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नीति आयोग, आर्थिक नियोजन एवं 1991 के सुधार

NITI Aayog, Economic Planning & 1991 Reforms

भारत में आर्थिक नियोजन, योजना आयोग और नीति आयोग की तुलना, नीति आयोग की संरचना तथा 1991 के उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण सुधारों का अध्यायवार अध्ययन।

आर्थिक नियोजननीति आयोग1991 सुधारLPG
इस अध्याय में
1. भारत में आर्थिक नियोजन का इतिहास एवं विकास (History of Economic Planning in India)2. योजना आयोग बनाम नीति आयोग (Planning Commission vs NITI Aayog)3. नीति आयोग: संरचना, कार्यप्रणाली एवं सूचकांक4. 1991 के आर्थिक सुधार: LPG मॉडल (Liberalization, Privatization & Globalization)5. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (UPSC Special Module)

1. भारत में आर्थिक नियोजन का इतिहास एवं विकास (History of Economic Planning in India)

स्वतंत्रता पूर्व एवं स्वतंत्रता के पश्चात भारत में आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करने के लिए विभिन्न नियोजन मॉडलों की आधारशिला रखी गई।

1.1 स्वतंत्रता पूर्व के प्रमुख नियोजन प्रयास

वर्षयोजना / प्रस्तावप्रणेता / आयोजकमुख्य विशेषताएँ एवं उद्देश्य
1934भारत के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था (Planned Economy for India)सर एम. विश्वेश्वरैयाभारत में राज्य-संचालित औद्योगिक नियोजन की पहली रूपरेखा पेश की गई।
1938राष्ट्रीय नियोजन समिति (NPC)सुभाष चंद्र बोस (अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू)बुनियादी उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण तथा भारी औद्योगीकरण की सिफारिश।
1944बॉम्बे प्लान (Bombay Plan)8 प्रमुख उद्योगपति (जी.डी. बिड़ला, जे.आर.डी. टाटा आदि)15 वर्षों में राष्ट्रीय आय को तिगुना करने और तीव्र औद्योगीकरण हेतु राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन।
1944गांधीवादी योजना (Gandhian Plan)श्रीमन नारायण अग्रवालकुटीर उद्योगों, कृषि, ग्रामीण विकास और विकेंद्रीकृत आर्थिक संरचना पर बल।
1945जनता योजना (People's Plan)एम. एन. रायकृषि एवं उपभोग्य वस्तुओं के उत्पादन तथा राज्य के स्वामित्व वाली अर्थव्यवस्था पर केंद्रित।
1950सर्वोदय योजना (Sarvodaya Plan)जयप्रकाश नारायणमहात्मा गांधी व विनोबा भावे के विचारों पर आधारित; कृषि, भूमि सुधार तथा अहिंसक विकेंद्रीकरण पर बल।

2. योजना आयोग बनाम नीति आयोग (Planning Commission vs NITI Aayog)

15 मार्च 1950 को गठित योजना आयोग (Planning Commission) को 1 जनवरी 2015 को एक कार्यपालक आदेश द्वारा भंग कर नीति आयोग (National Institution for Transforming India - NITI Aayog) की स्थापना की गई।

2.1 योजना आयोग बनाम नीति आयोग: विस्तृत तुलनात्मक ढाँचा

तुलनात्मक बिंदुयोजना आयोग (Planning Commission)नीति आयोग (NITI Aayog)
प्रकृति (Nature)सलाहकार संस्था, जो केंद्र द्वारा नियंत्रित संसाधनों का आवंटन भी करती थी।थिंक टैंक (Think Tank) — नीतिगत एवं तकनीकी सलाह देने वाली गैर-आवंटन संस्था।
दृष्टिकोण (Approach)Top-Down Approach (ऊपर से नीचे): नीतियाँ केंद्र में बनती थीं और राज्यों पर थोपी जाती थीं।Bottom-Up Approach (नीचे से ऊपर): ग्राम स्तर से योजनाएँ बनाकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना।
संसाधन आवंटन (Resource Allocation)मंत्रालयों और राज्य सरकारों को धन/अनुदान आवंटित करने की शक्ति थी।धन आवंटित करने की कोई शक्ति नहीं (यह कार्य वित्त मंत्रालय के अधीन है)।
राज्यों की भूमिका (Role of States)राज्यों की भूमिका सीमित थी; वे मुख्य रूप से धन प्राप्तकर्ता थे।राज्य 'राष्ट्रीय विकास एजेंडा' तय करने में समान भागीदार हैं (सहकारी संघवाद)।
शासी परिषद (Governing Council)राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) अलग थी, जिसमें मुख्यमंत्री शामिल होते थे।गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री व UTs के उप-राज्यपाल शामिल हैं।
विशेषज्ञता (Expertise)पारंपरिक प्रशासनिक अधिकारियों (Bureaucrats) का प्रभुत्व।विषय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और डोमेन विशेषज्ञों (Lateral Entry) को प्राथमिकता।
[ दृष्टिकोण की तुलना (Approach Comparison) ]

योजना आयोग (Top-Down):
केंद्र (Center/Planning Commission) ──► नीतियाँ/आबंटन ──► राज्य (States) ──► ग्रामीण स्तर

नीति आयोग (Bottom-Up):
ग्राम/स्थानीय स्तर ──► राज्य (States) ──► नीति आयोग (Cooperative Federalism) ──► राष्ट्रीय नीति

3. नीति आयोग: संरचना, कार्यप्रणाली एवं सूचकांक

3.1 संगठनात्मक संरचना (Organizational Structure)

अध्यक्ष (Chairperson): भारत के प्रधानमंत्री।
उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson): प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त (कैबिनेट मंत्री का दर्जा)।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त निश्चित कार्यकाल हेतु (भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी)।
शासी परिषद (Governing Council): सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों (UTs) के उप-राज्यपाल।
क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils): विशिष्ट अंतर-राज्यीय मुद्दों के समाधान हेतु निश्चित समयावधि के लिए गठित।
पदेन सदस्य (Ex-officio Members): केंद्रीय मंत्रिमंडल से अधिकतम 4 मंत्री।
विशेष आमंत्रित (Special Invitees): प्रधानमंत्री द्वारा नामित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ।

3.2 संघवाद का नया आयाम: सहकारी बनाम प्रतिस्पर्धी संघवाद

1.
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism):
'टीम इंडिया' (Team India) की भावना से केंद्र और राज्यों को एक मंच पर लाना।
राज्यों की समस्याओं के समाधान हेतु 'राज्य सहायता सेल' (State Support Wing) की स्थापना।
2.
प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism):
राज्यों के मध्य विकास, निवेश और सुशासन हेतु स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।
पारदर्शी सूचकांकों के माध्यम से राज्यों की रैंकिंग जारी करना।

3.3 नीति आयोग द्वारा जारी प्रमुख सूचकांक (Key Indices)

SDG इंडिया इंडेक्स (SDG India Index): सतत विकास लक्ष्यों (17 SDGs) की प्राप्ति में राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन।
निर्यात तत्परता सूचकांक (Export Preparedness Index - EPI): राज्यों की निर्यात क्षमताओं, तटीय व भूमि से घिरे राज्यों की अवसंरचना का मापन।
राज्य ऊर्जा और जलवायु सूचकांक (State Energy & Climate Index - SECI): स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु प्रतिबद्धताओं का आकलन।
इंडिया इनोवेशन इंडेक्स (India Innovation Index): राज्यों में अनुसंधान, विकास व नवाचार पारिस्थिकी तंत्र का मापन।

3.4 रणनीति दस्तावेज (Planning Horizon)

नीति आयोग ने पुरानी 5-वर्षीय योजनाओं के स्थान पर तीन-स्तरीय रणनीति ढाँचा अपनाया:

┌────────────────────────────────────────────────────────┐
│ 15-वर्षीय दीर्घावधि विजन (15-Year Vision Document)      │
├────────────────────────────────────────────────────────┤
│  └─► 7-वर्षीय मध्यम-अवधि रणनीति (7-Year Strategy)     │
├────────────────────────────────────────────────────────┤
│      └─► 3-वर्षीय अल्पकालिक कार्य एजेंडा (Action Agenda)│
└────────────────────────────────────────────────────────┘

4. 1991 के आर्थिक सुधार: LPG मॉडल (Liberalization, Privatization & Globalization)

1991 में भारत को स्वतंत्रता के पश्चात के सबसे गंभीर भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments Crisis) का सामना करना पड़ा।

4.1 1991 संकट के कारण (Background & Causes)

1.
राजकोषीय कुप्रबंधन (Fiscal Indiscipline): 1980 के दशक में अत्यधिक सरकारी व्यय के कारण राजकोषीय घाटा GDP के 8.4% तक पहुँच गया।
2.
खाड़ी युद्ध (Gulf War - 1990-91): कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और खाड़ी देशों से आने वाले प्रेषित धन (Remittances) में भारी गिरावट दर्ज की गई।
3.
मुद्रास्फीति (High Inflation): मुद्रास्फीति दर बढ़कर 12-13% से अधिक हो गई।
4.
विदेशी मुद्रा भंडार का न्यूनतम स्तर: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर मात्र $1.2 बिलियन (~2 सप्ताह के आयात हेतु पर्याप्त) रह गया।
5.
ऋण संकट (Debt Crisis): भारत अंतर्राष्ट्रीय ऋण भुगतान में चूक (Default) की कगार पर था। बैंक ऑफ इंग्लैंड में सोना गिरवी रखकर ऋण लेना पड़ा।

4.2 LPG सुधारों के तीन मुख्य स्तंभ

तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा राव-मनमोहन मॉडल प्रस्तुत किया गया।

                  ┌────────────────────────┐
                  │   1991 के LPG सुधार    │
                  └───────────┬────────────┘
         ┌────────────────────┼────────────────────┐
         ▼                    ▼                    ▼
   उदारीकरण              निजीकरण               वैश्वीकरण
(Liberalization)      (Privatization)       (Globalization)
  • डी-लाइसेंसिंग       • PSU विनिवेश          • रुपया परिवर्तनीयता
  • MRTP सीमा समाप्त     • निजी क्षेत्र प्रवेश     • FDI/FPI सीमा में वृद्धि
  • आयात शुल्क में कमी   • रणनीतिक बिक्री        • वैश्विक बाजार से जुड़ाव

A. उदारीकरण (Liberalization - नियंत्रणों से मुक्ति)

औद्योगिक डी-लाइसेंसिंग: केवल 18 उद्योगों (वर्तमान में मात्र 5 - जैसे रक्षा उपकरण, औद्योगिक विस्फोटक, खतरनाक रसायन आदि) को छोड़कर लाइसेंस राज समाप्त।
MRTP अधिनियम में संशोधन: एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार (MRTP) अधिनियम के तहत पूँजी निवेश सीमा की शर्त समाप्त की गई (बाद में प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 लाया गया)।
वित्तीय क्षेत्र सुधार: बैंक दरों पर नियंत्रण हटाया गया, निजी व विदेशी बैंकों को प्रवेश की अनुमति दी गई, और RBI की भूमिका 'नियंत्रक' से घटाकर 'सुविधाप्रदाता' (Facilitator) बनाई गई।
व्यापार नीति सुधार: आयात शुल्क (Customs Tariff) में भारी कटौती की गई (200% से घटाकर 150% और कालांतर में और कम)। आयात कोटा एवं लाइसेंसिंग समाप्त।

B. निजीकरण (Privatization - निजी क्षेत्र का विस्तार)

सार्वजनिक क्षेत्र का अनारक्षण (Dereservation): सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या 17 से घटाकर 8 और फिर 2 (परमाणु ऊर्जा और रेलवे परिचालन) कर दी गई।
विनिवेश (Disinvestment): सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में सरकारी शेयर बेचे गए।
रणनीतिक बिक्री (Strategic Sale): प्रबंधन नियंत्रण के साथ PSUs का निजीकरण (उदा. मारुति उद्योग, भारत एल्युमीनियम)।

C. वैश्वीकरण (Globalization - वैश्विक एकीकरण)

विदेशी निवेश का उदारीकरण: स्वतः स्वीकृत मार्ग (Automatic Route) के तहत 51% तक FDI की अनुमति दी गई। FPI/FII को भारतीय शेयर बाजार में निवेश की अनुमति।
रुपया अवमूल्यन व परिवर्तनीयता: जुलाई 1991 में रुपये का 18-20% अवमूल्यन किया गया। 1994 में चालू खाते पर रुपये को पूर्ण परिवर्तनीय (Current Account Convertibility) बनाया गया।
सीमा शुल्क का उदारीकरण: WTO मानकों के अनुरूप व्यापारिक बाधाओं को दूर किया गया।

4.3 सुधारों की पहली पीढ़ी बनाम दूसरी पीढ़ी (1st vs 2nd Generation Reforms)

मापदंडपहली पीढ़ी के सुधार (1991 - 2000)दूसरी पीढ़ी के सुधार (2000 के बाद से वर्तमान)
मुख्य ध्यानसंकट प्रबंधन, समष्टि आर्थिक स्थिरता, उदारीकरण की शुरुआत।संरचनात्मक सुधार, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, बाजार दक्षता।
क्षेत्रक (Sectors)बाहरी क्षेत्र (BoP), औद्योगिक लाइसेंसिंग, कर दरें, वित्तीय उदारीकरण।श्रम कानून सुधार, कृषि बाजार (e-NAM), कर सुधार (GST), दिवाला कानून (IBC 2016)।
सुशासन व तकनीकभौतिक बाधाओं को हटाना।डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), फेसलेस टैक्स एसेसमेंट।

4.4 LPG सुधारों का विस्तृत प्रभाव: सकारात्मक बनाम नकारात्मक विश्लेषण

                  ┌─────────────────────────────────┐
                  │ 1991 सुधारों का बहुआयामी प्रभाव │
                  └────────────────┬────────────────┘
         ┌─────────────────────────┴─────────────────────────┐
         ▼                                                   ▼
   सकारात्मक प्रभाव                                   नकारात्मक / चुनौतियाँ
  • GDP वृद्धि दर 8%+ पहुँची                           • कृषि क्षेत्र की उपेक्षा
  • मुद्रा भंडार में भारी वृद्धि ($600B+)             • क्षेत्रीय व सामाजिक असमानता
  • सेवा क्षेत्र (IT/ITeS) में क्रांति               • समयपूर्व विऔद्योगीकरण (Premature Deind.)
  • उपभोक्ता को गुणवत्ता व विकल्प                   • रोजगारविहीन संवृद्धि (Jobless Growth)
1.
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impacts):
उच्च जीडीपी संवृद्धि दर: भारत की वृद्धि दर 'हिंदू संवृद्धि दर' (~3.5%) से निकलकर 8-9% तक पहुँची।
विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक वृद्धि: 1991 के 1.2 बिलियन से बढ़कर विदेशी मुद्रा भंडार 600 बिलियन के पार पहुँचा।
सेवा क्रांति (Services Boom): IT, BPO, वित्तीय सेवाओं में भारत वैश्विक लीडर बना।
प्रतिस्पर्धा व उपभोक्ता लाभ: इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल व टेलीकॉम में गुणवत्ता बढ़ी और कीमतें घटीं।
2.
नकारात्मक प्रभाव एवं सीमाएँ (Negative Impacts & Limitations):
कृषि क्षेत्र की उपेक्षा: सुधारों का ध्यान मुख्य रूप से उद्योग व सेवाओं पर रहा; कृषि में सार्वजनिक निवेश घट गया।
बढ़ती असमानता (Rising Inequality): शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों तथा अमीर-गरीब के बीच खाई चौड़ी हुई।
रोजगारविहीन संवृद्धि (Jobless Growth): सेवा-संचालित विकास होने के कारण कम-कौशल वाले श्रमिकों के लिए पर्याप्त रोजगार सृजित नहीं हो सके।

5. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (UPSC Special Module)

5.1 प्रीलिम्स हेतु त्वरित पुनरीक्षण बिंदु (Quick Revision Points)

1.
बॉम्बे प्लान (1944) 8 उद्योगपतियों द्वारा तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्य के हस्तक्षेप से 15 वर्षों में राष्ट्रीय आय तिगुनी करना था।
2.
योजना आयोग (1950) एक गैर-संवैधानिक व गैर-सांविधिक (Non-constitutional & Non-statutory) संस्था थी, जिसे केंद्रीय कैबिनेट के प्रस्ताव द्वारा गठित किया गया था।
3.
नीति आयोग में गवर्निंग काउंसिल सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं।
4.
1991 के सुधारों के समय पी. वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री तथा डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे।
5.
1991 में औद्योगिक लाइसेंसिंग को समाप्त कर दिया गया था; वर्तमान में केवल 5 उद्योगों के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग की आवश्यकता है।

5.2 अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice MCQs)

प्रश्न 1. योजना आयोग और नीति आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.
योजना आयोग की तुलना में नीति आयोग के पास वित्तीय आवंटन की प्रत्यक्ष शक्तियाँ उपलब्ध हैं।
2.
नीति आयोग 'नीचे से ऊपर' (Bottom-Up) दृष्टिकोण पर आधारित है, जबकि योजना आयोग 'ऊपर से नीचे' (Top-Down) दृष्टिकोण पर कार्य करता था।
3.
नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि नीति आयोग के पास वित्तीय/संसाधन आवंटन की कोई शक्ति नहीं है (यह वित्त मंत्रालय करता है), जबकि योजना आयोग के पास यह शक्ति थी। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं।


5.3 मेन्स उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Blueprint)

प्रश्न: "योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना केवल संस्थागत नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भारत के आर्थिक दर्शन में एक विकेंद्रीकृत और सहकारी संघवाद की ओर बदलाव को दर्शाती है।" परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

[ मेन्स उत्तर ढाँचा (Mains Answer Blueprint) ]

1. भूमिका (Introduction - 30 शब्द):
   • 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग के गठन का संदर्भ दें।
   • स्पष्ट करें कि यह कमांड इकोनॉमी से सहकारी संघवाद व थिंक टैंक मॉडल की ओर बदलाव है।

2. मुख्य भाग (Body Paragraphs - 170 शब्द):
   • Top-Down बनाम Bottom-Up का तुलनात्मक विश्लेषण:
     - योजना आयोग: "One Size Fits All" - एक ही योजना सभी राज्यों पर लागू की जाती थी।
     - नीति आयोग: राज्यों की क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियाँ (State-specific strategies)।
   • वित्तीय आवंटन शक्ति का पृथक्करण:
     - नीति आयोग को निष्पक्ष थिंक-टैंक बनाया गया; पक्षपातपूर्ण धन आबंटन का आरोप समाप्त हुआ।
   • सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद:
     - गवर्निंग काउंसिल में राज्यों की प्रत्यक्ष भागीदारी।
     - सूचकांकों (SDG Index, EPI) के जरिए राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा।

3. चुनौतियाँ / आलोचनात्मक पहलू (30 शब्द):
   • वित्तीय शक्तियों के अभाव में सिफारिशों की बाध्यकारिता कम होना।
   • केवल सलाहकारी निकाय बनने का जोखिम।

4. निष्कर्ष (Conclusion - 20 शब्द):
   • संक्षेप में लिखें कि नीति आयोग भारत को 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की ओर ले जाने में 'टीम इंडिया' के उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर रहा है।