक भूमिका तक पहुँचे।

2. छात्र संगठन और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत

1906 में वे बिहारी छात्र सम्मेलन के संस्थापकों में शामिल थे। उपलब्ध पूर्व-अपलोड सामग्री उन्हें ‘बिहार लॉ’ नामक साप्ताहिक पत्रिका के प्रकाशन से भी जोड़ती है। यह चरण बिहार में शिक्षित युवाओं के सार्वजनिक संगठन और क्षेत्रीय राजनीतिक चेतना के निर्माण से जुड़ा था।

3. चंपारण सत्याग्रह, 1917

चंपारण सत्याग्रह के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद महात्मा गांधी के प्रमुख बिहारी सहयोगियों में थे। उपलब्ध नोट्स में ब्रजकिशोर प्रसाद, जे.बी. कृपलानी, अनुग्रह नारायण सिन्हा, रामनवमी प्रसाद, धरणीधर प्रसाद और राजकुमार शुक्ल जैसे नामों के साथ उनका उल्लेख मिलता है।

उनकी भूमिका स्थानीय वकीलों, किसानों और गांधी के नेतृत्व के बीच संगठनात्मक सेतु के रूप में महत्वपूर्ण थी। चंपारण ने राजेंद्र प्रसाद को प्रांतीय सार्वजनिक जीवन से अखिल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा में और आगे बढ़ाया।

4. असहयोग आंदोलन और राष्ट्रीय शिक्षा

बिहार में असहयोग आंदोलन के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, मौलाना मजहरुल हक, हसन इमाम और अन्य नेताओं ने प्रमुख भूमिका निभाई।

पूर्व-अपलोड अभ्यास सामग्री के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा के वैकल्पिक ढाँचे में बिहार विद्यापीठ और राष्ट्रीय महाविद्यालय का विशेष महत्व था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय महाविद्यालय के प्राचार्य बने।

5. सविनय अवज्ञा आंदोलन और बिहार

सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान राजेंद्र प्रसाद ने बिहार में गांधी की सहमति से चौकीदारी कर की न-अदायगी के आंदोलन का नेतृत्व किया। उपलब्ध सामग्री में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने जे.बी. कृपलानी के साथ मोतिहारी में नमक कानून का उल्लंघन किया।

इस चरण में उनका नेतृत्व स्थानीय प्रशासन-विरोधी प्रतिरोध को राष्ट्रीय सविनय अवज्ञा की रणनीति से जोड़ता है।

6. भारत छोड़ो आंदोलन, 1942

भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के बाद बड़े राष्ट्रीय नेताओं की गिरफ्तारी के क्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी गिरफ्तार किया गया। पूर्व-अपलोड बिहार-इतिहास सामग्री के अनुसार उन्हें बांकीपुर जेल में रखा गया।

7. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में नेतृत्व

पूर्व-अपलोड बिहार तथ्य-सार राजेंद्र प्रसाद को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का तीन बार अध्यक्ष बताता है। इस प्रकार वे बिहार-आधारित राष्ट्रीय नेता से कांग्रेस के शीर्ष संगठनात्मक नेतृत्व तक पहुँचे।

8. संविधान सभा और स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति

भूमिकामुख्य तथ्य
संविधान सभा11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
स्वतंत्र भारतवे भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
अंतिम समय28 फरवरी 1963 को सदाकत आश्रम, पटना में उनका निधन हुआ।

संविधान सभा की अध्यक्षता ने उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन से संविधान-निर्माण की प्रक्रिया तक जोड़ने वाला केंद्रीय व्यक्तित्व बना दिया।

9. प्रमुख कृतियाँ

कृतिपरीक्षा संकेत
India Dividedभारत के विभाजन के प्रश्न से संबंधित प्रसिद्ध लेखन।
बापू के कदमों मेंमहात्मा गांधी से उनके निकट संबंध की स्मृतिपरक कृति।
चंपारण में सत्याग्रहचंपारण आंदोलन से संबंधित लेखन।

10. परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य

  • जन्म — 3 दिसंबर 1884, जीरादेई।
  • 1906 — बिहारी छात्र सम्मेलन से जुड़ाव/स्थापना।
  • 1917 — चंपारण सत्याग्रह में गांधी के प्रमुख बिहारी सहयोगियों में।
  • असहयोग काल — राष्ट्रीय महाविद्यालय के प्राचार्य।
  • सविनय अवज्ञा — चौकीदारी कर न-अदायगी और मोतिहारी में नमक कानून उल्लंघन से जुड़ाव।
  • 1942 — गिरफ्तारी; बांकीपुर जेल।
  • 11 दिसंबर 1946 — संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष।
  • स्वतंत्र भारत — प्रथम राष्ट्रपति।
  • निधन — 28 फरवरी 1963, सदाकत आश्रम, पटना।

11. अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए— (1) वे 1906 के बिहारी छात्र सम्मेलन से जुड़े थे। (2) वे संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष बने। (3) वे स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।

उत्तर: तीनों कथन सही हैं।

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: चंपारण से संविधान सभा तक डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भूमिका बिहार और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के बीच सेतु के रूप में कैसे विकसित हुई? चर्चा कीजिए।