राजव्यवस्था, ग्रामीण शासन एवं जल • UPSC/BPSC 2027

जल जीवन मिशन 2.0 में ‘जल अर्पण’: 1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों में जलापूर्ति प्रणालियों का सामुदायिक हस्तांतरण

विशेष ग्राम सभाओं के दौरान 1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों/गाँवों में ‘जल अर्पण’ के माध्यम से पूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का औपचारिक हस्तांतरण स्थानीय समुदायों को किया गया।

समाचार स्रोत तिथि: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशित: 3 अक्टूबर 2026अंतिम अद्यतन: 3 अक्टूबर 2026परीक्षा: प्रारंभिक + मुख्यसामान्य अध्ययन–II/IIIस्रोत-सत्यापित

पाठ्यक्रम से सीधा संबंध

  • प्रारंभिक: जल जीवन मिशन, हर घर जल प्रमाणपत्र, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति।
  • मुख्य: विकेंद्रीकरण, स्थानीय शासन, सामुदायिक स्वामित्व और सेवा वितरण।

चर्चा में क्यों?

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत ‘जल अर्पण’ को सामुदायिक प्रबंधन की दिशा में प्रमुख सुधार के रूप में आगे बढ़ाया गया। पूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति प्रणालियाँ ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंपी गईं।

जल अर्पण का मूल विचार

निर्माण के बाद योजना केवल सरकारी विभाग की संपत्ति न रहे, बल्कि संचालन, रखरखाव और जवाबदेही में स्थानीय समुदाय की भूमिका स्पष्ट हो—यही जल अर्पण का आधार है।

विशेष तथ्य

  • 1,850 से अधिक ग्राम पंचायत/गाँव शामिल।
  • ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को औपचारिक हस्तांतरण।
  • क्षेत्रीय भाषाओं में ‘हर घर जल’ प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था।

शासन की दृष्टि से महत्व

सामुदायिक स्वामित्व से रखरखाव, स्थानीय निगरानी, उपयोगकर्ता जवाबदेही और दीर्घकालिक सेवा-स्थायित्व को बल मिल सकता है। यह 73वें संविधान संशोधन की विकेंद्रीकृत शासन भावना से भी जुड़ता है।

स्थैतिक पृष्ठभूमि: जल जीवन मिशन

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission—JJM) 15 अगस्त 2019 को घोषित किया गया था। इसका मूल लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connection—FHTC) के माध्यम से निर्धारित गुणवत्ता का पर्याप्त पेयजल नियमित और दीर्घकालिक आधार पर उपलब्ध कराना है। मूल सेवा मानक कम-से-कम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से जुड़ा रहा है।

मिशन का दृष्टिकोण केवल पाइप और नल लगाने तक सीमित नहीं है; जल स्रोत स्थिरता, गुणवत्ता निगरानी, ग्रे-वॉटर प्रबंधन, संचालन एवं रखरखाव तथा सामुदायिक स्वामित्व इसके अभिन्न घटक हैं।

Jal Jeevan Mission 2.0 में बदलाव

2026 तक मिशन का फोकस केवल कनेक्शन संख्या से आगे बढ़कर सेवा वितरण, स्रोत स्थिरता, दीर्घकालिक कार्यक्षमता और समुदाय-आधारित प्रबंधन पर अधिक केंद्रित हो गया है। ‘जल अर्पण’ इसी संक्रमण का प्रतीक है—निर्मित योजना को स्थानीय समुदाय को औपचारिक रूप से सौंपना ताकि संचालन और रखरखाव की स्थानीय जिम्मेदारी स्पष्ट हो।

जल अर्पण क्या है?

  • पूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति योजना का औपचारिक सामुदायिक हस्तांतरण।
  • मुख्य संस्थाएँ — ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति/पानी समिति।
  • 2026 में 1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों/गाँवों में आयोजन।
  • क्षेत्रीय भाषाओं में ‘हर घर जल’ प्रमाण-पत्र जारी करने की नई सुविधा।
  • उद्देश्य — योजना को “सरकार की संपत्ति” से “समुदाय द्वारा प्रबंधित सार्वजनिक सेवा” में बदलना।

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की संरचना

JJM दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्राम पंचायत की उप-समिति के रूप में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (Village Water and Sanitation Committee—VWSC)/पानी समिति लगभग 10–15 सदस्यों वाली स्थानीय संस्था हो सकती है। इसमें लगभग 25% निर्वाचित पंचायत सदस्य, 50% महिलाएँ और शेष में कमजोर वर्गों के प्रतिनिधियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में शामिल करने की परिकल्पना की गई है।

यह संरचना महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में महिलाओं का प्रत्यक्ष अनुभव बहुत अधिक होता है और सामाजिक प्रतिनिधित्व सेवा वितरण की जवाबदेही बढ़ाता है।

कार्यात्मक नल कनेक्शन का अर्थ

FHTC का अर्थ केवल घर तक पाइप पहुँचना नहीं है। कार्यात्मकता में पर्याप्त मात्रा, निर्धारित गुणवत्ता, नियमितता और दीर्घकालिक उपलब्धता महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी गाँव को वास्तविक “हर घर जल” परिणाम तक पहुँचाने के लिये स्रोत, उपचार, वितरण, घरेलू कनेक्शन और संचालन—पूरी सेवा श्रृंखला कार्यशील होना आवश्यक है।

जल गुणवत्ता और स्रोत स्थिरता

  • पेयजल की गुणवत्ता केवल मात्रा जितनी ही महत्वपूर्ण है।
  • भूजल आधारित योजनाओं में पुनर्भरण और जल-स्रोत संरक्षण आवश्यक।
  • ग्रे-वॉटर का स्थानीय उपचार और पुन: उपयोग जलभराव तथा प्रदूषण कम कर सकता है।
  • वर्षाजल संचयन, स्रोत सुदृढ़ीकरण और जल बजटिंग दीर्घकालिक ग्रामीण जल सुरक्षा से जुड़े उपकरण हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के उच्च-मूल्य तथ्य

  • JJM घोषणा — 15 अगस्त 2019।
  • लक्षित सेवा मानक — कम-से-कम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन।
  • FHTC = Functional Household Tap Connection.
  • VWSC/पानी समिति — ग्राम पंचायत की उप-समिति के रूप में सामुदायिक जल प्रबंधन से जुड़ी।
  • VWSC संरचना में महिलाओं की 50% भागीदारी पर जोर।
  • ‘जल अर्पण’ — पूर्ण योजना का ग्राम पंचायत/VWSC को औपचारिक हस्तांतरण।

मुख्य परीक्षा: सामुदायिक स्वामित्व क्यों जरूरी?

स्थिरता: स्थानीय संस्था टूटे नल, पाइप लीकेज और स्रोत समस्या पर जल्दी प्रतिक्रिया दे सकती है। जवाबदेही: उपयोगकर्ता और सेवा प्रदाता के बीच दूरी घटती है। वित्तीय अनुशासन: संचालन एवं रखरखाव की वास्तविक लागत पर स्थानीय चर्चा संभव होती है। समावेशन: महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी से सेवा की प्राथमिकताएँ अधिक न्यायपूर्ण हो सकती हैं।

चुनौतियाँ: तकनीकी क्षमता, शुल्क संग्रह, जल स्रोत का क्षरण, गुणवत्ता परीक्षण, स्थानीय राजनीति, प्रशिक्षित ऑपरेटर और दीर्घकालिक रखरखाव निधि।

संविधान और स्थानीय शासन से संबंध

जलापूर्ति और स्वच्छता स्थानीय शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद पंचायतों को स्थानीय विकास में अधिक भूमिका देने की संवैधानिक दिशा बनी। ‘जल अर्पण’ इसी व्यापक विकेंद्रीकरण सिद्धांत को सेवा-प्रबंधन के स्तर पर मजबूत करता है।

परीक्षा में संभावित भ्रम

  • JJM ग्रामीण घरों के लिये है; शहरी जल मिशनों से अलग है।
  • नल कनेक्शन और कार्यात्मक नल कनेक्शन में अंतर है।
  • VWSC स्वतंत्र केंद्रीय विभाग नहीं; ग्राम स्तर की सामुदायिक संस्था/पंचायत उप-समिति है।
  • ‘जल अर्पण’ नई पाइपलाइन निर्माण योजना नहीं, पूर्ण योजनाओं के सामुदायिक हस्तांतरण का सुधार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. JJM कब शुरू हुआ?
15 अगस्त 2019 को घोषित किया गया।

2. सेवा मानक कितना है?
कम-से-कम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन।

3. VWSC में महिलाओं की कितनी भागीदारी पर जोर है?
50%।

4. जल अर्पण का मूल उद्देश्य क्या है?
पूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति प्रणाली का स्थानीय समुदाय को औपचारिक हस्तांतरण और दीर्घकालिक संचालन-रखरखाव में सामुदायिक स्वामित्व।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: ग्रामीण जलापूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं की स्थिरता में सामुदायिक स्वामित्व और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी क्यों आवश्यक है?

त्वरित पुनरावृत्ति

  • कार्यक्रम: जल अर्पण
  • मिशन: जल जीवन मिशन 2.0
  • संस्थाएँ: ग्राम पंचायत + ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति
  • फोकस: संचालन, रखरखाव और समुदाय-आधारित सेवा प्रबंधन

स्रोत