1.6 भूकंप
पृथ्वी के भीतर शैलों में संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न कंपन और भूकंपीय तरंगों को भूकंप (Earthquake) कहा जाता है।
भूकंप पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता का सबसे प्रत्यक्ष अनुभव होने वाली प्राकृतिक घटना है।
अधिकांश बड़े भूकंप विवर्तनिक प्लेटों और सक्रिय भ्रंशों से जुड़े होते हैं।
भूकंप की मूल प्रक्रिया
प्लेट गति से शैलों पर तनाव बढ़ता है।
भ्रंश पर घर्षण के कारण शैल तुरंत नहीं खिसकती।
शैल कुछ सीमा तक प्रत्यास्थ रूप से विकृत होती है।
जब तनाव शैल की शक्ति से अधिक हो जाता है—
- भ्रंश अचानक खिसकता है,
- संचित ऊर्जा मुक्त होती है,
- भूकंपीय तरंगें फैलती हैं।
इसे प्रत्यास्थ पुनरागमन सिद्धांत (Elastic Rebound Theory) से समझाया जाता है।
भूकंप के प्रमुख शब्द
केंद्र
पृथ्वी के भीतर वह स्थान जहाँ से भ्रंश-टूटन और ऊर्जा-मुक्ति शुरू होती है।
इसे भूकंप केंद्र (Focus/Hypocentre) कहते हैं।
अधिकेंद्र
केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु।
इसे अधिकेंद्र (Epicentre) कहते हैं।
भ्रंश
शैल में ऐसी दरार या विच्छेदन जिसके दोनों ओर सापेक्ष विस्थापन हुआ हो।
परिमाण
भूकंप द्वारा मुक्त ऊर्जा अथवा भूकंपीय स्रोत के आकार का मात्रात्मक माप।
आधुनिक बड़े भूकंपों के लिए आघूर्ण परिमाण (Moment Magnitude, Mw) प्रमुख मानक है।
तीव्रता
किसी स्थान पर महसूस हुई कंपन और क्षति का स्तर।
यह स्थान-स्थान पर बदलता है।
भूकंपीय तरंगें
पी तरंग
सबसे तेज शरीर तरंग।
ठोस, द्रव और गैस से गुजर सकती है।
एस तरंग
कतरनी शरीर तरंग।
केवल ठोस माध्यम से गुजरती है।
सतही तरंगें
पृथ्वी की सतह के निकट चलती हैं।
आमतौर पर सबसे अधिक विनाशकारी कंपन उत्पन्न कर सकती हैं।
भूकंप की गहराई
सामान्य वर्गीकरण—
- उथला: 0–70 किमी,
- मध्यम: 70–300 किमी,
- गहरा: 300–700 किमी।
गहरे भूकंप मुख्यतः सबडक्शन क्षेत्रों में मिलते हैं।
भूकंप के मुख्य प्रकार
विवर्तनिक भूकंप
भ्रंश पर प्लेट तनाव से।
सबसे सामान्य और सबसे शक्तिशाली प्रकार।
ज्वालामुखीय भूकंप
मैग्मा और ज्वालामुखीय द्रव गति से जुड़े।
धँसाव भूकंप
भूमिगत गुहा या खान ढहने से स्थानीय छोटे भूकंप।
प्रेरित भूकंप
मानवीय गतिविधियों से तनाव/द्रव-दाब बदलने पर।
उदाहरण—
- बड़े जलाशय,
- गहरे द्रव इंजेक्शन,
- खनन।
वैश्विक वितरण
अधिकांश भूकंप निम्न पट्टियों में केंद्रित हैं—
प्रशांत परिधीय पट्टी
अग्नि वलय।
सबडक्शन और रूपांतर सीमाएँ।
भूमध्यसागरीय–हिमालयी पट्टी
अफ्रीका–अरब–यूरेशिया तथा भारत–एशिया अभिसरण से जुड़ी।
मध्य-महासागरीय कटक
उथले भूकंप।
भारत की भूकंपीयता
भारत की भूकंपीयता को मोटे तौर पर निम्न क्षेत्रों से समझें—
- हिमालय,
- उत्तर-पूर्व भारत,
- कच्छ,
- अंडमान–निकोबार,
- प्रायद्वीपीय अंतःप्लेट भ्रंश क्षेत्र।
हिमालय
भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट का सक्रिय अभिसरण।
देश का सबसे महत्वपूर्ण बड़े भूकंप जोखिम क्षेत्र।
उत्तर बिहार
हिमालयी अग्रभाग के निकट होने के कारण उच्च भूकंपीय जोखिम।
कच्छ
2001 भुज भूकंप का क्षेत्र।
यह प्लेट के आंतरिक भाग में शक्तिशाली भूकंप का उदाहरण है।
अंडमान–निकोबार
सक्रिय सबडक्शन और मेगाथ्रस्ट भूकंप।
भारत का भूकंपीय क्षेत्रीकरण
प्रचलित भारतीय मानक मानचित्र में देश को—
- क्षेत्र II,
- क्षेत्र III,
- क्षेत्र IV,
- क्षेत्र V
में बाँटा जाता है।
क्षेत्र V सर्वाधिक भूकंपीय जोखिम वाला और क्षेत्र II तुलनात्मक रूप से न्यूनतम है।
क्षेत्र V में broadly—
- पूर्वोत्तर भारत,
- हिमालय के कुछ भाग,
- कच्छ,
- उत्तर बिहार के कुछ भाग,
- अंडमान–निकोबार
शामिल हैं।
दिल्ली क्षेत्र IV में रखा जाता है।
परीक्षा-सावधानी
“क्षेत्र I” वर्तमान प्रचलित चार-क्षेत्र व्यवस्था में नहीं है।
भूकंप जोखिम बनाम भूकंप परिमाण
बड़ा परिमाण = हमेशा सबसे अधिक क्षति नहीं।
क्षति निर्भर करती है—
- अधिकेंद्र से दूरी,
- गहराई,
- स्थानीय मिट्टी,
- भवन गुणवत्ता,
- जनसंख्या घनत्व,
- दिन का समय,
- भूस्खलन/सुनामी जैसे द्वितीयक प्रभाव।
2025 दक्षिणी तिब्बत भूकंप
7 जनवरी 2025 को M7.1 दक्षिणी तिब्बती पठार भूकंप हुआ।
यह मुख्य हिमालयी टक्कर सीमा के उत्तर में उथले सामान्य भ्रंश से जुड़ा था।
यह बताता है कि हिमालय–तिब्बत टक्कर क्षेत्र में तनाव व्यवस्था जटिल है।
2025 म्यांमार भूकंप
28 मार्च 2025 को M7.7 मंडले, म्यांमार भूकंप सागाइंग भ्रंश पर आया।
2026 अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण अध्ययन ने लगभग 475 किमी लंबे सतही विच्छेद और कुछ हिस्सों में अतिशीघ्र भ्रंश-प्रसार की पुष्टि की।
यह विशाल स्ट्राइक-स्लिप भूकंप जोखिम का महत्वपूर्ण आधुनिक उदाहरण है।
बिहार का 2025 समसामयिक उदाहरण
17 फरवरी 2025 को सिवान, बिहार क्षेत्र में लगभग M4.0 भूकंप दर्ज किया गया।
यह विनाशकारी बड़ा भूकंप नहीं था, लेकिन BPSC के लिए राज्य में भूकंपीय निगरानी और हिमालयी निकटता की प्रासंगिकता समझने का समसामयिक उदाहरण है।
2026 भारत में निरंतर निगरानी
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र भारत और आसपास के क्षेत्र में वास्तविक समय भूकंप निगरानी करता है।
2026 में भी हिमालय, उत्तर-पूर्व, हिंद महासागर और प्रायद्वीपीय भारत में छोटे से मध्यम भूकंप नियमित रूप से दर्ज किए गए।
परीक्षा-योग्य संदेश
छोटे भूकंपों का बार-बार आना किसी बड़े भूकंप की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करता।
भूकंप की सटीक समय–स्थान–परिमाण भविष्यवाणी अभी वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय नहीं है।
भूकंप पूर्वानुमान और चेतावनी
भविष्यवाणी
सटीक दिन, स्थान और परिमाण पहले से बताना अभी संभव नहीं।
भूकंप प्रारंभिक चेतावनी
भूकंप शुरू होने के बाद तेज पी तरंग को पकड़कर अधिक विनाशकारी तरंगों के पहुँचने से कुछ सेकंड पहले चेतावनी दी जा सकती है।
यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि प्रारंभिक चेतावनी (Early Warning) है।
जोखिम न्यूनीकरण
- भूकंपरोधी भवन,
- भवन संहिता पालन,
- पुराने भवनों का सुदृढ़ीकरण,
- सूक्ष्म क्षेत्रीकरण,
- जन-जागरूकता,
- आपदा अभ्यास,
- जीवनरेखा अवसंरचना सुरक्षा।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ
UPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2023
प्रश्न में—
- पी तरंग एस तरंग से पहले दर्ज होती है।
- पी तरंग में कण तरंग दिशा के समानांतर तथा एस तरंग में लंबवत कंपन करते हैं।
दोनों कथन सही थे।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ
सामान्य अध्ययन-I, 2021
भारत की भूकंप-संबंधी आपदा संवेदनशीलता तथा पिछले तीन दशकों की प्रमुख भूकंप आपदाओं की विशेषताओं पर प्रश्न पूछा गया।
भूगोल वैकल्पिक, 2014
भूकंप की तीव्रता और परिमाण में अंतर तथा भारत के अलग क्षेत्रों में उनके प्रभाव की व्याख्या पूछी गई।
भूगोल वैकल्पिक, 2013
भारत के भूकंप-प्रवण क्षेत्रों की पहचान और प्रबंधन रणनीति पर प्रश्न पूछा गया।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ
इस व्यापक विषय पर स्पष्ट वर्ष-सहित प्रत्यक्ष BPSC CCE प्रश्न का विश्वसनीय सत्यापन नहीं मिला।
अतः कोई अनुमानित प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य
भूकंप = ऊर्जा का अचानक मुक्त होना।
केंद्र अंदर, अधिकेंद्र सतह पर।
आघूर्ण परिमाण बड़े भूकंपों का आधुनिक मानक।
तीव्रता स्थान-विशिष्ट है।
पी तरंग सबसे तेज।
एस तरंग द्रव से नहीं गुजरती।
भारत में क्षेत्र V सर्वाधिक जोखिम वाला।
भूकंप की सटीक भविष्यवाणी अभी संभव नहीं।
निष्कर्ष
भूकंप प्लेट विवर्तनिकी, भ्रंश गतिकी और पृथ्वी के आंतरिक तनाव का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। भूकंप को रोकना संभव नहीं, लेकिन वैज्ञानिक क्षेत्रीकरण, भूकंपरोधी निर्माण और प्रभावी तैयारी से आपदा को बड़े पैमाने पर कम किया जा सकता है।