1.5.2 समुद्रतल प्रसार
समुद्रतल प्रसार (Sea-Floor Spreading) वह प्रक्रिया है जिसमें मध्य-महासागरीय कटक पर नया महासागरीय पर्पटी पदार्थ बनता है और पुरानी पर्पटी दोनों ओर दूर हटती जाती है।
यह अवधारणा महाद्वीपीय विस्थापन और आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी के बीच सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कड़ी बनी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद महासागर तल का विस्तृत मानचित्रण हुआ।
वैज्ञानिकों को पता चला कि महासागर तल समतल नहीं है, बल्कि वहाँ—
- मध्य-महासागरीय कटक,
- गहरी महासागरीय गर्त,
- भ्रंश क्षेत्र,
- ज्वालामुखीय पर्वत
मौजूद हैं।
इन खोजों ने महासागरीय तल को स्थिर मानने वाली पुरानी धारणा को बदल दिया।
हैरी हेस का योगदान
अमेरिकी भूवैज्ञानिक हैरी हेस ने 1960 के दशक के प्रारंभ में प्रस्तावित किया कि मध्य-महासागरीय कटकों पर मैंटल से मैग्मा ऊपर आता है, ठंडकर नई महासागरीय पर्पटी बनाता है और पुरानी पर्पटी को दोनों ओर धकेलता है।
इस मॉडल ने समझाया कि—
- नया महासागरीय तल कहाँ बनता है,
- महासागर क्यों चौड़े हो सकते हैं,
- महाद्वीप एक-दूसरे से कैसे दूर जा सकते हैं।
रॉबर्ट डिट्ज
रॉबर्ट डिट्ज ने भी लगभग इसी समय समुद्रतल प्रसार की अवधारणा को विकसित और लोकप्रिय किया।
वैज्ञानिक इतिहास में हैरी हेस और डिट्ज दोनों का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रक्रिया
मध्य-महासागरीय कटक के नीचे गर्म मैंटल ऊपर उठता है।
दाब घटने पर आंशिक पिघलाव होता है।
बेसाल्टिक मैग्मा दरारों से ऊपर आता है।
मैग्मा ठंडकर नई महासागरीय पर्पटी बनाता है।
जैसे-जैसे नया पदार्थ जुड़ता है, पहले बना तल कटक से दूर जाता है।
नया तल कहाँ बनता है?
अपसारी प्लेट सीमा पर।
विशेष रूप से मध्य-महासागरीय कटक पर।
पुराना तल कहाँ जाता है?
महासागरीय पर्पटी अनंत समय तक जमा नहीं होती।
पुरानी, ठंडी और घनी पर्पटी अभिसारी सीमाओं पर सबडक्शन द्वारा मैंटल में पुनर्चक्रित हो सकती है।
इसलिए पृथ्वी का आकार केवल समुद्रतल प्रसार से लगातार नहीं बढ़ता।
समुद्रतल प्रसार के प्रमुख प्रमाण
1. महासागरीय पर्पटी की आयु
कटक के पास शैलें सबसे युवा होती हैं।
कटक से दूर जाने पर महासागरीय पर्पटी की आयु बढ़ती जाती है।
महासागरीय पर्पटी सामान्यतः लगभग 200 मिलियन वर्ष से अधिक पुरानी बहुत कम है, जबकि महाद्वीपीय शैलें अरबों वर्ष पुरानी हो सकती हैं।
2. चुंबकीय धारियाँ
कटक के दोनों ओर सामान्य और उलटी चुंबकीय ध्रुवीयता की लगभग सममित धारियाँ मिलती हैं।
यह नए पर्पटी निर्माण का समय-अभिलेख है।
3. अवसाद की मोटाई
कटक के पास महासागरीय पर्पटी युवा होने के कारण अवसाद पतले होते हैं।
दूर जाने पर लंबे समय तक अवसादन होने से अवसाद मोटे होते जाते हैं।
4. ऊष्मा प्रवाह
मध्य-महासागरीय कटक के पास ऊष्मा प्रवाह अधिक होता है क्योंकि गर्म मैंटल और नया मैग्मा सतह के निकट होते हैं।
5. भूकंप और ज्वालामुखिता
कटक के अक्ष पर उथले भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधि सामान्य है।
प्रसार की गति
अलग-अलग कटक अलग गति से फैलते हैं।
धीमी प्रसार दर
मध्य-अटलांटिक कटक।
यहाँ स्पष्ट केंद्रीय रिफ्ट घाटी विकसित हो सकती है।
तेज प्रसार दर
पूर्वी प्रशांत उत्थान जैसे क्षेत्र।
तेज मैग्माई आपूर्ति के कारण चौड़ा उभरा कटक विकसित हो सकता है।
अति-धीमा प्रसार
आर्कटिक और हिंद महासागर के कुछ भागों में।
यहाँ मैग्माई और भ्रंशीय प्रक्रियाओं का अनुपात अलग हो सकता है।
समुद्रतल प्रसार और महाद्वीपीय विस्थापन
वेगेनर ने महाद्वीपों की गति बताई लेकिन तंत्र नहीं दिया।
समुद्रतल प्रसार ने समझाया कि महासागरीय पर्पटी स्वयं गतिशील है।
महाद्वीप पर्पटी को चीरते हुए नहीं चलते; वे गतिशील स्थलमंडलीय प्लेटों के साथ चलते हैं।
हिंद महासागर और भारत
भारत के गोंडवानालैंड से अलग होने के बाद हिंद महासागर के विभिन्न प्रसार केंद्रों पर नई महासागरीय पर्पटी बनी।
हिंद महासागर के चुंबकीय अभिलेख भारतीय प्लेट की उत्तरगामी गति और प्रसार इतिहास समझने में महत्वपूर्ण हैं।
2026 की ऐतिहासिक प्रत्यक्ष घटना
दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर के कटक पर 26 अप्रैल 2024 से शुरू हुई प्रसार घटना को समुद्रतल पर पहले से लगाए गए उपकरणों ने दर्ज किया।
2026 में प्रकाशित शोध के अनुसार—
- कटक के दोनों ओर समुद्रतल कुछ ही दिनों में लगभग 4.2 मीटर अलग हुआ,
- भूकंपीय झुंड दर्ज हुआ,
- समुद्रतल में कई मीटर ऊर्ध्वाधर परिवर्तन हुआ,
- लगभग 160 मिलियन घन मीटर लावा निकला।
इसे मध्य-महासागरीय कटक पर समुद्रतल प्रसार की पहली प्रत्यक्ष, स्थान-विशिष्ट बहु-उपकरणीय घटनाओं में से अत्यंत महत्वपूर्ण अवलोकन माना गया।
परीक्षा-योग्य महत्व
पहले समुद्रतल प्रसार का प्रमाण मुख्यतः—
- चुंबकीय धारियों,
- शैल आयु,
- ऊष्मा प्रवाह
से मिलता था।
2026 के अध्ययन ने वास्तविक प्रसार घटना को प्रत्यक्ष भू-मापन से दर्ज किया।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ
समुद्रतल प्रसार को सीधे नाम लेकर पूछने वाला हालिया प्रत्यक्ष CSE प्रारंभिक प्रश्न विश्वसनीय रूप से सत्यापित नहीं मिला।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ
भूगोल वैकल्पिक, 2008
समुद्रतल प्रसार सिद्धांत पर संक्षिप्त टिप्पणी पूछी गई।
भूगोल वैकल्पिक, 2013
अपतटीय ध्वनिक अध्ययन ने समुद्रतल प्रसार की अवधारणा के विकास में कैसे सहायता की—इस पर प्रश्न पूछा गया।
भूगोल वैकल्पिक, 2023
पुराचुंबकत्व और समुद्रतल प्रसार द्वारा महाद्वीप और महासागर की गतिशीलता सिद्ध करने को कहा गया।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ
69वीं प्रारंभिक परीक्षा, 2023
प्रश्न:
वह प्रक्रिया कौन-सी है जो लगातार नई पर्पटी जोड़ती है?
सही उत्तर:
समुद्रतल प्रसार।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य
समुद्रतल प्रसार अपसारी सीमाओं पर होता है।
नई महासागरीय पर्पटी मध्य-महासागरीय कटक पर बनती है।
कटक के पास सबसे युवा शैल।
दूर जाने पर आयु और अवसाद मोटाई बढ़ती है।
ऊष्मा प्रवाह कटक पर अधिक होता है।
चुंबकीय धारियाँ दोनों ओर लगभग सममित होती हैं।
निष्कर्ष
समुद्रतल प्रसार ने महासागर तल को स्थिर मंच से सक्रिय भूगतिक प्रणाली में बदल दिया। इस सिद्धांत ने वेगेनर के विचार को यांत्रिक आधार दिया और आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई।