1.2.2.5 जीवन का विकास और सामूहिक विलुप्तियाँ

पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 अरब वर्ष है, लेकिन पृथ्वी बनने के साथ ही जीवन उत्पन्न नहीं हो गया था। प्रारंभिक पृथ्वी अत्यधिक गर्म, ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय और बार-बार खगोलीय पिंडों की टक्करों से प्रभावित थी। पृथ्वी के ठंडा होने, स्थायी पर्पटी और महासागरों के बनने तथा अनुकूल रासायनिक परिस्थितियों के विकसित होने के बाद जीवन का विकास संभव हुआ।

जीवन का इतिहास सीधी रेखा में लगातार जटिल होते जाने की कहानी नहीं है। पृथ्वी पर अनेक बार पर्यावरण में बड़े परिवर्तन हुए। कुछ जीव उन परिस्थितियों के अनुकूल हुए, कुछ नई प्रजातियों में विकसित हुए और अनेक पूरी तरह समाप्त हो गए।

इसीलिए विकास और विलुप्ति पृथ्वी के जैविक इतिहास की परस्पर जुड़ी प्रक्रियाएँ हैं।

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत

जीवन वास्तव में कब और कैसे उत्पन्न हुआ, इसका सटीक उत्तर अभी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर लगभग 3.5 अरब वर्ष पुराने निर्विवाद जीवाश्मीय प्रमाण उपलब्ध हैं, जबकि इससे भी पुराने संभावित जैविक संकेतों पर वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।

प्रारंभिक जीवन अत्यंत सरल था। ये मुख्यतः एककोशिकीय और केंद्रक-विहीन जीव थे, जिन्हें प्रोकैरियोटिक जीवों के रूप में समझा जाता है।

प्रारंभिक महासागर जीवन के विकास के लिए महत्वपूर्ण रहे, क्योंकि जल ने रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए माध्यम प्रदान किया और प्रारंभिक जीवों को कई बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षा दी।

स्ट्रोमैटोलाइट और प्रारंभिक जीवन

पृथ्वी के प्रारंभिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में स्ट्रोमैटोलाइट शामिल हैं। ये परतदार संरचनाएँ सूक्ष्मजीवी समुदायों द्वारा तलछट को बाँधने और जमा करने से बनती हैं। लगभग 3.5 अरब वर्ष पुराने स्ट्रोमैटोलाइट पृथ्वी के अत्यंत प्राचीन जीवन के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

प्रकाश संश्लेषण और सायनोबैक्टीरिया

सायनोबैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीव सूर्य के प्रकाश का उपयोग कर ऊर्जा प्राप्त करने लगे और इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन मुक्त हुई। प्रारंभ में मुक्त ऑक्सीजन समुद्र में उपस्थित लोहे जैसे तत्वों के साथ प्रतिक्रिया करती रही। इसके परिणामस्वरूप पट्टित लौह संरचनाएँ बनीं।

महान ऑक्सीकरण घटना

लगभग 2.4 अरब वर्ष पहले पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। इसे महान ऑक्सीकरण घटना कहा जाता है। ऑक्सीजन की वृद्धि ने अधिक दक्ष श्वसन, ओजोन निर्माण और जटिल जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों के विकास में भूमिका निभाई।

यूकैरियोटिक और बहुकोशिकीय जीवन

बाद में अधिक जटिल यूकैरियोटिक कोशिकाएँ विकसित हुईं। इनके बाद बहुकोशिकीय जीवों का विकास हुआ। प्रोटेरोजोइक के अंतिम भाग में एडियाकैरन जीव-जगत विकसित हुआ, जिसमें बड़े और मुलायम शरीर वाले बहुकोशिकीय जीव शामिल थे।

कैंब्रियन विस्फोट

लगभग 539 मिलियन वर्ष पहले जटिल पशु समूहों की विविधता तेजी से बढ़ी। इसे कैंब्रियन विस्फोट कहा जाता है। ट्राइलोबाइट इस समय के प्रसिद्ध जीवों में थे। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कैंब्रियन विस्फोट जीवन की उत्पत्ति नहीं था; जीवन इससे अरबों वर्ष पहले से पृथ्वी पर मौजूद था।

कशेरुकी, स्थलीय जीवन और सरीसृप

डेवोनियन काल में मछलियों का बड़ा विविधीकरण हुआ, इसलिए इसे मछलियों का युग कहा जाता है। जल से स्थल की ओर जीवन के विस्तार में प्रारंभिक चार-पाद वाले जीव और उभयचर महत्वपूर्ण रहे। कार्बोनिफेरस में अम्नियोटिक अंडे का विकास स्थलीय जीवन के लिए महत्वपूर्ण अनुकूलन था, जिसने आगे सरीसृपों और स्तनधारी पूर्वजों के विकास का मार्ग खोला।

डायनासोर, पक्षी और स्तनधारी

प्रारंभिक डायनासोर ट्रायसिक में विकसित हुए। जुरासिक और क्रिटेशियस में उनका प्रभुत्व रहा। आर्कियोप्टेरिक्स जुरासिक का प्रसिद्ध संक्रमण जीवाश्म है। क्रिटेशियस में पुष्पीय पौधों का तेजी से विस्तार हुआ। लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले क्रिटेशियस-अंत विलुप्ति के बाद गैर-पक्षी डायनासोर समाप्त हुए और स्तनधारियों का तीव्र विविधीकरण हुआ।

मानव-विकास

आधुनिक मानव होमो सेपियन्स के सबसे पुराने व्यापक रूप से स्वीकार्य प्रमाण लगभग 3 लाख वर्ष पहले अफ्रीका से जुड़े हैं। मानव पृथ्वी के 4.54 अरब वर्ष लंबे इतिहास में अत्यंत हाल का आगमन है।


सामूहिक विलुप्ति

जब किसी प्रजाति का अंतिम जीव समाप्त हो जाता है तो उसे विलुप्ति कहा जाता है। जब भूवैज्ञानिक दृष्टि से कम समय में विश्व की बहुत बड़ी संख्या में प्रजातियाँ समाप्त हो जाती हैं, तो इसे सामूहिक विलुप्ति कहा जाता है।

पाँच प्रमुख सामूहिक विलुप्तियाँ

सामूहिक विलुप्तिलगभग समयप्रमुख प्रभावप्रमुख कारण
ऑर्डोविशियन-अंत444 मिलियन वर्ष पूर्वसमुद्री जीवों की भारी क्षतिहिमाच्छादन, समुद्र तल परिवर्तन
उत्तर-डेवोनियनलगभग 372–359 मिलियन वर्ष पूर्वसमुद्री पारिस्थितिकी प्रभावितमहासागरीय ऑक्सीजन की कमी, जलवायु परिवर्तन
पर्मियन-अंतलगभग 252 मिलियन वर्ष पूर्वसबसे बड़ी ज्ञात सामूहिक विलुप्तिसाइबेरियन ट्रैप, तापवृद्धि, महासागरीय अनॉक्सिया
ट्रायसिक-अंतलगभग 201 मिलियन वर्ष पूर्वअनेक समुद्री और स्थलीय समूह समाप्तविशाल ज्वालामुखिता, CO₂ वृद्धि
क्रिटेशियस-अंत66 मिलियन वर्ष पूर्वगैर-पक्षी डायनासोर सहित अनेक जीव समाप्तचिक्सुलूब क्षुद्रग्रह प्रभाव, पर्यावरणीय दबाव

पर्मियन-अंत विलुप्ति

लगभग 252 मिलियन वर्ष पहले हुई पर्मियन-अंत विलुप्ति को पृथ्वी के इतिहास की सबसे बड़ी ज्ञात सामूहिक विलुप्ति माना जाता है। साइबेरियन ट्रैप ज्वालामुखीय गतिविधि, वैश्विक तापवृद्धि, महासागरीय ऑक्सीजन की कमी और अम्लीकरण इसके प्रमुख कारणों में माने जाते हैं।

क्रिटेशियस-अंत विलुप्ति

लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले मेक्सिको के युकातान क्षेत्र के निकट विशाल क्षुद्रग्रह के टकराने से चिक्सुलूब क्रेटर बना। इससे वैश्विक पर्यावरण और खाद्य श्रृंखलाएँ प्रभावित हुईं। गैर-पक्षी डायनासोर समाप्त हो गए। इसी व्यापक समय के आसपास भारत में दक्कन ट्रैप ज्वालामुखीय गतिविधि भी चल रही थी।

सामूहिक विलुप्ति और विकास का संबंध

सामूहिक विलुप्तियाँ जैव विविधता को भारी क्षति पहुँचाती हैं, लेकिन इनके बाद बचे हुए जीव समूहों को नए पारिस्थितिक अवसर भी मिलते हैं। क्रिटेशियस-अंत विलुप्ति के बाद स्तनधारियों का बड़ा विविधीकरण इसका प्रमुख उदाहरण है।


जीवन-विकास का परीक्षा-उपयोगी कालक्रम

घटनालगभग भूवैज्ञानिक समय
पृथ्वी का निर्माण4.54 अरब वर्ष पूर्व
प्रारंभिक निर्विवाद जीवन के प्रमाणलगभग 3.5 अरब वर्ष पूर्व
महान ऑक्सीकरण घटनालगभग 2.4 अरब वर्ष पूर्व
यूकैरियोटिक जीवनप्रोटेरोजोइक
बहुकोशिकीय जीवनप्रोटेरोजोइक उत्तरार्ध
एडियाकैरन जीव-जगत635–539 मिलियन वर्ष पूर्व
कैंब्रियन विस्फोटलगभग 539 मिलियन वर्ष पूर्व
मछलियों का बड़ा विविधीकरणडेवोनियन
प्रारंभिक सरीसृपकार्बोनिफेरस
सबसे बड़ी सामूहिक विलुप्तिपर्मियन-अंत
प्रारंभिक डायनासोर और स्तनधारीट्रायसिक
प्रारंभिक पक्षीजुरासिक
पुष्पीय पौधों का विस्तारक्रिटेशियस
गैर-पक्षी डायनासोरों का अंत66 मिलियन वर्ष पूर्व
स्तनधारियों का बड़ा विविधीकरणनवजीवी
आधुनिक मानवलगभग 3 लाख वर्ष पूर्व

समसामयिक अद्यतन

वर्तमान समय में मानव गतिविधियों के कारण आवास विनाश, अति-दोहन, आक्रामक प्रजातियाँ, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैव विविधता पर गंभीर दबाव डाल रहे हैं। 2026 में IUCN रेड लिस्ट में 175,909 प्रजातियों का आकलन दर्ज था और 49,505 प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे वाली श्रेणियों में थीं।

वर्तमान जैव विविधता संकट के लिए “छठी सामूहिक विलुप्ति” शब्द का व्यापक उपयोग होता है, लेकिन वैज्ञानिक साहित्य में इस बात पर पूर्ण सहमति नहीं है कि वर्तमान क्षति पिछले पाँच बड़े सामूहिक विलुप्ति स्तरों के समान भूवैज्ञानिक सीमा तक पहुँच चुकी है।

UPSC Mains में संतुलित भाषा होगी—

“वर्तमान मानवजनित जैव विविधता संकट को अनेक वैज्ञानिक छठी सामूहिक विलुप्ति की संभावित शुरुआत के रूप में वर्णित करते हैं, हालांकि इसके भूवैज्ञानिक वर्गीकरण और मात्रात्मक सीमा पर वैज्ञानिक बहस जारी है।”


सत्यापित UPSC पिछले वर्षों के प्रश्न

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 1998

एक मिलान प्रश्न में उत्परिवर्तन सिद्धांत, विकासवाद का सिद्धांत, एक जीन-एक एंजाइम परिकल्पना और ऑपेरॉन अवधारणा को संबंधित वैज्ञानिकों से मिलाने को कहा गया था। विकासवाद का संबंध डार्विन तथा उत्परिवर्तन सिद्धांत का संबंध ह्यूगो डी व्रीज़ से था।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2002

प्रश्न था—

“जैविक विकास के संदर्भ में साँपों में अंगों का लोप किस परिघटना द्वारा समझाया जाता है?”

पुरानी स्वीकृत कुंजी में उत्तर था—अंगों का उपयोग और अनुपयोग। यह प्रश्न लामार्क के ऐतिहासिक सिद्धांत के संदर्भ में था।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2009

प्रश्न था—

“जीवों के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम सही है?”

सही क्रम था—सैलामैंडर → पाइथन → कंगारू।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2014

प्रश्न था—

“निम्नलिखित में से कौन-सी घटनाएँ जीवों के विकास को प्रभावित कर सकती थीं?”

  1. महाद्वीपीय विस्थापन
  2. हिमानी चक्र

सही उत्तर—दोनों 1 और 2।


सत्यापित BPSC पिछले वर्षों के प्रश्न

39वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा, 1994

प्रश्न था—“जीव-विकास का मुख्य कारक है—”

स्वीकृत उत्तर—प्राकृतिक चयन।

40वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा, 1995

प्रश्न था—“वर्तमान प्रमाण के अनुसार पृथ्वी पर जीवन का उद्गम लगभग कब हुआ?”

पुरानी परीक्षा-कुंजी में उत्तर था—2 अरब वर्ष पूर्व।

लेकिन वर्तमान वैज्ञानिक साक्ष्य लगभग 3.5 अरब वर्ष पुराने निर्विवाद जीवन-प्रमाण दिखाते हैं। इसलिए पुराने PYQ के उत्तर को वर्तमान वैज्ञानिक तथ्य नहीं मानना चाहिए।

इसी 40वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा में पूछा गया—“आर्कियोप्टेरिक्स है—”

सही उत्तर था—जुरासिक युग का सर्वपुरातन पक्षी।


परीक्षा के लिए अंतिम तथ्य

निष्कर्ष

पृथ्वी पर जीवन का इतिहास अनुकूलन, विविधीकरण और विलुप्ति की लगातार चलती प्रक्रिया है। प्रारंभिक सूक्ष्मजीवों से लेकर जटिल बहुकोशिकीय जीवों, मछलियों, स्थलीय पौधों, उभयचरों, सरीसृपों, डायनासोरों, पक्षियों, स्तनधारियों और मनुष्य तक जीवन ने पृथ्वी के बदलते भौतिक पर्यावरण के साथ विकास किया। दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन, विशाल ज्वालामुखिता, महासागरीय परिवर्तन और क्षुद्रग्रह प्रभाव जैसी घटनाओं ने अनेक बार वैश्विक जैव विविधता को नाटकीय रूप से बदल दिया।