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सरकारी बजट, राजकोषीय नीति एवं लोक वित्त

Government Budgeting, Fiscal Policy & Public Finance

सरकारी बजट की संवैधानिक आधारभूमि, राजस्व और पूँजीगत खाते, घाटों के माप, राजकोषीय नीति, FRBM और लोक वित्त का अध्यायवार अध्ययन।

सरकारी बजटराजकोषीय नीतिबजट घाटेलोक वित्त
इस अध्याय में
1. सरकारी बजट की अवधारणा एवं संवैधानिक आधार (Concept & Constitutional Framework of Budgeting)2. सरकारी बजट की संरचना (Structure of Government Budget)3. बजट घाटे के विभिन्न प्रकार एवं गणितीय सूत्र (Types of Budgetary Deficits & Formulas)4. राजकोषीय नीति एवं FRBM अधिनियम (Fiscal Policy & FRBM Act)5. भारतीय कर संरचना एवं कर सुधार (Tax Structure & Tax Reforms in India)6. लोक ऋण एवं राजकोषीय समेकन (Public Debt & Fiscal Consolidation)7. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (Practice & Revision Module)

1. सरकारी बजट की अवधारणा एवं संवैधानिक आधार (Concept & Constitutional Framework of Budgeting)

1.1 सरकारी बजट क्या है?

सरकारी बजट किसी वित्तीय वर्ष (भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान सरकार की अनुमानित प्राप्तियों (Estimated Receipts) और अनुमानित व्यय (Estimated Expenditure) का एक आधिकारिक विवरण होता है। यह केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि सरकार की सामाजिक-आर्थिक प्राथमिकताओं, राजकोषीय दृष्टि और विकास रणनीति का दर्पण है।

1.2 संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions)

भारतीय संविधान में 'बजट' शब्द का उल्लेख नहीं है। इसके स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेदों के तहत बजटीय प्रक्रिया संचालित होती है:

अनुच्छेद (Article)विषय-वस्तु / प्रावधान
अनुच्छेद 112वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement - AFS): राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में संसद के दोनों सदनों के समक्ष भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण रखवाएगा।
अनुच्छेद 113अनुदान की माँग (Demands for Grants): संचित निधि से धन निकालने की सिफारिश केवल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से ही की जा सकती है। इसे केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
अनुच्छेद 114विनियोजन विधेयक (Appropriation Bill): संचित निधि से कोई भी धन बिना विनियोजन कानून पारित किए नहीं निकाला जा सकता।
अनुच्छेद 110धन विधेयक (Money Bill): कर लगाने, हटाने, संशोधन करने, या सरकार द्वारा धन उधार लेने से संबंधित विधेयक।
अनुच्छेद 265विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर न तो लगाया जाएगा और न ही एकत्र किया जाएगा (No Tax without Authority of Law)।
अनुच्छेद 266(1)भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India): सरकार की सभी प्राप्तियाँ और ऋण वसूली। इससे व्यय हेतु संसदीय स्वीकृति आवश्यक है।
अनुच्छेद 266(2)भारत का लोक लेखा (Public Account of India): भविष्य निधि, लघु बचत जमा आदि। इसके लिए संसदीय स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती।
अनुच्छेद 267भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India): अप्रत्याशित व्यय हेतु राष्ट्रपति के अधीन (वर्तमान सीमा: ₹30,000 करोड़)। बाद में संसदीय स्वीकृति आवश्यक।

2. सरकारी बजट की संरचना (Structure of Government Budget)

सरकारी बजट को मुख्य रूप से दो खातों में विभाजित किया जाता है: राजस्व खाता (Revenue Account) और पूँजीगत खाता (Capital Account)

                              सरकारी बजट (Government Budget)
                                             │
                       ┌─────────────────────┴─────────────────────┐
                       ▼                                           ▼
             राजस्व खाता (Revenue Account)               पूँजीगत खाता (Capital Account)
                       │                                           │
             ┌─────────┴─────────┐                       ┌─────────┴─────────┐
             ▼                   ▼                       ▼                   ▼
       राजस्व प्राप्तियाँ    राजस्व व्यय           पूँजीगत प्राप्तियाँ    पूँजीगत व्यय
      (Revenue Receipts) (Revenue Expenditure)   (Capital Receipts)  (Capital Expenditure)
             │                                           │
     ┌───────┴───────┐                           ┌───────┴───────┐
     ▼               ▼                           ▼               ▼
  कर राजस्व      गैर-कर राजस्व                ऋण प्राप्तियाँ   गैर-ऋण प्राप्तियाँ
 (Tax Revenue) (Non-Tax Revenue)              (Debt Receipts) (Non-Debt Receipts)

2.1 राजस्व खाता (Revenue Account)

राजस्व खाते में वे प्राप्तियाँ और व्यय शामिल होते हैं जिनका प्रभाव सरकार की परिसंपत्तियों (Assets) या देनदारियों (Liabilities) पर नहीं पड़ता।

(A) राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts)

ये सरकार की वे प्राप्तियाँ हैं जो:

1.
न तो सरकार के लिए कोई देनदारी (Liability) पैदा करती हैं, और
2.
न ही सरकार की परिसंपत्तियों (Assets) को कम करती हैं।

राजस्व प्राप्तियों के दो मुख्य स्रोत हैं:

1.
कर राजस्व (Tax Revenue):
प्रत्यक्ष कर (Direct Taxes): जिस पर कर लगाया जाता है, वही उसका भुगतान करता है (कराघात और करापात एक ही व्यक्ति पर)।
उदाहरण: आयकर (Income Tax), निगम कर (Corporations Tax), प्रतिभूति लेन-देन कर (STT)।
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes): कर का बोझ दूसरों पर स्थानांतरित किया जा सकता है (कराघात और करापात अलग-अलग व्यक्तियों पर)।
उदाहरण: वस्तु एवं सेवा कर (GST), केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise), सीमा शुल्क (Customs Duty)।
2.
गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue):
सरकारी उपक्रमों से प्राप्त लाभांश एवं लाभ (Dividends & Profits from PSUs / RBI)।
सरकार द्वारा दिए गए ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ (Interest Receipts)।
विभिन्न सेवाओं हेतु शुल्क, जुर्माना, तथा लाइसेंस फ़ीस (Fees, Fines, User Charges)।
विदेशी सरकारों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त बाह्य अनुदान (External Grants)।

(B) राजस्व व्यय (Revenue Expenditure)

यह सरकार का ऐसा उपभोग व्यय (Consumption Expenditure) है जो:

1.
किसी भौतिक या वित्तीय परिसंपत्ति (Asset) का निर्माण नहीं करता, और
2.
न ही सरकार की देनदारियों (Liabilities) में कोई कमी लाता है।

मुख्य घटक:

पूर्व ऋणों पर बजट से ब्याज भुगतान (Interest Payments) (यह बजट का सबसे बड़ा एकल राजस्व व्यय घटक है)।
रक्षा व्यय (Defense Services) (केवल चालू/उपभोग व्यय, उपकरण खरीद पूँजीगत में आती है)।
सब्सिडी (Subsidies) (खाद्य, उर्वरक, और एलपीजी/पेट्रोलियम सब्सिडी)।
सरकारी कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, प्रशासनिक व्यय।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए जाने वाले वित्तीय अनुदान (Grants to States)।
विशेष बिंदु (UPSC दृष्टि से महत्वपूर्ण): राज्यों को पूँजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए दिया जाने वाला अनुदान (Grants for Creation of Capital Assets) लेखांकन की दृष्टि से राजस्व व्यय माना जाता है, परंतु यह अर्थशास्त्र की दृष्टि से उत्पादक व्यय है। इसे प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) मापते समय घटाया जाता है।

2.2 पूँजीगत खाता (Capital Account)

पूँजीगत खाते में वे लेन-देन शामिल होते हैं जो सीधे तौर पर सरकार की परिसंपत्तियों या देनदारियों की स्थिति को परिवर्तित करते हैं।

(A) पूँजीगत प्राप्तियाँ (Capital Receipts)

ये वे प्राप्तियाँ हैं जो:

1.
या तो सरकार की देनदारियों में वृद्धि करती हैं (ऋण प्राप्तियाँ - Debt Capital Receipts), या
2.
सरकार की वित्तीय/भौतिक परिसंपत्तियों में कमी लाती हैं (गैर-ऋण प्राप्तियाँ - Non-Debt Capital Receipts)।
श्रेणीप्रकारउदाहरण
ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ (Debt Receipts)देनदारी सृजित करने वालीबाजार उधार (Market Borrowings - Dated Securities, T-Bills), छोटे बचत कोष से उधार, बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB)।
गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ (Non-Debt Receipts)परिसंपत्ति कम करने वालीऋणों की वसूली (Recovery of Loans given by Centre), विनिवेश (Disinvestment / Strategic Sale of PSUs)।

(B) पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure - CapEx)

यह सरकार का वह विकासत्मक निवेश व्यय है जो:

1.
नई परिसंपत्तियों (भौतिक या वित्तीय) का निर्माण करता है, या
2.
सरकार की देनदारियों (ऋणों) में कमी लाता है।

मुख्य घटक:

बुनियादी ढाँचे (सड़क, रेलवे, बंदरगाह, स्कूल, अस्पताल) का निर्माण।
सार्वजनिक उपक्रमों में शेयर या इक्विटी में निवेश।
राज्य सरकारों, विदेशी सरकारों तथा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को दिए जाने वाले ऋण एवं अग्रिम (Loans & Advances)।
पूर्व में लिए गए ऋणों का पुनर्भुगतान (Repayment of Debt Liabilities)।

3. बजट घाटे के विभिन्न प्रकार एवं गणितीय सूत्र (Types of Budgetary Deficits & Formulas)

घाटा (Deficit) तब उत्पन्न होता है जब सरकार का व्यय उसकी प्राप्तियों से अधिक हो जाता है।

                                  घाटे के प्रकार (Types of Deficits)
                                                  │
         ┌─────────────────────────┬──────────────┴──────────────┬─────────────────────────┐
         ▼                         ▼                             ▼                         ▼
   राजस्व घाटा              प्रभावी राजस्व घाटा             राजकोषीय घाटा             प्राथमिक घाटा
(Revenue Deficit)       (Effective Revenue Deficit)      (Fiscal Deficit)         (Primary Deficit)

3.1 राजस्व घाटा (Revenue Deficit - RD)

यह राजस्व व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच का अंतर है। यह दर्शाता है कि सरकार अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों को चलाने के लिए अपनी सामान्य आय से पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पा रही है।

ext{राजस्व घाटा (RD)} = ext{राजस्व व्यय (Revenue Exp.)} - ext{राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts)}
प्रभाव: उच्च राजस्व घाटे का अर्थ है कि सरकार अपने उपभोग व्यय को पूरा करने के लिए उधार ले रही है, जो आर्थिक रूप से अनुत्पादक है।

3.2 प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit - ERD)

इसकी अवधारणा भारत में 2011-12 के बजट से प्रारंभ की गई (तथा FRBM संशोधन अधिनियम 2012 द्वारा वैधानिक दर्जा मिला)। यह कुल राजस्व घाटे में से उन अनुदानों को घटाकर प्राप्त होता है जो राज्यों को पूँजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए दिए जाते हैं।

ext{ERD} = ext{राजस्व घाटा (RD)} - ext{पूँजीगत परिसंपत्तियों के सृजन हेतु राज्यों को अनुदान}

3.3 राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit - FD)

राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय (राजस्व + पूँजीगत) और उसकी कुल गैर-ऋण प्राप्तियों (Non-Debt Receipts) का अंतर है। यह सरकार की कुल शुद्ध उधारी आवश्यकता (Total Net Borrowing Requirement) का सटीक मापक है।

ext{राजकोषीय घाटा (FD)} = ext{कुल व्यय} - ( ext{राजस्व प्राप्तियाँ} + ext{गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ})

अथवा,

ext{राजकोषीय घाटा (FD)} = ext{बजट अवधि में सरकार द्वारा ली गई कुल उधारी (Total Borrowings)}

3.4 प्राथमिक घाटा (Primary Deficit - PD)

प्राथमिक घाटा यह दर्शाता है कि चालू वर्ष के राजकोषीय घाटे में से यदि अतीत के लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान को हटा दिया जाए, तो चालू वर्ष के राजकोषीय कार्यों से कितना घाटा उत्पन्न हो रहा है।

ext{प्राथमिक घाटा (PD)} = ext{राजकोषीय घाटा (FD)} - ext{ब्याज भुगतान (Interest Payments)}
विश्लेषणात्मक महत्व: यदि प्राथमिक घाटा शून्य (Zero) हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि सरकार का राजकोषीय घाटा केवल पुराने ऋणों के ब्याज चुकाने के कारण है।

3.5 घाटे के मापों की तुलनात्मक तालिका (Comparative Chart)

घाटे का प्रकारगणितीय सूत्रअर्थशास्त्र में मुख्य निहितार्थ
राजस्व घाटा (RD)Rev.\ Exp. - Rev.\ Receiptsदैनिक उपभोग हेतु सरकारी अक्षमता को दर्शाता है।
प्रभावी राजस्व घाटा (ERD)RD - ext{Capital Grants to States}उत्पादक परिसंपत्ति निर्माण को छोड़कर वास्तविक अनुत्पादक घाटा।
राजकोषीय घाटा (FD)Total\ Exp. - Non\ Debt\ Receiptsसरकार की कुल वार्षिक ऋण आवश्यकता (Borrowing Demand)।
प्राथमिक घाटा (PD)FD - Interest\ Paymentsअतीत के ब्याज बोझ को छोड़कर चालू वर्ष का वास्तविक राजकोषीय असंतुलन।

4. राजकोषीय नीति एवं FRBM अधिनियम (Fiscal Policy & FRBM Act)

4.1 राजकोषीय नीति का स्वरूप (Nature of Fiscal Policy)

राजकोषीय नीति का तात्पर्य सरकार की कराधान (Taxation), सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure), और सार्वजनिक ऋण (Public Debt) नीतियों से है।

1.
सक्रिय/प्रति-चक्रीय राजकोषीय नीति (Counter-Cyclical Fiscal Policy):
मंदी (Recession) के दौरान: सरकार करों में कटौती करती है और सार्वजनिक व्यय बढ़ाती है (Expansionary Fiscal Policy) ताकि मांग को प्रोत्साहन मिले।
तेजी/मुद्रास्फीति (Inflation) के दौरान: सरकार कर बढ़ाती है और व्यय घटाती है (Contractionary Fiscal Policy)।
2.
अनु-चक्रीय राजकोषीय नीति (Pro-Cyclical Fiscal Policy):
जब नीति आर्थिक चक्र की दिशा में ही कार्य करती है (मंदी में व्यय घटाना और तेजी में व्यय बढ़ाना), जो आर्थिक अस्थिरता को बढ़ा सकती है।

4.2 FRBM अधिनियम, 2003 (Fiscal Responsibility and Budget Management Act)

सरकारी ऋण को सीमित करने और राजकोषीय अनुशासन स्थापित करने के लिए FRBM कानून, 2003 पारित किया गया था।

मूल उद्देश्य:

1.
राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करना।
2.
अंतर-पीढ़ीगत समानता (Inter-generational Equity) सुनिश्चित करना।
3.
दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता स्थापित करना।
4.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्राथमिक बाजार से सरकारी प्रतिभूतियों की प्रत्यक्ष खरीद पर रोक लगाना (1 अप्रैल 2006 से लागू)।

4.3 एन. के. सिंह समिति की सिफारिशें (N. K. Singh Committee - 2016)

FRBM अधिनियम की समीक्षा हेतु गठित एन. के. सिंह समिति ने निम्नलिखित प्रमुख सिफारिशें कीं:

                            एन. के. सिंह समिति के मुख्य लक्ष्य
                                           │
             ┌─────────────────────────────┼─────────────────────────────┐
             ▼                             ▼                             ▼
   राजकोषीय घाटा लक्ष्य            ऋण-से-जीडीपी अनुपात (Debt Ratio)        एस्केप क्लॉज (Escape Clause)
  (Fiscal Deficit Target)                (60% Combined Debt)            (0.5% GDP Relaxations)
     3.0% by FY23                  (40% Centre / 20% States)         (War, Calamity, Structural Reforms)
1.
लक्ष्य का आधार: राजकोषीय घाटे के स्थान पर ऋण-से-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) को प्राथमिक आधार माना जाए।
2.
ऋण लक्ष्य (Debt Target): वर्ष 2023 तक सामान्य सरकार (केंद्र + राज्य) का कुल ऋण जीडीपी का 60% (केंद्र: 40%, राज्य: 20%) से अधिक नहीं होना चाहिए।
3.
राजकोषीय घाटा लक्ष्य: राजकोषीय घाटे को 2023 तक घटाकर 2.5% पर लाना।
4.
एस्केप क्लॉज (Escape Clause): राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध, प्राकृतिक आपदा, या अर्थव्यवस्था में व्यापक संरचनात्मक सुधारों (उदा. GST) की स्थिति में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में 0.5% तक की छूट की अनुमति।
5.
राजकोषीय परिषद (Fiscal Council): एक स्वतंत्र संस्थागत निकाय का गठन किया जाए जो बजट अनुमानों का आकलन और निगरानी कर सके।

5. भारतीय कर संरचना एवं कर सुधार (Tax Structure & Tax Reforms in India)

5.1 करों का वर्गीकरण (Classification of Taxes)

                                    कराधान प्रणालियाँ (Tax Systems)
                                                  │
         ┌────────────────────────────────────────┼────────────────────────────────────────┐
         ▼                                        ▼                                        ▼
    प्रगतिशील कर                                प्रतिगामी कर                               समानुपातिक कर
  (Progressive Tax)                             (Regressive Tax)                          (Proportional Tax)
(आय बढ़ने पर कर दर बढ़ती है)                    (आय बढ़ने पर कर का प्रभाव घटता है)        (सभी आय स्तरों पर समान दर)
 [उदा. भारत में आयकर]                            [उदा. जीएसटी, उत्पाद शुल्क]               [उदा. 15% फ्लैट टैक्स]

5.2 कर-जीडीपी अनुपात एवं कर उत्प्लावकता (Tax Metrics)

1.
कर-जीडीपी अनुपात (Tax-to-GDP Ratio):
कुल कर संग्रह का देश की कुल जीडीपी में प्रतिशत।
भारत का कर-जीडीपी अनुपात (केंद्र + राज्य मिलाकर) लगभग 17-18% के आसपास रहता है (विकासशील देशों के औसत से कम)।
2.
कर उत्प्लावकता (Tax Buoyancy):
यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में परिवर्तन के सापेक्ष कर राजस्व संग्रह में अनुपातिक परिवर्तन का मापक है।

$ ext{Tax Buoyancy} = rac{\% ext{ Change in Tax Revenue}}{\% ext{ Change in Nominal GDP}}$

यदि Tax Buoyancy > 1 है, तो इसका अर्थ है कि जीडीपी संवृद्धि दर की तुलना में कर राजस्व तेजी से बढ़ रहा है।
3.
कर लोच (Tax Elasticity):
यह कर आधार (Tax Base) या कर दरों में बिना कोई बदलाव किए केवल आर्थिक वृद्धि के कारण कर संग्रह में होने वाले बदलाव को मापता है।

5.3 वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax - GST)

1 जुलाई 2017 से 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा भारत में एक अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई।

सिद्धान्त: 'एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार' (One Nation, One Tax, One Market)।
प्रकृति: गंतव्य-आधारित उपभोग कर (Destination-Based Consumption Tax)।
संरचना:
CGST (केंद्रीय जीएसटी)
SGST (राज्य जीएसटी)
IGST (एकीकृत जीएसटी - अंतर-राज्यीय व्यापार पर)
UTGST (केंद्र शासित प्रदेशों हेतु)
GST परिषद (Article 279A): राष्ट्रपति द्वारा गठित संवैधानिक निकाय।
अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री।
सदस्य: राज्यों के वित्त/कर मंत्री।
मतदान अधिकार: केंद्र का 1/3 मताधिकार, सभी राज्यों का मिलाकर 2/3 मताधिकार। कोई भी निर्णय 3/4 (75%) बहुमत से ही लिया जा सकता है।

6. लोक ऋण एवं राजकोषीय समेकन (Public Debt & Fiscal Consolidation)

6.1 लोक ऋण के स्रोत (Sources of Public Debt)

भारत सरकार के कुल देनदारियों में शामिल हैं:

1.
लोक ऋण (Public Debt - Internal & External):
आंतरिक ऋण (Internal Debt): दिनांकित प्रतिभूतियाँ (Dated Securities), ट्रेजरी बिल (T-Bills), गोल्ड बांड आदि। (यह कुल लोक ऋण का लगभग 90-95% भाग है)।
बाह्य ऋण (External Debt): बहुपक्षीय (WB, ADB) व द्विपक्षीय संस्थानों तथा विदेशी सरकारों से लिया गया ऋण।
2.
अन्य देनदारियाँ (Other Liabilities):
राष्ट्रीय लघु बचत कोष (NSSF), राज्य भविष्य निधि (State Provident Funds), डाक जमा आदि (Public Account Liabilities)।

6.2 राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation)

राजकोषीय समेकन उन नीतियों का समूह है जिसका उद्देश्य सरकार के राजकोषीय घाटे और लोक ऋण के स्तर को कम करके राजकोषीय स्वास्थ्य में सुधार करना है।

राजकोषीय समेकन के रणनीति घटक:

राजस्व वृद्धि (Revenue Enhancement): कर आधार का विस्तार (Widening Tax Base), डिजिटल भुगतान को बढ़ावा, GST अनुपालन सुधार, प्रत्यक्ष कर सरलीकरण।
व्यय युक्तिकरण (Expenditure Rationalization): अप्रत्यक्ष सब्सिडी के स्थान पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का उपयोग, अनुत्पादक राजस्व व्यय को नियंत्रित करना, पूँजीगत व्यय (CapEx) का अनुपात बढ़ाना।

7. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (Practice & Revision Module)

7.1 प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Quick Prelims Points)

1.
अनुदान की माँग (Demands for Grants): केवल लोकसभा में पेश की जाती हैं और केवल लोकसभा को ही उन पर मतदान का अधिकार है।
2.
कटौती प्रस्ताव (Cut Motions):
नीतिगत कटौती (Disapproval of Policy Cut): माँग की राशि घटाकर ₹1 करना।
आर्थिक कटौती (Economy Cut): माँग में से एक निश्चित राशि कम करना।
सांकेतिक कटौती (Token Cut): माँग में से ₹100 की कमी करना (शिकायत दर्ज कराने हेतु)।
3.
गिलोटीन (Guillotine): बजट सत्र के अंतिम दिन समय की कमी के कारण बिना चर्चा के शेष सभी अनुदानों की माँगों को एक साथ मतदान के लिए रख देना।
4.
अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grants - Article 115): जब वर्तमान वित्तीय वर्ष में किसी विशेष सेवा के लिए विनियोजन अधिनियम द्वारा स्वीकृत राशि अपर्याप्त पाई जाती है।
5.
प्रभावी राजस्व घाटा (ERD): केवल भारत में प्रयुक्त होने वाली अवधारणा है जिसे 2011-12 के बजट में पेश किया गया था।

7.2 प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice MCQs)

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सी मद/मदें भारत सरकार के 'पूँजीगत प्राप्तियों' (Capital Receipts) का भाग हैं/हैं?

1.
राज्यों से प्राप्त ऋणों की वसूली
2.
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) से प्राप्त लाभांश
3.
राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (NSC) से प्राप्तियाँ
4.
विदेश से प्राप्त अनुदान सहायता

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: (A) केवल 1 और 3 (B) केवल 2 और 4 (C) केवल 1, 3 और 4 (D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (A)
व्याख्या:
- कथन 1 सही है (ऋण की वसूली से परिसंपत्ति घटती है, अतः यह गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति है)।
- कथन 2 गलत है (PSU लाभांश राजस्व प्राप्ति है)।
- कथन 3 सही है (लघु बचत जमा देनदारी बढ़ाती है, अतः यह पूँजीगत प्राप्ति है)।
- कथन 4 गलत है (विदेशी अनुदान गैर-कर राजस्व प्राप्ति है)।

प्रश्न 2. 'प्राथमिक घाटा' (Primary Deficit) शून्य होने का क्या अर्थ है? (A) सरकार की राजस्व प्राप्तियाँ और राजस्व व्यय बराबर हैं। (B) सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों के बराबर है। (C) सरकार को चालू वर्ष में केवल पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान के बराबर ही उधारी की आवश्यकता है। (D) सरकार द्वारा लिया गया संपूर्ण ऋण केवल बुनियादी ढाँचे में निवेश किया गया है।

सही उत्तर: (C)
व्याख्या: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान। यदि प्राथमिक घाटा 0 है, तो राजकोषीय घाटा = ब्याज भुगतान। इसका अर्थ है कि चालू वर्ष के परिचालन में कोई नया घाटा नहीं है और संपूर्ण उधारी केवल पुराने ऋणों के ब्याज को चुकाने के लिए ली जा रही है।

7.3 मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Writing Blueprint)

प्रश्न: "उच्च पूँजीगत व्यय (CapEx) भारत के राजकोषीय समेकन तथा दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि के बीच एक सेतु का कार्य कर सकता है।" विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

उत्तर ढाँचा (Analytical Answer Structure):

1.
भूमिका (Introduction - 30-40 शब्द):
पूँजीगत व्यय (CapEx) को परिभाषित करें और हाल के बजटों में इसके बढ़ते रुझान (उदा. जीडीपी का ~3.3-3.4%) का उल्लेख करें।
2.
मुख्य भाग (Body Paragraphs - 160-180 शब्द):
दीर्घकालिक संवृद्धि हेतु CapEx की भूमिका (Growth Multiplier Effect):
पूँजीगत व्यय का उच्च 'गुणक प्रभाव' (Multiplier Effect - RBI के अनुसार CapEx गुणक ~2.45 होता है, जबकि राजस्व व्यय गुणक केवल ~0.99 होता है)।
निजी निवेश को आकर्षित करना (Crowding-In of Private Investment)।
आपूर्ति-पक्ष की बाधाओं को दूर करना (सड़क, रेलवे, लाजिस्टिक लागत में कमी)।
राजकोषीय समेकन के साथ समन्वय (Bridge with Fiscal Consolidation):
CapEx से परिसंपत्तियों का निर्माण होता है जो भविष्य में राजस्व (टोल, भाड़ा, कर आधार वृद्धि) उत्पन्न करती हैं।
उच्च जीडीपी संवृद्धि दर के कारण ऋण-जीडीपी अनुपात (Debt/GDP) स्वतः कम होता है (Denominator Effect)।
विद्यमान चुनौतियाँ व जोखिम:
परियोजना कार्यान्वयन में देरी (Time & Cost Overruns)।
उच्च ब्याज भुगतान के कारण CapEx हेतु राजकोषीय गुंजाइश (Fiscal Space) का सीमित होना।
3.
निष्कर्ष (Way Forward / Conclusion - 30-40 शब्द):
एन. के. सिंह समिति की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालें कि केवल व्यय में कटौती के स्थान पर 'व्यय की गुणवत्ता' (Quality of Expenditure) में सुधार ही टिकाऊ राजकोषीय समेकन और $5 Trillion Economy के लक्ष्य की कुंजी है।