अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पुनःप्रयोज्य रॉकेट एवं अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था • संघ लोक सेवा आयोग 2027

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2026: ‘रॉकेट क्रांति’, पुनःप्रयोज्य प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

4–10 अक्टूबर 2026 के विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की थीम ‘Rocket Revolution’ रही, जो पुनःप्रयोज्य प्रक्षेपण यानों, निजी क्षेत्र और अंतरिक्ष तक पहुँच की घटती लागत पर केंद्रित है।

समाचार एवं अध्ययन तिथि: 9 अक्टूबर 2026
प्रकाशित: 9 अक्टूबर 2026अंतिम अद्यतन: 9 अक्टूबर 2026परीक्षा: प्रारंभिक + मुख्य सामान्य अध्ययन–III

पाठ्यक्रम से सीधा संबंध

  • प्रारंभिक: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, प्रक्षेपण यान, बाह्य अंतरिक्ष संधि और अंतरिक्ष मलबा।
  • मुख्य सामान्य अध्ययन–III: भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियाँ, निजी क्षेत्र, प्रक्षेपण लागत, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और सुरक्षा।

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व अंतरिक्ष सप्ताह प्रत्येक वर्ष 4 से 10 अक्टूबर तक मनाया जाता है। 2026 की थीम ‘Rocket Revolution’ ने उन तकनीकी और व्यावसायिक बदलावों को केंद्र में रखा जो पुनःप्रयोज्य रॉकेट, छोटे उपग्रह और निजी प्रक्षेपण कंपनियों से अंतरिक्ष पहुँच को अधिक नियमित और सस्ता बना रहे हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के मुख्य तथ्य

  • 4 अक्टूबर 1957: स्पुतनिक-1 का प्रक्षेपण — पहला कृत्रिम उपग्रह।
  • 10 अक्टूबर 1967: बाह्य अंतरिक्ष संधि लागू हुई।
  • बाह्य अंतरिक्ष संधि: किसी राष्ट्र को चंद्रमा या अन्य खगोलीय पिंड पर संप्रभुता का दावा करने की अनुमति नहीं देती और कक्षा में जनसंहारक हथियार स्थापित करने पर रोक लगाती है।
  • पुष्पक: इसरो का पुनःप्रयोज्य प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम, जिसमें स्वायत्त लैंडिंग परीक्षण किए गए हैं।
  • कैसलर सिंड्रोम: अंतरिक्ष मलबे की टक्करों से और अधिक मलबा बनने की आत्म-प्रसारित शृंखला।
  • प्रोजेक्ट नेत्र: भारतीय अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा हेतु अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और मलबा निगरानी क्षमता।

मुख्य परीक्षा विश्लेषण

पुनःप्रयोज्यता प्रक्षेपण लागत और मिशन तैयारी समय घटा सकती है, जिससे संचार, पृथ्वी अवलोकन, नेविगेशन और वैज्ञानिक मिशनों में तेजी आती है। भारत के लिए यह निजी अंतरिक्ष उद्योग, छोटे उपग्रह प्रक्षेपण और भविष्य के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों को भी समर्थन देती है।

  • लागत घटने से उपग्रह सेवाओं का लोकतंत्रीकरण और नए स्टार्टअप अवसर।
  • कक्षा में भीड़ बढ़ने से टक्कर और अंतरिक्ष मलबे का जोखिम।
  • उपग्रह-रोधी हथियार और दोहरे उपयोग वाली तकनीकें अंतरिक्ष सुरक्षा की चुनौती बढ़ाती हैं।
  • स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट और सक्रिय मलबा हटाने के लिए वैश्विक नियमों की जरूरत।

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक: (1) बाह्य अंतरिक्ष संधि चंद्रमा पर राष्ट्रीय संप्रभुता का दावा निषिद्ध करती है; (2) कैसलर सिंड्रोम मलबे की कैस्केडिंग टक्करों से संबंधित है; (3) प्रोजेक्ट नेत्र सौर कोरोना अध्ययन मिशन है। सही उत्तर: केवल 1 और 2।

मुख्य: पुनःप्रयोज्य रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुँच की लागत घटाते हैं, परंतु वे बढ़ती कक्षीय भीड़ और शासन की नई चुनौतियाँ भी पैदा करते हैं। परीक्षण कीजिए।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • विश्व अंतरिक्ष सप्ताह → 4–10 अक्टूबर
  • 2026 थीम → Rocket Revolution
  • 4 अक्टूबर 1957 → स्पुतनिक-1
  • 10 अक्टूबर 1967 → बाह्य अंतरिक्ष संधि लागू
  • भारत → पुष्पक पुनःप्रयोज्यता + प्रोजेक्ट नेत्र

प्रमुख स्रोत