1. सरकारी बजट की अवधारणा एवं संवैधानिक आधार (Concept & Constitutional Framework of Budgeting)
1.1 सरकारी बजट क्या है?
सरकारी बजट किसी वित्तीय वर्ष (भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान सरकार की अनुमानित प्राप्तियों (Estimated Receipts) और अनुमानित व्यय (Estimated Expenditure) का एक आधिकारिक विवरण होता है। यह केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि सरकार की सामाजिक-आर्थिक प्राथमिकताओं, राजकोषीय दृष्टि और विकास रणनीति का दर्पण है।
1.2 संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions)
भारतीय संविधान में 'बजट' शब्द का उल्लेख नहीं है। इसके स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेदों के तहत बजटीय प्रक्रिया संचालित होती है:
| अनुच्छेद (Article) | विषय-वस्तु / प्रावधान |
|---|---|
| अनुच्छेद 112 | वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement - AFS): राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में संसद के दोनों सदनों के समक्ष भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण रखवाएगा। |
| अनुच्छेद 113 | अनुदान की माँग (Demands for Grants): संचित निधि से धन निकालने की सिफारिश केवल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से ही की जा सकती है। इसे केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है। |
| अनुच्छेद 114 | विनियोजन विधेयक (Appropriation Bill): संचित निधि से कोई भी धन बिना विनियोजन कानून पारित किए नहीं निकाला जा सकता। |
| अनुच्छेद 110 | धन विधेयक (Money Bill): कर लगाने, हटाने, संशोधन करने, या सरकार द्वारा धन उधार लेने से संबंधित विधेयक। |
| अनुच्छेद 265 | विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर न तो लगाया जाएगा और न ही एकत्र किया जाएगा (No Tax without Authority of Law)। |
| अनुच्छेद 266(1) | भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India): सरकार की सभी प्राप्तियाँ और ऋण वसूली। इससे व्यय हेतु संसदीय स्वीकृति आवश्यक है। |
| अनुच्छेद 266(2) | भारत का लोक लेखा (Public Account of India): भविष्य निधि, लघु बचत जमा आदि। इसके लिए संसदीय स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। |
| अनुच्छेद 267 | भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India): अप्रत्याशित व्यय हेतु राष्ट्रपति के अधीन (वर्तमान सीमा: ₹30,000 करोड़)। बाद में संसदीय स्वीकृति आवश्यक। |
2. सरकारी बजट की संरचना (Structure of Government Budget)
सरकारी बजट को मुख्य रूप से दो खातों में विभाजित किया जाता है: राजस्व खाता (Revenue Account) और पूँजीगत खाता (Capital Account)।
सरकारी बजट (Government Budget)
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राजस्व खाता (Revenue Account) पूँजीगत खाता (Capital Account)
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राजस्व प्राप्तियाँ राजस्व व्यय पूँजीगत प्राप्तियाँ पूँजीगत व्यय
(Revenue Receipts) (Revenue Expenditure) (Capital Receipts) (Capital Expenditure)
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कर राजस्व गैर-कर राजस्व ऋण प्राप्तियाँ गैर-ऋण प्राप्तियाँ
(Tax Revenue) (Non-Tax Revenue) (Debt Receipts) (Non-Debt Receipts)
2.1 राजस्व खाता (Revenue Account)
राजस्व खाते में वे प्राप्तियाँ और व्यय शामिल होते हैं जिनका प्रभाव सरकार की परिसंपत्तियों (Assets) या देनदारियों (Liabilities) पर नहीं पड़ता।
(A) राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts)
ये सरकार की वे प्राप्तियाँ हैं जो:
राजस्व प्राप्तियों के दो मुख्य स्रोत हैं:
(B) राजस्व व्यय (Revenue Expenditure)
यह सरकार का ऐसा उपभोग व्यय (Consumption Expenditure) है जो:
मुख्य घटक:
विशेष बिंदु (UPSC दृष्टि से महत्वपूर्ण): राज्यों को पूँजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए दिया जाने वाला अनुदान (Grants for Creation of Capital Assets) लेखांकन की दृष्टि से राजस्व व्यय माना जाता है, परंतु यह अर्थशास्त्र की दृष्टि से उत्पादक व्यय है। इसे प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) मापते समय घटाया जाता है।
2.2 पूँजीगत खाता (Capital Account)
पूँजीगत खाते में वे लेन-देन शामिल होते हैं जो सीधे तौर पर सरकार की परिसंपत्तियों या देनदारियों की स्थिति को परिवर्तित करते हैं।
(A) पूँजीगत प्राप्तियाँ (Capital Receipts)
ये वे प्राप्तियाँ हैं जो:
| श्रेणी | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ (Debt Receipts) | देनदारी सृजित करने वाली | बाजार उधार (Market Borrowings - Dated Securities, T-Bills), छोटे बचत कोष से उधार, बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB)। |
| गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ (Non-Debt Receipts) | परिसंपत्ति कम करने वाली | ऋणों की वसूली (Recovery of Loans given by Centre), विनिवेश (Disinvestment / Strategic Sale of PSUs)। |
(B) पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure - CapEx)
यह सरकार का वह विकासत्मक निवेश व्यय है जो:
मुख्य घटक:
3. बजट घाटे के विभिन्न प्रकार एवं गणितीय सूत्र (Types of Budgetary Deficits & Formulas)
घाटा (Deficit) तब उत्पन्न होता है जब सरकार का व्यय उसकी प्राप्तियों से अधिक हो जाता है।
घाटे के प्रकार (Types of Deficits)
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राजस्व घाटा प्रभावी राजस्व घाटा राजकोषीय घाटा प्राथमिक घाटा
(Revenue Deficit) (Effective Revenue Deficit) (Fiscal Deficit) (Primary Deficit)
3.1 राजस्व घाटा (Revenue Deficit - RD)
यह राजस्व व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच का अंतर है। यह दर्शाता है कि सरकार अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों को चलाने के लिए अपनी सामान्य आय से पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पा रही है।
3.2 प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit - ERD)
इसकी अवधारणा भारत में 2011-12 के बजट से प्रारंभ की गई (तथा FRBM संशोधन अधिनियम 2012 द्वारा वैधानिक दर्जा मिला)। यह कुल राजस्व घाटे में से उन अनुदानों को घटाकर प्राप्त होता है जो राज्यों को पूँजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए दिए जाते हैं।
3.3 राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit - FD)
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय (राजस्व + पूँजीगत) और उसकी कुल गैर-ऋण प्राप्तियों (Non-Debt Receipts) का अंतर है। यह सरकार की कुल शुद्ध उधारी आवश्यकता (Total Net Borrowing Requirement) का सटीक मापक है।
अथवा,
3.4 प्राथमिक घाटा (Primary Deficit - PD)
प्राथमिक घाटा यह दर्शाता है कि चालू वर्ष के राजकोषीय घाटे में से यदि अतीत के लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान को हटा दिया जाए, तो चालू वर्ष के राजकोषीय कार्यों से कितना घाटा उत्पन्न हो रहा है।
3.5 घाटे के मापों की तुलनात्मक तालिका (Comparative Chart)
| घाटे का प्रकार | गणितीय सूत्र | अर्थशास्त्र में मुख्य निहितार्थ |
|---|---|---|
| राजस्व घाटा (RD) | Rev.\ Exp. - Rev.\ Receipts | दैनिक उपभोग हेतु सरकारी अक्षमता को दर्शाता है। |
| प्रभावी राजस्व घाटा (ERD) | RD - ext{Capital Grants to States} | उत्पादक परिसंपत्ति निर्माण को छोड़कर वास्तविक अनुत्पादक घाटा। |
| राजकोषीय घाटा (FD) | Total\ Exp. - Non\ Debt\ Receipts | सरकार की कुल वार्षिक ऋण आवश्यकता (Borrowing Demand)। |
| प्राथमिक घाटा (PD) | FD - Interest\ Payments | अतीत के ब्याज बोझ को छोड़कर चालू वर्ष का वास्तविक राजकोषीय असंतुलन। |
4. राजकोषीय नीति एवं FRBM अधिनियम (Fiscal Policy & FRBM Act)
4.1 राजकोषीय नीति का स्वरूप (Nature of Fiscal Policy)
राजकोषीय नीति का तात्पर्य सरकार की कराधान (Taxation), सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure), और सार्वजनिक ऋण (Public Debt) नीतियों से है।
4.2 FRBM अधिनियम, 2003 (Fiscal Responsibility and Budget Management Act)
सरकारी ऋण को सीमित करने और राजकोषीय अनुशासन स्थापित करने के लिए FRBM कानून, 2003 पारित किया गया था।
मूल उद्देश्य:
4.3 एन. के. सिंह समिति की सिफारिशें (N. K. Singh Committee - 2016)
FRBM अधिनियम की समीक्षा हेतु गठित एन. के. सिंह समिति ने निम्नलिखित प्रमुख सिफारिशें कीं:
एन. के. सिंह समिति के मुख्य लक्ष्य
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राजकोषीय घाटा लक्ष्य ऋण-से-जीडीपी अनुपात (Debt Ratio) एस्केप क्लॉज (Escape Clause)
(Fiscal Deficit Target) (60% Combined Debt) (0.5% GDP Relaxations)
3.0% by FY23 (40% Centre / 20% States) (War, Calamity, Structural Reforms)
5. भारतीय कर संरचना एवं कर सुधार (Tax Structure & Tax Reforms in India)
5.1 करों का वर्गीकरण (Classification of Taxes)
कराधान प्रणालियाँ (Tax Systems)
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प्रगतिशील कर प्रतिगामी कर समानुपातिक कर
(Progressive Tax) (Regressive Tax) (Proportional Tax)
(आय बढ़ने पर कर दर बढ़ती है) (आय बढ़ने पर कर का प्रभाव घटता है) (सभी आय स्तरों पर समान दर)
[उदा. भारत में आयकर] [उदा. जीएसटी, उत्पाद शुल्क] [उदा. 15% फ्लैट टैक्स]
5.2 कर-जीडीपी अनुपात एवं कर उत्प्लावकता (Tax Metrics)
$ ext{Tax Buoyancy} = rac{\% ext{ Change in Tax Revenue}}{\% ext{ Change in Nominal GDP}}$
5.3 वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax - GST)
1 जुलाई 2017 से 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा भारत में एक अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई।
6. लोक ऋण एवं राजकोषीय समेकन (Public Debt & Fiscal Consolidation)
6.1 लोक ऋण के स्रोत (Sources of Public Debt)
भारत सरकार के कुल देनदारियों में शामिल हैं:
6.2 राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation)
राजकोषीय समेकन उन नीतियों का समूह है जिसका उद्देश्य सरकार के राजकोषीय घाटे और लोक ऋण के स्तर को कम करके राजकोषीय स्वास्थ्य में सुधार करना है।
राजकोषीय समेकन के रणनीति घटक:
7. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (Practice & Revision Module)
7.1 प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Quick Prelims Points)
7.2 प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice MCQs)
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सी मद/मदें भारत सरकार के 'पूँजीगत प्राप्तियों' (Capital Receipts) का भाग हैं/हैं?
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: (A) केवल 1 और 3 (B) केवल 2 और 4 (C) केवल 1, 3 और 4 (D) 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: (A)
व्याख्या:
- कथन 1 सही है (ऋण की वसूली से परिसंपत्ति घटती है, अतः यह गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति है)।
- कथन 2 गलत है (PSU लाभांश राजस्व प्राप्ति है)।
- कथन 3 सही है (लघु बचत जमा देनदारी बढ़ाती है, अतः यह पूँजीगत प्राप्ति है)।
- कथन 4 गलत है (विदेशी अनुदान गैर-कर राजस्व प्राप्ति है)।
प्रश्न 2. 'प्राथमिक घाटा' (Primary Deficit) शून्य होने का क्या अर्थ है? (A) सरकार की राजस्व प्राप्तियाँ और राजस्व व्यय बराबर हैं। (B) सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों के बराबर है। (C) सरकार को चालू वर्ष में केवल पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान के बराबर ही उधारी की आवश्यकता है। (D) सरकार द्वारा लिया गया संपूर्ण ऋण केवल बुनियादी ढाँचे में निवेश किया गया है।
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान। यदि प्राथमिक घाटा 0 है, तो राजकोषीय घाटा = ब्याज भुगतान। इसका अर्थ है कि चालू वर्ष के परिचालन में कोई नया घाटा नहीं है और संपूर्ण उधारी केवल पुराने ऋणों के ब्याज को चुकाने के लिए ली जा रही है।
7.3 मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Writing Blueprint)
प्रश्न: "उच्च पूँजीगत व्यय (CapEx) भारत के राजकोषीय समेकन तथा दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि के बीच एक सेतु का कार्य कर सकता है।" विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
उत्तर ढाँचा (Analytical Answer Structure):
Debt/GDP) स्वतः कम होता है (Denominator Effect)।