1.5.2.3 हैरी हेस का योगदान

आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी के विकास में अमेरिकी भूवैज्ञानिक हैरी हेस का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे उन वैज्ञानिकों में थे जिन्होंने महासागरीय तल को स्थिर न मानकर निरंतर बनने और फैलने वाली गतिशील संरचना के रूप में समझाया।

उनका सबसे प्रसिद्ध योगदान समुद्रतल प्रसार (Sea-Floor Spreading) की अवधारणा है।

वैज्ञानिक पृष्ठभूमि

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय और उसके बाद सोनार आधारित समुद्री सर्वेक्षणों से महासागर तल की बनावट के बारे में नई जानकारी मिली।

इन सर्वेक्षणों से पता चला कि समुद्र तल पर—

मौजूद हैं।

इससे महासागर तल को समतल और स्थिर मानने वाली पुरानी धारणा कमजोर हुई।

हेस का मूल प्रस्ताव

हेस ने 1960 के दशक के प्रारंभ में प्रस्तावित किया कि मध्य-महासागरीय कटकों पर मैंटल से गर्म पदार्थ ऊपर उठता है।

दाब कम होने पर आंशिक पिघलाव होता है।

बेसाल्टिक मैग्मा ऊपर आता है और ठंडकर नई महासागरीय पर्पटी बनाता है।

नई पर्पटी बनने से पुरानी पर्पटी दोनों ओर दूर खिसकती है।

इसी प्रक्रिया को समुद्रतल प्रसार कहा गया।

“भू-कविता” का विचार

हेस ने अपने प्रारंभिक विचार को विनम्रता से एक प्रकार की “भू-कविता” (Geopoetry) कहा था, क्योंकि उस समय उसके सभी प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।

बाद में चुंबकीय धारियों, महासागरीय पर्पटी की आयु और गहरे समुद्री ड्रिलिंग के प्रमाणों ने इस अवधारणा को मजबूत किया।

वेगेनर की समस्या का समाधान

वेगेनर ने महाद्वीपों की गति के प्रमाण तो दिए, पर यह नहीं बता सके कि वे कैसे चलते हैं।

हेस ने महासागरीय तल को गतिशील बताकर समस्या का नया समाधान प्रस्तुत किया।

अब महाद्वीपों को महासागरीय पर्पटी को चीरते हुए चलने की आवश्यकता नहीं थी।

पूरा स्थलमंडलीय प्लेट तंत्र गतिशील माना जा सकता था।

नया समुद्रतल कहाँ बनता है?

मध्य-महासागरीय कटक पर।

पुराना समुद्रतल कहाँ जाता है?

महासागरीय गर्त और सबडक्शन क्षेत्रों में पुरानी महासागरीय पर्पटी मैंटल में पुनर्चक्रित हो सकती है।

इससे पृथ्वी का आकार लगातार बढ़ने की समस्या भी हल होती है।

रॉबर्ट डिट्ज का योगदान

लगभग इसी काल में रॉबर्ट डिट्ज ने भी समुद्रतल प्रसार की अवधारणा विकसित और लोकप्रिय की।

इसलिए वैज्ञानिक इतिहास में केवल हेस नहीं, डिट्ज का योगदान भी उल्लेखनीय है।

चुंबकीय प्रमाणों से पुष्टि

1963 में वाइन, मैथ्यूज़ और स्वतंत्र रूप से मॉर्ली ने समुद्रतल की चुंबकीय धारियों को पृथ्वी के चुंबकीय उलटाव और समुद्रतल प्रसार से जोड़कर समझाया।

यह हेस की अवधारणा की निर्णायक पुष्टि बनी।

गहरे समुद्री ड्रिलिंग से पुष्टि

समुद्रतल की ड्रिलिंग से पाया गया—

यह वही पैटर्न था जिसकी समुद्रतल प्रसार सिद्धांत अपेक्षा करता था।

प्लेट विवर्तनिकी की ओर कदम

हेस का सिद्धांत अंतिम प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत नहीं था।

लेकिन उसने तीन महत्वपूर्ण बातें स्थापित कीं—

  1. महासागर तल गतिशील है।
  2. नई पर्पटी बनती है।
  3. पुरानी पर्पटी पुनर्चक्रित होती है।

इन आधारों पर 1960 के दशक में आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी विकसित हुई।

भारत और हिंद महासागर

हिंद महासागर की चुंबकीय विसंगतियाँ और प्रसार केंद्र भारतीय प्लेट के गोंडवानालैंड से अलग होने और उत्तर की ओर बढ़ने का समयक्रम समझने में महत्वपूर्ण हैं।

हेस की अवधारणा के बिना भारतीय प्लेट की उत्तरगामी यात्रा को आधुनिक भूभौतिकीय रूप से समझना संभव नहीं होता।

2026 का समसामयिक अद्यतन

2026 में दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर कटक पर समुद्रतल प्रसार की वास्तविक घटना को प्रत्यक्ष समुद्रतलीय उपकरणों से दर्ज किया गया।

26 अप्रैल 2024 से शुरू हुई घटना में कुछ दिनों में समुद्रतल कई मीटर अलग हुआ और बड़े पैमाने पर लावा निकला।

यह उस प्रक्रिया का प्रत्यक्ष आधुनिक अवलोकन है जिसकी संकल्पना हेस ने छह दशक से अधिक पहले प्रस्तुत की थी।

परीक्षा-योग्य मूल्यवर्धन

हेस ने समुद्रतल प्रसार का सिद्धांत दिया; चुंबकीय धारियों ने उसे मजबूत प्रमाण दिया; प्लेट विवर्तनिकी ने उसे व्यापक ढाँचे में समाहित किया।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

हैरी हेस को नाम लेकर पूछने वाला स्पष्ट प्रत्यक्ष हालिया प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न

भूगोल वैकल्पिक, 2008

समुद्रतल प्रसार सिद्धांत पर संक्षिप्त टिप्पणी पूछी गई थी।

भूगोल वैकल्पिक, 2013

समुद्री ध्वनिक अध्ययनों ने समुद्रतल प्रसार अवधारणा के विकास में किस प्रकार सहायता की—इस पर प्रश्न पूछा गया था।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

69वीं प्रारंभिक परीक्षा, 2023

प्रश्न:

वह प्रक्रिया कौन-सी है जो लगातार नई पर्पटी जोड़ती है?

सही उत्तर:

समुद्रतल प्रसार।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

हैरी हेस — समुद्रतल प्रसार।

रॉबर्ट डिट्ज — समान अवधारणा के महत्वपूर्ण सह-विकासकर्ता।

नई पर्पटी — मध्य-महासागरीय कटक पर।

पुरानी पर्पटी — सबडक्शन में पुनर्चक्रित।

चुंबकीय धारियाँ — बाद की निर्णायक पुष्टि।

निष्कर्ष

हैरी हेस ने महासागर तल को गतिशील प्रणाली के रूप में समझाकर भूविज्ञान में निर्णायक परिवर्तन किया। उनका समुद्रतल प्रसार सिद्धांत वेगेनर की महाद्वीपीय गति और आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी के बीच वैज्ञानिक सेतु बना।