अर्थव्यवस्था • UPSC

गिग अर्थव्यवस्था, प्लेटफॉर्म श्रमिक एवं श्रम सुधार

Gig Economy, Platform Workers & Labour Reforms

गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था, श्रम बाजार की नई संरचना, 4 श्रम संहिताएँ, सामाजिक सुरक्षा और असंगठित क्षेत्र के औपचारिकीकरण का उन्नत अध्ययन।

गिग अर्थशास्त्रप्लेटफॉर्म वर्कश्रम सुधारसामाजिक सुरक्षा
इस अध्याय में
1. अवधारणा व परिचय (Introduction & Theoretical Foundation)2. भारत में गिग अर्थव्यवस्था के प्रेरक कारक एवं विस्तार (Drivers & Scale of Gig Economy)3. गिग अर्थव्यवस्था की प्रमुख चुनौतियाँ एवं चिंताएँ (Structural Challenges)4. श्रम सुधार एवं 4 नए श्रम कोड (Labour Reforms & 4 Labour Codes)5. असंगठित क्षेत्र का औपचारिकरण एवं प्रमुख सरकारी पहलें (Formalization & Schemes)6. UPSC परीक्षा विशेष अभ्यास मॉड्यूल (Exam Special Module)

1. अवधारणा व परिचय (Introduction & Theoretical Foundation)

1.1 गिग अर्थशास्त्र (Gig Economy) की परिभाषा

गिग अर्थशास्त्र एक ऐसी लचीली बाजार व्यवस्था है जिसमें पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी (Employer-Employee) संबंधों के बजाय अस्थायी, स्वतंत्र और अनुबंध-आधारित (Contract-based) कार्य संपन्न किए जाते हैं। इसमें कार्य 'गिग' (एक विशिष्ट कार्य या प्रोजेक्ट) के रूप में आवंटित होता है।

1.2 गिग वर्कर बनाम प्लेटफॉर्म वर्कर (सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुसार)

गिग वर्कर (Gig Worker): वह व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बिना कार्य करता है या कार्य व्यवस्था में भाग लेता है और ऐसे कार्यों से आय अर्जित करता है (जैसे- स्वतंत्र फ्रीलांसर, ठेका मजदूर)।
प्लेटफ़ॉर्म वर्कर (Platform Worker): वह गिग वर्कर जो विशिष्ट सेवाओं (जैसे कैब बुकिंग, भोजन डिलीवरी, अर्बन सर्विसेज) को ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म या मोबाइल ऐप का उपयोग करता है।
तुलनात्मक बिंदुपारंपरिक रोजगारगिग / प्लेटफॉर्म रोजगार
संबंधदीर्घकालिक नियोक्ता-कर्मचारीस्वतंत्र अनुबंध / एग्रीगेटर भागीदार
कार्य घंटेनिश्चित (उदा. 8 घंटे)लचीले (Flexible Hours)
सामाजिक सुरक्षाPF, ग्रेच्युटी, मेडिकल इंश्योरेंस अनिवार्यपारंपरिक सुरक्षा नेटवर्क का अभाव
आयनिश्चित मासिक वेतनकार्य-आधारित भुगतान (Per-Gig Basis)

2. भारत में गिग अर्थव्यवस्था के प्रेरक कारक एवं विस्तार (Drivers & Scale of Gig Economy)

2.1 विकास के मुख्य चालक (Drivers of Growth)

1.
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): सस्ता 4G/5G डेटा, स्मार्टफोन पैठ और UPI भुगतान प्रणाली।
2.
शहरीकरण व उपभोक्ता माँग: भोजन डिलीवरी, त्वरित वाणिज्य (Quick Commerce) और ऑन-डिमांड सेवाओं की तीव्र माँग।
3.
रोजगार में लचीलापन: युवाओं और विद्यार्थियों के लिए अंशकालिक (Part-time) आय सृजन का साधन।

2.2 नीति आयोग की रिपोर्ट के प्रमुख आँकड़े ('Booster Shot for Gig Economy')

वर्तमान योगदान: भारत में लगभग 77 लाख (7.7 मिलियन) गिग वर्कर कार्यरत हैं (कुल गैर-कृषि कार्यबल का ~2.6%)।
भविष्य का अनुमान: 2029-30 तक भारत में गिग वर्करों की संख्या बढ़कर 2.35 करोड़ (23.5 मिलियन) होने का अनुमान है (गैर-कृषि कार्यबल का ~6.7%)।
कौशल स्तर वर्गीकरण:
मध्यम-कुशल (Medium-skilled): ~47%
उच्च-कुशल (High-skilled): ~22%
कम-कुशल (Low-skilled): ~31%

3. गिग अर्थव्यवस्था की प्रमुख चुनौतियाँ एवं चिंताएँ (Structural Challenges)

       ┌────────────────────────────────────────────────────────┐
       │             गिग अर्थव्यवस्था की मुख्य चुनौतियाँ             │
       └───────────────────────────┬────────────────────────────┘
                                   │
        ┌──────────────────────────┼──────────────────────────┐
        ▼                          ▼                          ▼
┌───────────────┐          ┌───────────────┐          ┌───────────────┐
│ सामाजिक सुरक्षा│          │ एल्गोरिदमिक   │          │ सामूहिक      │
│  का अभाव      │          │ नियंत्रण      │          │ सौदेबाजी की कमी│
└───────────────┘          └───────────────┘          └───────────────┘
1.
सामाजिक सुरक्षा का अभाव: पीएफ, पेंशन, दुर्घटना बीमा और सवैतनिक अवकाश (Paid Leave) जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी।
2.
एल्गोरिदमिक प्रबंधन व अपारदर्शिता: एल्गोरिदम द्वारा रेटिंग देना, काम का आवंटन तय करना और बिना मानवीय सुनवाई के आईडी ब्लॉक कर देना।
3.
कम व अनिश्चित आय: उच्च ईंधन लागत, प्लेटफॉर्म कमीशन में वृद्धि और प्रोत्साहन (Incentives) में कटौती से वास्तविक आय में गिरावट।
4.
सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining) का अभाव: ट्रेड यूनियन बनाने या सामूहिक रूप से शर्तें तय करने के कानूनी अधिकार का न होना।
5.
व्यावसायिक स्वास्थ्य व सुरक्षा: त्वरित डिलीवरी (10-minute delivery) के दबाव में सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम।

4. श्रम सुधार एवं 4 नए श्रम कोड (Labour Reforms & 4 Labour Codes)

भारत सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित करके 4 नए श्रम कोड (Labour Codes) में विभाजित किया है:

            ┌──────────────────────────────────────────────┐
            │        भारत के 4 नए श्रम कोड (Labour Codes)  │
            └──────────────────────┬───────────────────────┘
                                   │
     ┌─────────────────┬───────────┴───────────┬─────────────────┐
     ▼                 ▼                       ▼                 ▼
┌──────────────┐┌──────────────┐      ┌─────────────────┐┌──────────────┐
│  वेतन संहिता ││औद्योगिक संबंध│      │ सामाजिक सुरक्षा ││ OSH संहिता   │
│   (2019)     ││ संहिता (2020)│      │   संहिता (2020) ││    (2020)    │
└──────────────┘└──────────────┘      └─────────────────┘└──────────────┘

4.1 वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019)

4 कानूनों (न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, वेतन भुगतान अधिनियम आदि) का विलय।
राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (National Floor Wage): केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे कम वेतन राज्य सरकारें तय नहीं कर सकतीं।
सभी संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए समय पर वेतन भुगतान अनिवार्य।

4.2 औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020)

छंटनी (Lay-off/Retrenchment) के लिए सरकार की पूर्व अनुमति की सीमा 100 श्रमिकों से बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दी गई।
बिना 60 दिन के पूर्व नोटिस के किसी भी प्रतिष्ठान में हड़ताल पर जाने पर रोक।

4.3 सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) — गिग वर्करों के लिए ऐतिहासिक

वैधानिक पहचान: भारत के इतिहास में पहली बार गिग व प्लेटफॉर्म वर्करों को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया।
सामाजिक सुरक्षा कोष (Social Security Fund):
एग्रीगेटर कंपनियों (Zomato, Swiggy, Uber आदि) को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1% से 2% या गिग वर्करों को किए गए कुल भुगतान का 5% (जो भी कम हो) सामाजिक सुरक्षा कोष में देना अनिवार्य होगा।
पंजीकरण: गिग वर्करों का राष्ट्रीय पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण।

4.4 व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 (OSH Code, 2020)

दैनिक कार्य घंटे की अधिकतम सीमा 8 घंटे तय।
महिलाओं को उनकी सहमति से तथा सुरक्षा व्यवस्था के साथ रात्रि पाली (Night Shift) में कार्य करने की अनुमति।

5. असंगठित क्षेत्र का औपचारिकरण एवं प्रमुख सरकारी पहलें (Formalization & Schemes)

5.1 ई-श्रम पोर्टल (e-Shram Portal)

उद्देश्य: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पहला राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना।
विशेषताएँ:
श्रमिकों को 12 अंकों का Universal Account Number (UAN) प्रदान किया जाता है।
दुर्घटना बीमा कवरेज (PMSBY के तहत ₹2 लाख का आकस्मिक मृत्यु लाभ)।
इसका उद्देश्य लक्षित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को सीधे श्रमिकों तक पहुँचाना है।

5.2 राजस्थान गिग वर्कर अधिनियम, 2023 (राज्य स्तर का अग्रणी कदम)

गिग वर्करों के कल्याण के लिए कानून बनाने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य बना।
इसमें गिग वर्कर वेलफेयर बोर्ड की स्थापना और हर लेनदेन पर 'वेलफेयर सेस' (Welfare Cess) लगाने का प्रावधान है।

5.3 आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के रुझान

श्रम बल सहभागिता दर (LFPR): हाल के वर्षों में ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता में वृद्धि दर्ज की गई है।
स्व-नियोजित (Self-employed) वर्ग: भारत के कार्यबल में स्व-नियोजन (जिसमें गिग वर्कर भी शामिल हैं) का हिस्सा 55% से अधिक है।

6. UPSC परीक्षा विशेष अभ्यास मॉड्यूल (Exam Special Module)

6.1 प्रीलिम्स के लिए त्वरित पुनरीक्षण बिंदु (Quick Revision Points)

सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020: एग्रीगेटर टर्नओवर का 1-2% योगदान अनिवार्य बनाती है।
राष्ट्रीय फ्लोर वेज: केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित, जिसके नीचे राज्य न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकते।
ई-श्रम UAN: 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर।
नीति आयोग अनुमान: 2029-30 तक 2.35 करोड़ गिग वर्कर।

6.2 अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice MCQs)

प्रश्न 1: 'सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.
यह पहली बार गिग वर्करों और प्लेटफॉर्म वर्करों को वैधानिक परिभाषा प्रदान करती है।
2.
इसके तहत एग्रीगेटर कंपनियों के लिए अपने टर्नओवर का एक निश्चित प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान करना अनिवार्य है।
3.
यह केवल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों पर लागू होती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2 और 3

उत्तर: (A) व्याख्या: कथन 3 गलत है क्योंकि सामाजिक सुरक्षा संहिता असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को भी सुरक्षा जाल के दायरे में लाती है।


6.3 मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Blueprint)

प्रश्न: "गिग अर्थव्यवस्था भारत में रोजगार सृजन का नया इंजन बनकर उभरी है, किंतु यह श्रम अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा की कीमत पर विकसित हो रही है।" समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)

                      उत्तर संरचना ढाँचा (Blueprint)
 ┌──────────────────────────────────────────────────────────────────┐
 │ 1. भूमिका (30-40 शब्द): गिग अर्थव्यवस्था की परिभाषा व नीति आयोग │
 │    के आँकड़े (77 लाख वर्कर)।                                     │
 ├──────────────────────────────────────────────────────────────────┤
 │ 2. मुख्य भाग (150-160 शब्द):                                     │
 │    • रोजगार सृजन का इंजन: लचीलापन, युवा रोजगार, DPI का समर्थन।    │
 │    • सामाजिक व आर्थिक चुनौतियाँ: आय की अनिश्चितता, एल्गोरिदमिक│
 │      शोषण, PF/बीमा का न होना।                                    │
 │    • कानूनी प्रयास: सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 व ई-श्रम पोर्टल।   │
 ├──────────────────────────────────────────────────────────────────┤
 │ 3. आगे की राह व निष्कर्ष (40-50 शब्द): केलकर/नीति आयोग की      │
 │    सिफारिशें - फेयरवर्क मानक, न्यूनतम आय सुरक्षा व सतत ढाँचा।    │
 └──────────────────────────────────────────────────────────────────┘