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BPaL टीबी उपचार का पेटेंट आवेदन अस्वीकृत: नवाचार, सस्ती दवाएँ और रोगी अधिकार

27 अक्टूबर 2026 भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा BPaL आवेदन अस्वीकृति, बेडाक्विलिन-प्रीटोमैनिड-लाइनज़ोलिड, धारा 3 तथा TRIPS का विश्लेषण।

समाचार संदर्भ: 28–29 अक्टूबर 2026 • GS-II/III • लोक स्वास्थ्य • औषधि पेटेंट

UPSC प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा29 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों? किस आवेदन को अस्वीकार किया गया?

भारतीय पेटेंट कार्यालय ने 27 अक्टूबर 2026 को ग्लोबल अलायंस फॉर टीबी ड्रग डेवलपमेंट (TB Alliance) के BPaL नामक औषधि-संयोजन से संबंधित पेटेंट आवेदन को अस्वीकृत किया। समाचार 29 अक्टूबर को प्रमुखता से आया। विपक्षी पक्षों के अनुसार संयोजन पर पहले से प्रकाशित वैज्ञानिक जानकारी, नवीनता तथा आविष्कारशील कदम की कमी और अन्य कानूनी प्रतिबंध विवाद के केंद्र में थे। पेटेंट नियंत्रक के निर्णय की खबर में पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 15 के तहत इनकार तथा धारा 3 से संबंधित आपत्तियों का उल्लेख है। यह फैसला किसी चिकित्सकीय उपचार को गैरकानूनी घोषित नहीं करता; केवल विशिष्ट पेटेंट आवेदन की स्वीकार्यता का निर्णय है।

BPaL क्या है? तीनों दवाएँ

संक्षिप्त नामदवाआधारभूत भूमिका
Bबेडाक्विलिन (Bedaquiline)माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की ऊर्जा-उत्पादन प्रणाली पर असर
Paप्रीटोमैनिड (Pretomanid)दवा-प्रतिरोधी टीबी उपचार में प्रयुक्त विशिष्ट औषधि
Lलाइनज़ोलिड (Linezolid)जीवाणु के प्रोटीन संश्लेषण को बाधित करने वाली दवा
BPaL पात्र रोगियों के लिए अपेक्षाकृत छोटा, पूरी तरह मौखिक उपचार-विकल्प है। पहले के लंबे और अधिक कठिन उपचारों की तुलना में कुछ रोगियों के लिए इससे उपचार की अवधि और इंजेक्शन से जुड़ी कठिनाई घटती है। फिर भी यह सभी प्रकार की टीबी या हर व्यक्ति के लिए स्वतः उपयुक्त नहीं है। दवा-प्रतिरोध, रोगी की आयु, अन्य बीमारी और उपचार दिशानिर्देश निर्णायक हैं।

BPaLM से अंतर और WHO का वर्तमान संदर्भ

BPaLM में BPaL की तीन दवाओं के अलावा मॉक्सिफ्लॉक्सासिन (Moxifloxacin, M) भी शामिल है। WHO के अनुसार पात्र किशोर और वयस्क MDR/RR-TB में छह माह का BPaLM पसंदीदा विकल्प हो सकता है; फ्लूरोक्विनोलोन प्रतिरोध के कुछ मामलों में मॉक्सिफ्लॉक्सासिन छोड़कर BPaL अपनाया जा सकता है। WHO का उल्लेख आयु 14 वर्ष या उससे अधिक के पात्र रोगियों के संदर्भ में है। कौन-सा उपचार दिया जाए यह चिकित्सक और राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रतिरोध परीक्षण पर निर्भर है। BPaL और BPaLM को बिल्कुल एक ही चार-दवा संयोजन समझना परीक्षा में गलती होगी।

MDR, RR और pre-XDR का सही अर्थ

  • RR-TB: रिफैम्पिसिन (Rifampicin) के प्रति प्रतिरोध वाली टीबी।
  • MDR-TB: कम-से-कम आइसोनियाज़िड तथा रिफैम्पिसिन दोनों के प्रति प्रतिरोध।
  • pre-XDR-TB: MDR/RR-TB के साथ किसी फ्लूरोक्विनोलोन समूह की दवा के प्रति प्रतिरोध।
ये श्रेणियाँ सामान्य टीबी से अलग उपचार-निर्णय की माँग करती हैं। दवाओं का अनुचित उपयोग, अधूरा इलाज, दवा की अनुपलब्धता और संक्रमण-नियंत्रण में कमी रोग की समस्या को बढ़ा सकती है। खाँसी या बुखार के आधार पर घर पर BPaL लेना अनुचित और जोखिमपूर्ण है; परीक्षण, पात्रता और चिकित्सकीय निगरानी अनिवार्य है।

पेटेंट के तीन मुख्य कानूनी परीक्षण

नवीनता: दावा किया गया आविष्कार पहले सार्वजनिक जानकारी में पहले से न हो। आविष्कारशील कदम: पूर्व तकनीक को देखते हुए नया दावा संबंधित विशेषज्ञ के लिए साधारण/स्पष्ट न हो। औद्योगिक उपयोगिता: विधि के अनुसार औद्योगिक अनुप्रयोग की क्षमता।

पेटेंट केवल उपयोगी या जीवनरक्षक होने के कारण स्वतः नहीं मिल जाता। दूसरी तरफ किसी विदेशी या गैर-लाभकारी संगठन का आवेदन भी केवल उसकी पहचान के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता; परीक्षण वैधानिक मानदंड और सबूत पर आधारित होता है। आवेदन खारिज होना हर घटक दवा के सभी मौजूदा पेटेंटों की समाप्ति भी नहीं है।

पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d), 3(e) और 3(i)

धारामूल विचारप्रासंगिकता
3(d)ज्ञात पदार्थ के नए रूप/उपयोग संबंधी निर्धारित प्रतिबंध, औषधीय प्रभावकारिता जैसे विशेष मानदंडसाधारण रूपांतर को स्वतः नया आविष्कार न मानना
3(e)घटकों की गुणधर्मों की मात्र समष्टि देने वाले मिश्रण का प्रश्नमिश्रण में वास्तविक तकनीकी योगदान की जाँच
3(i)मानव/पशु के चिकित्सकीय उपचार की प्रक्रिया के पेटेंट संबंधी अपवादविशिष्ट उपचार-विधि का परीक्षण
समाचार के अनुसार विपक्षियों ने ये आधार उठाए और नियंत्रक ने कई आपत्तियाँ स्वीकार कीं। परीक्षा सावधानी: धारा 3(d) का अर्थ ‘सभी नई दवाओं पर प्रतिबंध’ नहीं है; योग्य नए आविष्कारों के लिए पेटेंट संभव हैं। इसी तरह धारा 3(i) का उपचार-विधि अपवाद औषधि पदार्थ के हर पात्र आविष्कार को स्वतः निषिद्ध नहीं करता।

पेटेंट-विरोध, धारा 15 और अपील

भारत में पेटेंट आवेदन के प्रकाशन के बाद निर्धारित विधि के अनुसार पूर्व-अनुदान विरोध किया जा सकता है। इससे संबंधित वैज्ञानिकों, सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों और नागरिकों को पहले से उपलब्ध जानकारी, कानूनी अपात्रता तथा अपर्याप्त विवरण जैसी आपत्तियाँ उठाने का अवसर मिल सकता है। नियंत्रक दस्तावेज़ और पक्ष सुनकर आवेदन स्वीकार, संशोधित करवाने या अस्वीकार करने का निर्णय कर सकता है। धारा 15 आवेदन को अस्वीकार करने या संशोधन की मांग के अधिकार से जुड़ी है। प्रत्येक विवाद में उचित विधिक उपाय तथा अपील की अलग शर्तें होती हैं; समाचार के आधार पर मामला हमेशा के लिए समाप्त मानना आवश्यक नहीं।

TRIPS और सार्वजनिक स्वास्थ्य में संतुलन

विश्व व्यापार संगठन का TRIPS समझौता बौद्धिक संपदा के न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय नियम निर्धारित करता है। दवाओं पर पेटेंट नवाचार का प्रोत्साहन दे सकते हैं, किंतु ऊँची कीमतें जरूरतमंद मरीजों की पहुँच रोक सकती हैं। दोहा घोषणा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में TRIPS के लचीले प्रावधानों के महत्व को रेखांकित किया। भारत की पेटेंट प्रणाली में पात्रता की कड़ी जाँच, विरोध प्रक्रिया तथा निर्धारित परिस्थितियों में अनिवार्य लाइसेंस जैसे उपाय मौजूद हैं। पेटेंट अस्वीकृति और अनिवार्य लाइसेंस अलग प्रक्रियाएँ हैं।

मरीज की लागत और घरेलू जेनेरिक उद्योग

BPaL जैसे छोटे उपचार कुछ मरीजों में उपचार-पालन तथा रोजगार/यात्रा संबंधी बोझ घटा सकते हैं। यदि एक अनुचित विशिष्ट संयोजन पेटेंट अस्वीकृत होता है तो अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा की संभावना बन सकती है। लेकिन तुरंत सस्ते जेनेरिक की सार्वभौमिक उपलब्धता की गारंटी नहीं: घटक दवाओं के शेष अधिकार, नियामकीय अनुमति, गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था अलग प्रश्न हैं। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में उचित पात्रता वाले रोगियों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की चर्चा समाचार में है; उसके वास्तविक लाभ के लिए निदान, दवा परीक्षण और सतत फॉलो-अप जरूरी हैं।

भारत की स्वास्थ्य रणनीति: चुनौतियाँ और आगे की राह

  • दवा-प्रतिरोध की समय पर प्रयोगशाला पहचान और उपयुक्त उपचार का चयन।
  • कम अवधि की चिकित्सा में भी विषाक्तता और दवा-अनुपालन की सावधान निगरानी।
  • पेटेंट निर्णयों में स्पष्ट वैज्ञानिक आधार, पारदर्शी पूर्व-अनुदान विरोध और विधिक निश्चय।
  • गुणवत्तापूर्ण प्रतिस्पर्धी दवाओं का विश्वसनीय उत्पादन एवं वितरण।
  • टीबी के सामाजिक निर्धारक—पोषण, आवास, कलंक और रोजगार—को स्वास्थ्य नीति में शामिल करना।
निष्कर्ष: नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य विरोधी नहीं; सार्थक आविष्कार को प्रोत्साहन तथा अनावश्यक एकाधिकार से बचाव का संतुलन ही न्यायसंगत व्यवस्था है।

दवा-प्रतिरोध कैसे उत्पन्न होता है?

टीबी जीवाणु में आनुवंशिक परिवर्तन के कारण कुछ दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित हो सकता है। अधूरा उपचार, अनियमित खुराक, खराब गुणवत्तापूर्ण दवा अथवा अनुचित दवा संयोजन प्रतिरोधी जीवाणुओं के चयन को बढ़ावा दे सकते हैं। पर हर MDR-TB मरीज की समस्या को उसकी व्यक्तिगत गलती मानना अनुचित है: प्रतिरोधी संक्रमण व्यक्ति-से-व्यक्ति भी फैल सकता है।

इसलिए उपचार के साथ समय पर आणविक/संवेदनशीलता परीक्षण, संक्रमण नियंत्रण, दवा की बिना रुकावट उपलब्धता, पोषण सहयोग और स्वास्थ्य कार्यकर्ता की मदद आवश्यक है। छह माह का उपचार भी विशेषज्ञ निगरानी के बिना नहीं होना चाहिए।

लाइनज़ोलिड और बेडाक्विलिन की निगरानी

औषधि प्रतिरोधी टीबी की शक्तिशाली दवाएँ उपयोगी होते हुए भी विशेष निगरानी मांग सकती हैं। लाइनज़ोलिड से रक्त कोशिकाओं अथवा तंत्रिकाओं से संबंधित दुष्प्रभाव संभव हैं। बेडाक्विलिन की स्थिति में हृदय की विद्युत गतिविधि संबंधी प्रभावों की चिकित्सकीय निगरानी कुछ रोगियों में जरूरी हो सकती है। अन्य रोग, दवा-दवा अंतःक्रिया और उपचार की अवधि पर व्यक्तिगत निर्णय निर्भर करता है।

ये सामान्य शैक्षिक बिंदु हैं, स्वयं उपचार बदलने के निर्देश नहीं। मुख्य परीक्षा के सार्वजनिक स्वास्थ्य उत्तर में प्रभावी और सुरक्षित उपचार के साथ परीक्षण, निगरानी तथा मरीज सहायता पर जोर देना चाहिए।

पेटेंट के दो अलग प्रश्न: संयोजन और सक्रिय पदार्थ

किसी कंपनी के पास सक्रिय दवा अणु के लिए अलग पेटेंट, प्रक्रिया पेटेंट या अन्य वैधानिक अधिकार हो सकते हैं। दूसरी ओर तीन ज्ञात दवाओं के विशिष्ट संयोजन पर नया पेटेंट दावा अलग प्रश्न है। भारतीय नियंत्रक के सामने चुनौती यह थी कि प्रकाशित वैज्ञानिक जानकारी से परे नवीन और आविष्कारशील तकनीकी योगदान कितना है।

यदि एक संयोजन पेटेंट आवेदन अस्वीकृत हो जाए तो यह स्वतः नहीं कहा जा सकता कि घटक पदार्थों के शेष अधिकार या दवा गुणवत्ता स्वीकृतियाँ अप्रासंगिक हो गईं। इसी तथ्य को सामाजिक स्वास्थ्य पर प्रभाव समझने के लिए आवश्यक बनाना चाहिए।

उचित पेटेंट नीति: चार संतुलित लक्ष्य

लक्ष्यनीतिगत औजार
मौलिक दवा शोध में निवेशवास्तविक पात्र आविष्कार को उचित पेटेंट अधिकार
दवा मूल्य की वहनीयताप्रतिस्पर्धा, जेनेरिक प्रवेश, उचित सार्वजनिक खरीद
नकली/कम गुणवत्ता दवा से सुरक्षाऔषधि नियामकीय गुणवत्ता परीक्षण
कानून की निष्पक्षतापारदर्शी विरोध प्रक्रिया, वैज्ञानिक सबूत, अपील

TRIPS में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए मान्य लचीले प्रावधान हैं, लेकिन उनका प्रयोग विधि के अनुरूप करना होगा। पेटेंट पात्रता की परीक्षा और दवा बाजार की अनुमति दो अलग नियामकीय प्रक्रियाएँ हैं।

प्रारंभिक परीक्षा: बहुविकल्पीय अभ्यास

ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।

प्रश्न 1. BPaL की दवा-संरचना में क्या शामिल है?

  1. बेडाक्विलिन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड
  2. बेडाक्विलिन, प्रीटोमैनिड, मॉक्सिफ्लॉक्सासिन
  3. केवल आइसोनियाज़िड
  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. केवल 3
  4. 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

उत्तर: केवल 1। तीन दवाएँ B, Pa तथा L हैं।

प्रश्न 2. BPaLM और BPaL का अंतर:

  1. BPaLM में मॉक्सिफ्लॉक्सासिन है
  2. दोनों हमेशा चार दवाओं के हैं
  3. BPaL केवल वायरल संक्रमण के लिए है
  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. केवल 3
  4. 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

उत्तर: केवल 1। M चौथी दवा का संक्षिप्त नाम है।

प्रश्न 3. धारा 3(e) का प्रमुख उद्देश्य:

  1. साधारण मिश्रण की पेटेंट पात्रता का परीक्षण
  2. प्रत्येक औषधि को मुफ्त करना
  3. सभी शोध प्रतिबंधित करना
  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. केवल 3
  4. 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

उत्तर: केवल 1। सिर्फ घटकों की गुणधर्मों की समष्टि वाले मिश्रण का प्रश्न है।

प्रश्न 4. BPaL पेटेंट आवेदन अस्वीकृति का अर्थ:

  1. हर घटक दवा के सभी पेटेंट स्वतः समाप्त
  2. विशिष्ट आवेदन पेटेंट-मानदंड पर अस्वीकृत
  3. टीबी का चिकित्सा उपचार प्रतिबंधित
  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. केवल 3
  4. 1 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

उत्तर: केवल 2। एक आवेदन की अस्वीकृति और बाकी औषधि अधिकार अलग हैं।

मुख्य परीक्षा: विश्लेषणात्मक अभ्यास

इस चरण में प्रश्न और विस्तृत विषय सामग्री हैं; पूर्ण आदर्श उत्तर अगले अलग चरण में देंगे।

  1. 15 अंक/250 शब्द: औषधि पेटेंट के नवाचार संबंधी उद्देश्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य की वहनीयता के बीच संतुलन की भारतीय विधिक व्यवस्था का विश्लेषण कीजिए।
  2. 10 अंक/150 शब्द: BPaL/BPaLM में अंतर तथा पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d), 3(e), 3(i) का औषधि मूल्य पर प्रभाव समझाइए।

आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोत