1.3.1.3 भूकंपीय तरंगें

भूकंप के समय पृथ्वी के भीतर अचानक मुक्त हुई ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती है। इन्हें भूकंपीय तरंगें कहा जाता है। पृथ्वी के आंतरिक भाग को समझने का सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष साधन यही तरंगें हैं, क्योंकि इनके वेग, दिशा, अपवर्तन, परावर्तन और छाया क्षेत्रों से पृथ्वी की अलग-अलग परतों की प्रकृति का पता चलता है।

भूकंपीय तरंगों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है—

भौम या आंतरिक तरंगें — P और S तरंगें।

सतही तरंगें — Love और Rayleigh तरंगें।

भूकंप का फोकस और अधिकेंद्र

भूकंप पृथ्वी के भीतर जिस स्थान से प्रारंभ होता है उसे फोकस या हाइपोसेन्टर कहते हैं।

फोकस के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु अधिकेंद्र कहलाता है।

भूकंपीय तरंगें फोकस से चारों दिशाओं में फैलती हैं।

P तरंगें

P तरंगों को प्राथमिक तरंगें कहा जाता है क्योंकि ये सबसे तेज भूकंपीय तरंगें हैं और सीस्मोग्राफ पर सबसे पहले दर्ज होती हैं।

ये अनुदैर्ध्य या संपीडन तरंगें हैं।

इनमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर आगे-पीछे कंपन करते हैं।

P तरंगें—

तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं।

इसी कारण P तरंगें पृथ्वी के मैंटल और द्रव बाह्य क्रोड दोनों से गुजरती हैं।

P तरंगों का महत्व

जब P तरंगें अलग घनत्व और प्रत्यास्थता वाली परतों में प्रवेश करती हैं तो उनका वेग और दिशा बदलते हैं।

इससे—

जैसी संरचनाओं का पता लगाया जा सकता है।

S तरंगें

S तरंगों को द्वितीयक तरंगें कहा जाता है क्योंकि ये P तरंगों के बाद पहुँचती हैं।

ये अनुप्रस्थ या कतरनी तरंगें हैं।

इनमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लगभग लंबवत कंपन करते हैं।

S तरंगें केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं।

ये द्रव और गैस से नहीं गुजरतीं।

बाह्य क्रोड के द्रव होने का प्रमाण

S तरंगों का पृथ्वी के बाह्य क्रोड से होकर न गुजरना यह सिद्ध करने वाला सबसे महत्वपूर्ण भूकंपीय प्रमाण है कि—

पृथ्वी का बाह्य क्रोड द्रव अवस्था में है।

यह UPSC/BPSC Prelims के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है।

P और S तरंगों की तुलना

आधार P तरंग S तरंग
पूरा नाम प्राथमिक द्वितीयक
गति सबसे तेज P से धीमी
प्रकृति अनुदैर्ध्य अनुप्रस्थ
ठोस से गुजरती है हाँ हाँ
द्रव से गुजरती है हाँ नहीं
गैस से गुजरती है हाँ नहीं
कणों का कंपन संचरण दिशा के समानांतर संचरण दिशा के लंबवत
पृथ्वी-अंतर अध्ययन में उपयोग सभी प्रमुख परतें ठोस-द्रव भेद

सतही तरंगें

सतही तरंगें पृथ्वी की सतह के आसपास यात्रा करती हैं।

ये भौम तरंगों की तुलना में धीमी होती हैं लेकिन इनके आयाम बड़े हो सकते हैं और ये भूकंप के दौरान भारी विनाश कर सकती हैं।

मुख्य प्रकार हैं—

Love तरंगें

Rayleigh तरंगें

Love तरंगें

Love तरंगों में भूमि का कंपन मुख्यतः क्षैतिज दिशा में होता है।

इनसे इमारतों की नींव और क्षैतिज संरचनाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

Rayleigh तरंगें

Rayleigh तरंगों में भूमि का कंपन लुढ़कती समुद्री लहरों जैसा होता है।

कण दीर्घवृत्ताकार गति करते हैं, जिससे भूमि में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दोनों प्रकार की गति होती है।

सबसे विनाशकारी तरंगें

सामान्यतः सतही तरंगें भूकंप में सबसे अधिक क्षति पहुँचाती हैं क्योंकि—

भूकंपीय तरंगों का वेग

सामान्यतः—

P तरंगों का वेग > S तरंगों का वेग > सतही तरंगों का वेग

भूकंपीय तरंगों का वेग केवल घनत्व पर निर्भर नहीं करता। यह मुख्यतः माध्यम की—

पर निर्भर करता है।

इसलिए केवल यह कहना कि “घनत्व बढ़ने पर वेग हमेशा घटता है” गलत है।

अपवर्तन और परावर्तन

जब भूकंपीय तरंगें एक ऐसी सीमा पर पहुँचती हैं जहाँ पदार्थ के गुण अचानक बदलते हैं, तो उनका कुछ भाग परावर्तित और कुछ भाग अपवर्तित हो सकता है।

इन व्यवहारों के अध्ययन से पृथ्वी के भीतर विभिन्न परतों और असांतत्यों की पहचान होती है।

उदाहरण—

मोहो असांतत्य — भूपर्पटी और मैंटल।

गुटेनबर्ग असांतत्य — मैंटल और बाह्य क्रोड।

लेहमैन असांतत्य — बाह्य और आंतरिक क्रोड।

छाया क्षेत्र

पृथ्वी के भीतर तरंगों के अपवर्तन और कुछ माध्यमों से न गुजर पाने के कारण सतह पर कुछ क्षेत्र ऐसे बनते हैं जहाँ विशेष भूकंपीय तरंगें सीधे दर्ज नहीं होतीं।

इन्हें छाया क्षेत्र कहा जाता है।

P तरंग छाया क्षेत्र

P तरंगें बाह्य क्रोड में प्रवेश करते समय तीव्र रूप से अपवर्तित होती हैं।

इस कारण लगभग 105° से 145° के बीच P तरंगों का प्रमुख छाया क्षेत्र पाया जाता है।

S तरंग छाया क्षेत्र

S तरंगें द्रव बाह्य क्रोड से नहीं गुजर सकतीं।

इसलिए लगभग 105° के बाद प्रत्यक्ष S तरंगें दर्ज नहीं होतीं।

इससे S तरंग का छाया क्षेत्र P तरंग की तुलना में बहुत बड़ा होता है।

परीक्षा की महत्वपूर्ण सावधानी

105°–145° क्षेत्र में दोनों P और S की प्रत्यक्ष तरंगें नहीं मिलतीं, लेकिन 145° के बाद P तरंगें फिर से दर्ज होने लगती हैं।

S तरंगें 105° के बाद प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुँचतीं।

भूकंपीय तरंगों से पृथ्वी के भीतर की जानकारी

भूकंपीय तरंगों ने वैज्ञानिकों को यह समझने में सहायता की कि—

सीस्मोग्राफ और सीस्मोग्राम

भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड करने वाले उपकरण को सीस्मोग्राफ या सीस्मोमीटर कहा जाता है।

इससे प्राप्त रिकॉर्ड को सीस्मोग्राम कहते हैं।

सीस्मोग्राम पर P और S तरंगों के पहुँचने के समय का अंतर भूकंप के केंद्र से दूरी का अनुमान लगाने में उपयोगी होता है।

कम-से-कम तीन अलग-अलग भूकंपीय स्टेशनों से प्राप्त दूरी की सहायता से अधिकेंद्र का स्थान निर्धारित किया जा सकता है।

भूकंपीय टोमोग्राफी

आधुनिक भूभौतिकी में हजारों भूकंपों और सीस्मिक स्टेशनों के डेटा का उपयोग करके पृथ्वी के भीतर भूकंपीय वेगों की त्रि-आयामी छवियाँ बनाई जाती हैं।

इसे भूकंपीय टोमोग्राफी कहा जाता है।

इससे वैज्ञानिक—

का अध्ययन करते हैं।

यह पृथ्वी के लिए लगभग उसी प्रकार काम करती है जैसे चिकित्सा में शरीर के लिए सीटी स्कैन।

410 किमी और 660 किमी असांतत्य

मैंटल के भीतर लगभग 410 किमी और 660 किमी गहराई पर भूकंपीय वेगों में महत्वपूर्ण परिवर्तन मिलता है।

ये परिवर्तन केवल रासायनिक संरचना से नहीं, बल्कि उच्च दबाव में खनिजों की क्रिस्टलीय संरचना बदलने से भी जुड़े होते हैं।

410–660 किमी क्षेत्र को मैंटल संक्रमण क्षेत्र कहा जाता है।

यह प्लेट सबडक्शन और गहरे मैंटल की गतिशीलता समझने में महत्वपूर्ण है।

2026 का वैज्ञानिक अद्यतन

2026 में प्रकाशित शोधों ने दिखाया कि भूकंपीय तरंगें आज भी पृथ्वी के गहरे भागों की नई संरचनाएँ उजागर कर रही हैं।

Nature Geoscience, मार्च 2026 के एक अध्ययन में आंतरिक क्रोड की भूकंपीय अनैसोट्रॉपी का अध्ययन किया गया। लंबे समय से यह देखा गया है कि भूकंपीय तरंगें आंतरिक क्रोड में पृथ्वी के घूर्णन-अक्ष की दिशा में भूमध्यरेखीय दिशा की तुलना में अलग वेग से चलती हैं। नए अध्ययन ने इसे लौह क्रिस्टलों की ऊष्मीय और संरचनात्मक विशेषताओं से जोड़ने का मॉडल प्रस्तुत किया।

Journal of Geophysical Research, जून 2026 के एक अध्ययन ने Pdiff और SHdiff जैसी विवर्तित तरंगों के लाखों रिकॉर्डों का उपयोग करके क्रोड-मैंटल सीमा के ऊपर निम्नतम मैंटल की संरचना का मानचित्रण किया। इससे अफ्रीका और प्रशांत के नीचे बड़े निम्न कतरनी-वेग प्रांतों के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी मिली।

Nature Communications, 2026 के एक अन्य अध्ययन ने लगभग 660–700 किमी गहराई पर स्थिर सबडक्टेड स्लैब और खनिजीय संक्रमणों को भूकंपीय छवियों से पहचाना।

इन शोधों का परीक्षा-योग्य संदेश है—

भूकंपीय तरंगें केवल भूकंप दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि पृथ्वी के गहरे आंतरिक भाग की संरचना और गतिशीलता को चित्रित करने का प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण हैं।

सत्यापित UPSC Prelims PYQ

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2023

भूकंपीय तरंगों के संबंध में दो कथन दिए गए थे—

  1. सीस्मोग्राफ में P तरंगें S तरंगों से पहले दर्ज होती हैं।
  2. P तरंगों में कण तरंग संचरण की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं, जबकि S तरंगों में कण संचरण की दिशा के समकोण पर कंपन करते हैं।

सही उत्तर: दोनों कथन सही हैं।

यह भूकंपीय तरंगों के गुणों पर प्रत्यक्ष UPSC Prelims PYQ है।

सत्यापित UPSC Mains PYQ

UPSC Geography Optional, 2005

प्रश्न:

“पृथ्वी के आंतरिक भाग के अध्ययन में भूकंपीय तरंगों की भूमिका पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।”

यह Geography Optional Paper-I का वास्तविक प्रश्न है।

उत्तर में निम्न बिंदु अपेक्षित हैं—

UPSC GS Mains

इस सूक्ष्म उपविषय “भूकंपीय तरंगें” पर हाल के सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा में ऐसा प्रत्यक्ष प्रश्न सत्यापित नहीं मिला जिसे बिना संदेह शामिल किया जा सके।

इसलिए कोई अभ्यास प्रश्न PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।

सत्यापित BPSC Prelims PYQ

BPSC संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा में इस सूक्ष्म उपविषय पर वर्ष और आधिकारिक प्रश्नपत्र के साथ प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला।

इसलिए कोई टेस्ट-सीरीज, शिक्षक भर्ती या अन्य BPSC परीक्षा का प्रश्न CCE PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।

सत्यापित BPSC Mains PYQ

BPSC संयुक्त प्रतियोगिता सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा में इस सूक्ष्म उपविषय पर प्रत्यक्ष, वर्ष-सहित सत्यापित प्रश्न उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला।

इसलिए कोई अनुमानित प्रश्न PYQ के नाम से शामिल नहीं किया गया है।

Prelims के लिए अंतिम तथ्य

P तरंगें सबसे तेज होती हैं।

P तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं।

P तरंगें ठोस, द्रव और गैस से गुजर सकती हैं।

S तरंगें P से धीमी होती हैं।

S तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।

S तरंगें केवल ठोस से गुजरती हैं।

बाह्य क्रोड का द्रव होना S तरंगों की अनुपस्थिति से सिद्ध होता है।

P तरंग का प्रमुख छाया क्षेत्र लगभग 105°–145° है।

S तरंग लगभग 105° के बाद प्रत्यक्ष रूप से दर्ज नहीं होती।

सतही तरंगें सामान्यतः सर्वाधिक विनाशकारी होती हैं।

Love और Rayleigh सतही तरंगें हैं।

सीस्मोग्राफ तरंगों को दर्ज करता है और रिकॉर्ड को सीस्मोग्राम कहते हैं।

भूकंपीय टोमोग्राफी पृथ्वी के भीतर की त्रि-आयामी संरचना समझने में उपयोगी है।

Mains के लिए उत्तर-ढाँचा

यदि प्रश्न हो—

“भूकंपीय तरंगें पृथ्वी की आंतरिक संरचना के अध्ययन में कैसे सहायक हैं?”

उत्तर का क्रम रखें—

भूमिका — पृथ्वी के भीतर प्रत्यक्ष पहुँच सीमित है।

P और S तरंगें — गुण और माध्यम।

छाया क्षेत्र — बाह्य क्रोड का द्रव होना।

वेग परिवर्तन — मोहो, गुटेनबर्ग, लेहमैन।

टोमोग्राफी — आधुनिक 3D अध्ययन।

समसामयिक मूल्यवर्धन — 2026 के inner core और lower mantle अध्ययन।

निष्कर्ष — भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के आंतरिक भाग की सबसे शक्तिशाली अप्रत्यक्ष जाँच हैं।

निष्कर्ष

भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के आंतरिक भाग को समझने की आधारभूत वैज्ञानिक कुंजी हैं। P और S तरंगों के अलग-अलग माध्यमों में व्यवहार, उनके वेग में परिवर्तन, अपवर्तन, परावर्तन और छाया क्षेत्रों के अध्ययन से पृथ्वी की परतों, द्रव बाह्य क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड की पहचान संभव हुई। आधुनिक भूकंपीय टोमोग्राफी ने इस ज्ञान को आगे बढ़ाकर पृथ्वी के गहरे मैंटल और क्रोड की त्रि-आयामी संरचना का अध्ययन संभव बनाया है।