1. भारत में आर्थिक नियोजन का इतिहास एवं विकास (History of Economic Planning in India)
स्वतंत्रता पूर्व एवं स्वतंत्रता के पश्चात भारत में आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करने के लिए विभिन्न नियोजन मॉडलों की आधारशिला रखी गई।
1.1 स्वतंत्रता पूर्व के प्रमुख नियोजन प्रयास
| वर्ष | योजना / प्रस्ताव | प्रणेता / आयोजक | मुख्य विशेषताएँ एवं उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| 1934 | भारत के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था (Planned Economy for India) | सर एम. विश्वेश्वरैया | भारत में राज्य-संचालित औद्योगिक नियोजन की पहली रूपरेखा पेश की गई। |
| 1938 | राष्ट्रीय नियोजन समिति (NPC) | सुभाष चंद्र बोस (अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू) | बुनियादी उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण तथा भारी औद्योगीकरण की सिफारिश। |
| 1944 | बॉम्बे प्लान (Bombay Plan) | 8 प्रमुख उद्योगपति (जी.डी. बिड़ला, जे.आर.डी. टाटा आदि) | 15 वर्षों में राष्ट्रीय आय को तिगुना करने और तीव्र औद्योगीकरण हेतु राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन। |
| 1944 | गांधीवादी योजना (Gandhian Plan) | श्रीमन नारायण अग्रवाल | कुटीर उद्योगों, कृषि, ग्रामीण विकास और विकेंद्रीकृत आर्थिक संरचना पर बल। |
| 1945 | जनता योजना (People's Plan) | एम. एन. राय | कृषि एवं उपभोग्य वस्तुओं के उत्पादन तथा राज्य के स्वामित्व वाली अर्थव्यवस्था पर केंद्रित। |
| 1950 | सर्वोदय योजना (Sarvodaya Plan) | जयप्रकाश नारायण | महात्मा गांधी व विनोबा भावे के विचारों पर आधारित; कृषि, भूमि सुधार तथा अहिंसक विकेंद्रीकरण पर बल। |
2. योजना आयोग बनाम नीति आयोग (Planning Commission vs NITI Aayog)
15 मार्च 1950 को गठित योजना आयोग (Planning Commission) को 1 जनवरी 2015 को एक कार्यपालक आदेश द्वारा भंग कर नीति आयोग (National Institution for Transforming India - NITI Aayog) की स्थापना की गई।
2.1 योजना आयोग बनाम नीति आयोग: विस्तृत तुलनात्मक ढाँचा
| तुलनात्मक बिंदु | योजना आयोग (Planning Commission) | नीति आयोग (NITI Aayog) |
|---|---|---|
| प्रकृति (Nature) | सलाहकार संस्था, जो केंद्र द्वारा नियंत्रित संसाधनों का आवंटन भी करती थी। | थिंक टैंक (Think Tank) — नीतिगत एवं तकनीकी सलाह देने वाली गैर-आवंटन संस्था। |
| दृष्टिकोण (Approach) | Top-Down Approach (ऊपर से नीचे): नीतियाँ केंद्र में बनती थीं और राज्यों पर थोपी जाती थीं। | Bottom-Up Approach (नीचे से ऊपर): ग्राम स्तर से योजनाएँ बनाकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना। |
| संसाधन आवंटन (Resource Allocation) | मंत्रालयों और राज्य सरकारों को धन/अनुदान आवंटित करने की शक्ति थी। | धन आवंटित करने की कोई शक्ति नहीं (यह कार्य वित्त मंत्रालय के अधीन है)। |
| राज्यों की भूमिका (Role of States) | राज्यों की भूमिका सीमित थी; वे मुख्य रूप से धन प्राप्तकर्ता थे। | राज्य 'राष्ट्रीय विकास एजेंडा' तय करने में समान भागीदार हैं (सहकारी संघवाद)। |
| शासी परिषद (Governing Council) | राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) अलग थी, जिसमें मुख्यमंत्री शामिल होते थे। | गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री व UTs के उप-राज्यपाल शामिल हैं। |
| विशेषज्ञता (Expertise) | पारंपरिक प्रशासनिक अधिकारियों (Bureaucrats) का प्रभुत्व। | विषय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और डोमेन विशेषज्ञों (Lateral Entry) को प्राथमिकता। |
[ दृष्टिकोण की तुलना (Approach Comparison) ] योजना आयोग (Top-Down): केंद्र (Center/Planning Commission) ──► नीतियाँ/आबंटन ──► राज्य (States) ──► ग्रामीण स्तर नीति आयोग (Bottom-Up): ग्राम/स्थानीय स्तर ──► राज्य (States) ──► नीति आयोग (Cooperative Federalism) ──► राष्ट्रीय नीति
3. नीति आयोग: संरचना, कार्यप्रणाली एवं सूचकांक
3.1 संगठनात्मक संरचना (Organizational Structure)
3.2 संघवाद का नया आयाम: सहकारी बनाम प्रतिस्पर्धी संघवाद
3.3 नीति आयोग द्वारा जारी प्रमुख सूचकांक (Key Indices)
3.4 रणनीति दस्तावेज (Planning Horizon)
नीति आयोग ने पुरानी 5-वर्षीय योजनाओं के स्थान पर तीन-स्तरीय रणनीति ढाँचा अपनाया:
┌────────────────────────────────────────────────────────┐ │ 15-वर्षीय दीर्घावधि विजन (15-Year Vision Document) │ ├────────────────────────────────────────────────────────┤ │ └─► 7-वर्षीय मध्यम-अवधि रणनीति (7-Year Strategy) │ ├────────────────────────────────────────────────────────┤ │ └─► 3-वर्षीय अल्पकालिक कार्य एजेंडा (Action Agenda)│ └────────────────────────────────────────────────────────┘
4. 1991 के आर्थिक सुधार: LPG मॉडल (Liberalization, Privatization & Globalization)
1991 में भारत को स्वतंत्रता के पश्चात के सबसे गंभीर भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments Crisis) का सामना करना पड़ा।
4.1 1991 संकट के कारण (Background & Causes)
4.2 LPG सुधारों के तीन मुख्य स्तंभ
तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा राव-मनमोहन मॉडल प्रस्तुत किया गया।
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│ 1991 के LPG सुधार │
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उदारीकरण निजीकरण वैश्वीकरण
(Liberalization) (Privatization) (Globalization)
• डी-लाइसेंसिंग • PSU विनिवेश • रुपया परिवर्तनीयता
• MRTP सीमा समाप्त • निजी क्षेत्र प्रवेश • FDI/FPI सीमा में वृद्धि
• आयात शुल्क में कमी • रणनीतिक बिक्री • वैश्विक बाजार से जुड़ाव
A. उदारीकरण (Liberalization - नियंत्रणों से मुक्ति)
B. निजीकरण (Privatization - निजी क्षेत्र का विस्तार)
C. वैश्वीकरण (Globalization - वैश्विक एकीकरण)
4.3 सुधारों की पहली पीढ़ी बनाम दूसरी पीढ़ी (1st vs 2nd Generation Reforms)
| मापदंड | पहली पीढ़ी के सुधार (1991 - 2000) | दूसरी पीढ़ी के सुधार (2000 के बाद से वर्तमान) |
|---|---|---|
| मुख्य ध्यान | संकट प्रबंधन, समष्टि आर्थिक स्थिरता, उदारीकरण की शुरुआत। | संरचनात्मक सुधार, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, बाजार दक्षता। |
| क्षेत्रक (Sectors) | बाहरी क्षेत्र (BoP), औद्योगिक लाइसेंसिंग, कर दरें, वित्तीय उदारीकरण। | श्रम कानून सुधार, कृषि बाजार (e-NAM), कर सुधार (GST), दिवाला कानून (IBC 2016)। |
| सुशासन व तकनीक | भौतिक बाधाओं को हटाना। | डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), फेसलेस टैक्स एसेसमेंट। |
4.4 LPG सुधारों का विस्तृत प्रभाव: सकारात्मक बनाम नकारात्मक विश्लेषण
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│ 1991 सुधारों का बहुआयामी प्रभाव │
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सकारात्मक प्रभाव नकारात्मक / चुनौतियाँ
• GDP वृद्धि दर 8%+ पहुँची • कृषि क्षेत्र की उपेक्षा
• मुद्रा भंडार में भारी वृद्धि ($600B+) • क्षेत्रीय व सामाजिक असमानता
• सेवा क्षेत्र (IT/ITeS) में क्रांति • समयपूर्व विऔद्योगीकरण (Premature Deind.)
• उपभोक्ता को गुणवत्ता व विकल्प • रोजगारविहीन संवृद्धि (Jobless Growth)
1.2 बिलियन से बढ़कर विदेशी मुद्रा भंडार 600 बिलियन के पार पहुँचा।5. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (UPSC Special Module)
5.1 प्रीलिम्स हेतु त्वरित पुनरीक्षण बिंदु (Quick Revision Points)
5.2 अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice MCQs)
प्रश्न 1. योजना आयोग और नीति आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि नीति आयोग के पास वित्तीय/संसाधन आवंटन की कोई शक्ति नहीं है (यह वित्त मंत्रालय करता है), जबकि योजना आयोग के पास यह शक्ति थी। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं।
5.3 मेन्स उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Blueprint)
प्रश्न: "योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना केवल संस्थागत नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भारत के आर्थिक दर्शन में एक विकेंद्रीकृत और सहकारी संघवाद की ओर बदलाव को दर्शाती है।" परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
[ मेन्स उत्तर ढाँचा (Mains Answer Blueprint) ]
1. भूमिका (Introduction - 30 शब्द):
• 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग के गठन का संदर्भ दें।
• स्पष्ट करें कि यह कमांड इकोनॉमी से सहकारी संघवाद व थिंक टैंक मॉडल की ओर बदलाव है।
2. मुख्य भाग (Body Paragraphs - 170 शब्द):
• Top-Down बनाम Bottom-Up का तुलनात्मक विश्लेषण:
- योजना आयोग: "One Size Fits All" - एक ही योजना सभी राज्यों पर लागू की जाती थी।
- नीति आयोग: राज्यों की क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियाँ (State-specific strategies)।
• वित्तीय आवंटन शक्ति का पृथक्करण:
- नीति आयोग को निष्पक्ष थिंक-टैंक बनाया गया; पक्षपातपूर्ण धन आबंटन का आरोप समाप्त हुआ।
• सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद:
- गवर्निंग काउंसिल में राज्यों की प्रत्यक्ष भागीदारी।
- सूचकांकों (SDG Index, EPI) के जरिए राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा।
3. चुनौतियाँ / आलोचनात्मक पहलू (30 शब्द):
• वित्तीय शक्तियों के अभाव में सिफारिशों की बाध्यकारिता कम होना।
• केवल सलाहकारी निकाय बनने का जोखिम।
4. निष्कर्ष (Conclusion - 20 शब्द):
• संक्षेप में लिखें कि नीति आयोग भारत को 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की ओर ले जाने में 'टीम इंडिया' के उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर रहा है।