1.4.5.1 निर्माण
शैल चक्र में निर्माण का अर्थ पृथ्वी के पदार्थों का ऐसी प्रक्रियाओं से गुजरना है जिनसे नई शैल उत्पन्न होती है। नई शैल मुख्यतः तीन मार्गों से बनती है—
- मैग्मा या लावा का ठंडना → आग्नेय शैल
- अवसाद का शैलन → अवसादी शैल
- पुरानी शैल का ताप-दाब से रूपांतरण → कायांतरित शैल
इसलिए शैल-निर्माण कोई एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पृथ्वी की आंतरिक और बाह्य शक्तियों की संयुक्त प्रणाली है।
आग्नेय शैल का निर्माण
आग्नेय शैल पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा से जुड़ी है।
मैग्मा निर्माण
मैंटल या पर्पटी की शैलें निम्न परिस्थितियों में आंशिक रूप से पिघल सकती हैं—
- दाब में कमी,
- ताप में वृद्धि,
- जल और अन्य वाष्पशील पदार्थों की उपस्थिति।
क्रिस्टलीकरण
मैग्मा ठंडने पर खनिज क्रमशः क्रिस्टलीकृत होते हैं।
यदि ठंडना—
धीमा हो → बड़े क्रिस्टल।
तेज हो → छोटे क्रिस्टल।
अत्यंत तेज हो → काँचीय बनावट।
अंतर्वेधी निर्माण
मैग्मा पर्पटी के भीतर ठंडता है।
उदाहरण—
- ग्रेनाइट,
- गैब्रो।
बहिर्वेधी निर्माण
लावा सतह पर ठंडता है।
उदाहरण—
- बेसाल्ट,
- रायोलाइट।
अवसादी शैल का निर्माण
अवसादी शैल बनने के लिए पुरानी शैल का सतह पर टूटना और पदार्थ का जमा होना आवश्यक है।
सामान्य क्रम—
अपक्षय → अपरदन → परिवहन → निक्षेपण → संघनन → सीमेंटेशन → शैल
अवसाद का स्रोत
अवसाद आ सकते हैं—
- पुरानी आग्नेय शैलों से,
- पुरानी अवसादी शैलों से,
- कायांतरित शैलों से,
- जैविक पदार्थ से,
- जल में घुले रासायनिक पदार्थों से।
शैलन
ढीले अवसाद का ठोस शैल में बदलना शैलन (Lithification) कहलाता है।
इसमें मुख्यतः—
- संघनन,
- सीमेंटेशन
शामिल होते हैं।
कायांतरित शैल का निर्माण
पहले से मौजूद शैल बिना पूर्ण पिघले ताप, दबाव, तनाव और सक्रिय द्रवों के प्रभाव से बदलती है।
उदाहरण—
चूना पत्थर → संगमरमर।
बलुआ पत्थर → क्वार्ट्जाइट।
शेल → स्लेट।
ग्रेनाइट → नीस।
शैल निर्माण और प्लेट विवर्तनिकी
अपसारी सीमा
मैंटल ऊपर उठता है।
दाब घटता है।
आंशिक पिघलाव होता है।
बेसाल्टिक मैग्मा बनता है।
नई महासागरीय पर्पटी बनती है।
अभिसारी सीमा
समुद्री प्लेट नीचे जाती है।
जल मुक्त होता है।
ऊपरी मैंटल का गलनांक घट सकता है।
मैग्मा बनता है और ज्वालामुखीय चाप विकसित होता है।
महाद्वीपीय टक्कर
पर्पटी मोटी होती है।
ताप-दाब बढ़ता है।
क्षेत्रीय कायांतरण होता है।
कभी उच्च श्रेणी पर आंशिक पिघलाव से ग्रेनाइटिक मैग्मा बन सकता है।
शैल निर्माण और समय
शैल निर्माण की गति बहुत भिन्न हो सकती है।
लावा प्रवाह कुछ दिनों से वर्षों में ठोस हो सकता है।
गहरे प्लूटोन का पूर्ण शीतलन लाखों वर्षों तक चल सकता है।
अवसादी बेसिन करोड़ों वर्षों तक पदार्थ जमा कर सकते हैं।
क्षेत्रीय कायांतरण पर्वतनिर्माण के करोड़ों वर्ष लंबे इतिहास का हिस्सा हो सकता है।
इसलिए शैल चक्र को मानव समयमान पर नहीं, भूवैज्ञानिक समयमान पर समझना चाहिए।
नई पर्पटी का निर्माण
आज भी मध्य-महासागरीय कटकों पर नई महासागरीय पर्पटी लगातार बन रही है।
यह पृथ्वी पर सक्रिय शैल निर्माण का सबसे स्पष्ट वैश्विक उदाहरण है।
पुरानी महासागरीय पर्पटी सबडक्शन क्षेत्रों में नष्ट या पुनर्चक्रित होती है।
महाद्वीपीय पर्पटी का निर्माण
महाद्वीपीय पर्पटी का विकास अधिक जटिल है।
इसमें—
- ज्वालामुखीय चाप,
- ग्रेनाइटिक मैग्मा,
- महाद्वीपीय टक्कर,
- पर्पटी पुनर्पिघलन,
- प्राचीन भूभागों का जुड़ाव
भूमिका निभाते हैं।
भारत में शैल निर्माण
दक्कन ट्रैप
विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाहों से निर्मित।
हिमालय
अवसादी, आग्नेय और कायांतरित शैलों की संयुक्त विवर्तनिक प्रणाली।
दक्षिण भारतीय प्राचीन भूभाग
अरबों वर्ष पुराने आग्नेय और कायांतरित शैल निर्माण की अनेक घटनाओं का अभिलेख।
गंगा मैदान
हिमालय से आए आधुनिक अवसादों का विशाल निक्षेप क्षेत्र, जो भविष्य के भूवैज्ञानिक समय में शैलन का भाग बन सकता है।
2025–2026 समसामयिक अद्यतन
2025–26 के भारतीय अध्ययनों ने शैल-निर्माण के अलग-अलग चरणों को आधुनिक तकनीकों से पुनर्निर्मित किया—
- दक्षिण भारतीय ग्रैनुलाइटों में प्राचीन कायांतरित निर्माण,
- विंध्य महासमूह में अवसादी बेसिन विकास,
- प्राचीन भारतीय भूभागों में आग्नेय अंतर्वेध और पुनर्सक्रियण,
- दक्कन बेसाल्ट में खनिजीय कार्बन स्थिरीकरण।
इससे स्पष्ट है कि “शैल निर्माण” केवल अतीत की घटना नहीं; पृथ्वी पर नई शैल आज भी बन रही है और पुरानी शैल लगातार बदल रही है।
सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ
UPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2001
मैग्मा के गुणों तथा मैग्माई अंत:स्थ निकाय से संबंधित प्रश्न पूछा गया था।
यह आग्नेय शैल निर्माण की मूल प्रक्रिया से सीधे संबंधित है।
सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ
इस व्यापक “शैल निर्माण” शीर्षक पर प्रत्यक्ष सामान्य अध्ययन प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।
सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ
70वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2024
प्रश्न:
लावा के ठंडने और ठोस होने से किस प्रकार की शैल बनती है?
सही उत्तर:
आग्नेय शैल।
यह शैल निर्माण की मूल प्रक्रिया पर प्रत्यक्ष प्रश्न है।
सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य
मैग्मा का ठंडना = आग्नेय शैल।
अवसाद का शैलन = अवसादी शैल।
ताप-दाब रूपांतरण = कायांतरित शैल।
पूर्ण पिघलाव कायांतरण नहीं, मैग्मा निर्माण है।
मध्य-महासागरीय कटक पर आज भी नई महासागरीय पर्पटी बनती है।
निष्कर्ष
शैल निर्माण पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा, सतही प्रक्रियाओं और प्लेट विवर्तनिकी का संयुक्त परिणाम है। नई आग्नेय, अवसादी और कायांतरित शैलों का निर्माण निरंतर चलता रहता है और यही शैल चक्र की सक्रियता का आधार है।